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टिहरी गढ़वाल: गोवा अग्निकांड में देवप्रयाग के जितेन्द्र की भी गई जिंदगी पिता 8 साल से लापता
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Jitendra Goa fire club: गोवा अग्निकांड मे जितेंद्र की मौत के बाद छीन गया माँ का सहारा, बेपटरी हुई महिला की जिंदगी , रोजगार की तलाश मे पहुँचा था गोवा ...
Jitendra Singh of devprayag tehri garhwal died in goa night club fire incident accident arapora uttarakhand latest news today: उत्तराखंड के युवाओं को अक्सर रोजगार की तलाश में पहाड़ को छोड़कर मैदानी क्षेत्रों की ओर मजबूरन रुख करना पड़ता है। इतना ही नहीं बल्कि रोजगार की तलाश करते-करते कई बार युवा अचानक से लापता तक हो जाते है जबकि कुछ हादसे का शिकार हो जाते हैं। ऐसी ही कुछ दुखद कहानी है टिहरी जिले के युवा की जो रोजगार की तलाश में गोवा तो पहुंचा लेकिन वहाँ पर अग्निकांड की घटना का शिकार हो गया।
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आपको जानकारी देते चलें मूल रूप से टिहरी जिले के देवप्रयाग ब्लॉक के सिद्धपीठ चंद्रवदनी की तलहटी मे बसे जामणी खाल से करीब 9 किलोमीटर दूर संकुल्ड गांव का निवासी 24 वर्षीय जितेंद्र सिंह रोजगार की तलाश में कुछ समय पहले अपने घर को छोड़कर मैदानी क्षेत्र में चला गया था। जिसके बाद जितेंद्र कुछ समय पहले गोवा स्थित बर्च बाई रोमियो क्लब मे पहुंचा और वहां पर कर्मचारी के तौर पर काम करने लगा । लेकिन बीते शनिवार को नाइट क्लब में आग लगने के कारण जितेंद्र हादसे का शिकार हो गया जिसके सूचना मिलते ही मृतक जितेंद्र के परिजनों में कोहराम मच गया। जितेंद्र घर का छोटा बेटा होने के साथ ही अपनी मां रामप्यारी का लाडला था जिसकी मौत के बाद से उसकी माँ बदहवास है।
8 साल पहले जितेंद्र के पिता हुए लापता अब जितेंद्र की मौत से रामप्यारी पर टूटा दुखों का पहाड़ ( tehri garhwal news today goa incident)
दरअसल जितेंद्र के पिता संता सिंह करीब 8 साल पहले दिल्ली में काम करते हुए अचानक लापता हो गए थे जिसके बाद घर पर जितेंद्र की माँ रामप्यारी देवी अकेला रहती है। हालांकि रामप्यारी के पास उनकी दो उम्मीदें उनके दो बेटे आशीष और जितेंद्र थे लेकिन अग्निकांड की घटना ने रामप्यारी से उसका छोटा बेटा जितेंद्र भी छीन लिया। अब रामप्यारी के पास सिर्फ उसके जीने की उम्मीद उसका बड़ा बेटा आशीष ही रह गया है जो वर्तमान में दुबई में कार्यरत है। जितेंद्र की मौत के बाद से उसकी बहन विशम्बरी और अनीता का रो रो कर बुरा हाल है। जितेंद्र की दोनों बहनों की शादी करीब 7 साल पहले हो चुकी है, जितेंद्र और आशीष दोनों कुंवारे बेटों के लिए उनकी माँ बहू लाने का सपना देख रही थी लेकिन रामप्यारी के सपनों को अग्निकांड ने राख कर रख दिया।
