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Uttarakhand news: Relief for UPNL employees regularization High Court Orders Minimum Salary Benefits
Image : सांकेतिक फोटो ( Uttarakhand UPNL employees regularization)

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UTTARAKHAND NEWS देहरादून

Uttarakhand UPNL: नैनीताल हाईकोर्ट सख्त, उपनल कर्मचारियों को पहले न्यूनतम वेतनमान देने के निर्देश

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Uttarakhand UPNL employees regularization||Uttarakhand UPNL Employees Regularization|| नैनीताल हाईकोर्ट में उपनल कर्मचारियों के मामले पर सुनवाई, सरकार को न्यूनतम वेतनमान देने के निर्देश

Uttarakhand UPNL Employees Regularization: उत्तराखंड के विभिन्न सरकारी विभागों में वर्षों से कार्यरत उपनल संविदा कर्मचारियों के नियमितीकरण को लेकर नैनीताल हाईकोर्ट में एक बार फिर अहम सुनवाई हुई। यह सुनवाई उन कर्मचारियों द्वारा दायर अवमानना याचिका पर की गई, जिसमें आरोप लगाया गया कि हाईकोर्ट के पूर्व आदेशों के बावजूद राज्य सरकार ने अब तक कर्मचारियों को नियमित नहीं किया और न ही उन्हें चयनित वेतनमान का लाभ दिया गया।

साथ ही कर्मचारियों ने यह भी मुद्दा उठाया कि उन्हें दिए जा रहे वेतन से जीएसटी की कटौती की जा रही है, जिससे उन्हें आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है।

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कोर्ट ने सरकार से क्या कहा? (High Court Hearing UPNL)

मामले की सुनवाई गुरुवार 29 मई को न्यायमूर्ति राकेश थपलियाल की एकलपीठ में हुई। सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने राज्य सरकार से कहा कि उपनल कर्मचारियों को पहले न्यूनतम वेतनमान दिया जाए। कोर्ट ने इस विषय को गंभीर मानते हुए अगली सुनवाई की तारीख 9 जून तय की है।

सरकार ने कोर्ट में रखा अपना पक्ष (Uttarakhand Government Statement UPNL)

सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से कोर्ट में कहा गया कि उपनल कर्मचारियों की जगह जो नई नियुक्तियां की जानी थीं, उन्हें फिलहाल वापस ले लिया गया है। सरकार की तरफ से यह भी कहा गया कि यदि कर्मचारी अन्य कर्मचारियों की तरह अतिरिक्त मांग नहीं करेंगे, तो सरकार उन्हें न्यूनतम वेतनमान देने के लिए तैयार है।

सरकार के इस बयान को सुनने के बाद कोर्ट ने स्पष्ट रूप से कहा कि कर्मचारियों को पहले न्यूनतम वेतनमान का लाभ मिलना चाहिए।

कर्मचारियों ने पुराने नियमों का दिया हवाला (UPNL Contract Workers)

उपनल संविदा कर्मचारी संघ की ओर से कोर्ट में दलील दी गई कि वर्ष 2013 की नियमावली के तहत स्कंद पुष्प केंद्र में कार्यरत उपनल कर्मचारियों को नियमित किया गया था। इसी आधार पर वर्तमान कर्मचारियों को भी नियमित किया जाना चाहिए।

संघ ने यह भी सवाल उठाया कि जब पहले इसी प्रकार नियमितीकरण किया जा चुका है, तो अब इस मामले को बार-बार कैबिनेट में ले जाने की आवश्यकता क्यों पड़ रही है।

अवमानना याचिका में क्या कहा गया? (Contempt Petition)

उत्तराखंड उपनल संविदा कर्मचारी संघ के अधिवक्ताओं ने कोर्ट को बताया कि पूर्व में हाईकोर्ट की खंडपीठ ने कर्मचारियों के नियमितीकरण को लेकर आदेश जारी किया था, लेकिन राज्य सरकार ने अब तक उस आदेश पर कोई ठोस निर्णय नहीं लिया।

इतना ही नहीं, सरकार की ओर से उस आदेश को हाईकोर्ट के रिकॉर्ड में भी प्रस्तुत नहीं किया गया। संघ की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता ने इस अवमानना याचिका — उत्तराखंड उपनल संविदा कर्मचारी संघ बनाम आनंद बर्धन, मुख्य सचिव उत्तराखंड — पर प्राथमिकता के आधार पर सुनवाई की मांग की थी।

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अगली सुनवाई 9 जून को (Nainital High Court News)

अब इस पूरे मामले पर अगली सुनवाई 9 जून को होगी। उपनल कर्मचारियों को उम्मीद है कि उन्हें नियमितीकरण और वेतनमान को लेकर राहत मिल सकती है। वहीं राज्य सरकार की ओर से भी न्यूनतम वेतनमान देने के संकेत मिलने के बाद हजारों कर्मचारियों की नजरें अब हाईकोर्ट के अगले फैसले पर टिकी हुई हैं।

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