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Uttarakhand news live: उत्तराखण्ड आना होगा महंगा, 1 अप्रैल से पर्यटकों पर लगेगा नया टैक्स
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Uttarakhand users charge tax: उत्तराखंड आने वाले पर्यटकों को जेब करनी होगी अधिक ढीली ,1 अप्रैल से वसूला जाएगा नया चार्ज..
Uttarakhand news live tourists facing a solid waste management users charge tax from April 1 breaking news today: उत्तराखंड पर्यटन की दृष्टि से अत्यधिक महत्वपूर्ण राज्य माना जाता है, जहां पर अक्सर पर्यटक घूमने के लिए भारी संख्या में पहुंचते हैं। उत्तराखंड जैसे पहाड़ी राज्य में पर्यटकों से ठोस अपशिष्ट प्रबंधन के लिए अब यूजर चार्ज वसूला जाएगा। केंद्र सरकार द्वारा अधिसूचित ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियम 2026 में इस नई व्यवस्था को लागू किया गया है। इस व्यवस्था के तहत स्थानीय निकायों की आय बढ़ेगी वहीं पर्यटकों की जवाबदेही तय होगी।
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बता दें उत्तराखंड में ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियम 1 अप्रैल 2026 से लागू होने जा रहा है। इस नियम के तहत पर्वतीय क्षेत्रों में स्थित नगर निकायों में गैर बायोडिग्रेडेबल कचरे के लिए विशेष संग्रहण केंद्र स्थापित होंगे ताकि प्लास्टिक और अन्य अपशिष्ट पहाड़ों व जलस्रोतों तक न पहुंच सके। स्थानीय निवासियों को कचरा स्थानीय निकायों को सौंपने के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा। खुले में कूड़ा फैलाने पर सख्ती बरती जाएगी इसके साथ ही होटल और रेस्टोरेंट को राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड या प्रदूषण नियंत्रण समिति द्वारा तय मानकों के अनुसार गीले अपशिष्ट का प्रसंस्करण करना अनिवार्य होगा।
3000 से अधिक थोक अपशिष्ट उत्पादक, खुद करेंगे कचरा प्रसंस्करण
ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियम 2026 के लागू होने से थोक अपशिष्ट उत्पादकों की जवाबदेही बढ़ेगी। इसके लिए उत्तराखंड में थोक अपशिष्ट उत्पादकों की पहचान का काम तेजी से किया जाएगा। शहरी विकास विभाग और स्वच्छ भारत मिशन के अनुसार राज्य में करीब 3000 से अधिक थोक अपशिष्ट उत्पादक है। इन्हें अपने परिसर में उत्पन्न कर ठोस कचरे के संग्रहण पृथक्करण और प्रसंस्करण की जिम्मेदारी खुद उठानी होगी।
2132 टन ठोस अपशिष्ट उत्पन्न ( Uttarakhand news today)
बताते चलें वर्तमान में प्रदेश में प्रतिदिन लगभग 2132 टन ठोस अपशिष्ट उत्पन्न हो रहा है ,जिसमें बड़ी मात्रा अब भी लैंडफिल पर निर्भर है। देहरादून ,हरिद्वार ,नैनीताल उधम सिंह नगर जैसे जिलों में अपशिष्ट प्रबंधन की चुनौती बनी हुई है। राज्य में कुल 61 लेगेसी वेस्ट डंप साइटें हैं, जिनमें लगभग 23.5 लाख मीट्रिक टन पुराना कचरा जमा है जबकि करीब 45 प्रतिशत लेगेसी वेस्ट का ही निपटान हो सका है, वहीं शेष पर कार्य जारी है।
