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Uttarakhand news: tehri garhwal meenal negi UPSC result 2025 passed got air 66
फोटो सोशल मीडिया meenal negi UPSC result 2025

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बधाई: टिहरी गढ़वाल की मीनल नेगी ने उत्तीर्ण की UPSC परीक्षा, देश में हासिल की 66वीं रैंक

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Uttarakhand news: tehri garhwal meenal negi UPSC result 2025 passed got air 66: टिहरी की बेटी ने बढ़ाया प्रदेश का मान: चंबा की मीनल नेगी ने UPSC में हासिल की ऑल इंडिया रैंक 66

Uttarakhand news: tehri garhwal meenal negi UPSC result 2025 passed got air 66: उत्तराखंड के टिहरी गढ़वाल जिले के चंबा क्षेत्र की बेटी मीनल नेगी ने संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) की सिविल सेवा परीक्षा में ऑल इंडिया रैंक 66 हासिल कर प्रदेश का नाम रोशन किया है। सीमित संसाधनों के बीच पहाड़ के एक छोटे से गांव से निकलकर देश की सबसे प्रतिष्ठित परीक्षा में यह सफलता प्राप्त करना अपने आप में प्रेरणादायक कहानी बन गई है।

मीनल नेगी मूल रूप से टिहरी गढ़वाल जिले के चंबा क्षेत्र के दिवाड़ा गांव की रहने वाली है। उनके पिता प्रीतम सिंह नेगी शिक्षा विभाग में शिक्षक हैं और वर्तमान में टिहरी के डोबरा-कोटेश्वर क्षेत्र के एक विद्यालय में कार्यरत हैं, जबकि उनकी माता मीना नेगी गृहिणी हैं। परिवार में शिक्षा और अनुशासन का माहौल रहा, जिसने मीनल के व्यक्तित्व और उनके लक्ष्य को आकार देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उनके दादा भी भारतीय सेना में सेवा दे चुके हैं, जिससे परिवार में देश सेवा की भावना स्वाभाविक रूप से मजबूत रही।

पहाड़ के स्कूल से शुरू हुआ सपना

मीनल ने अपनी शुरुआती पढ़ाई चंबा क्षेत्र के स्थानीय विद्यालयों से पूरी की। सीमित संसाधनों वाले पहाड़ी स्कूलों में पढ़ते हुए भी उन्होंने पढ़ाई के प्रति गंभीरता बनाए रखी। स्कूल के दिनों में ही उनके मन में प्रशासनिक सेवा में जाने का विचार आकार लेने लगा। समाज और देश के लिए कुछ करने की इच्छा धीरे-धीरे उनके जीवन का लक्ष्य बन गई।

देहरादून में रहकर की ऑनलाइन तैयारी

अक्सर माना जाता है कि UPSC जैसी परीक्षा की तैयारी के लिए बड़े शहरों का रुख करना जरूरी होता है, लेकिन मीनल ने इस धारणा को काफी हद तक गलत साबित किया। उन्होंने अपनी तैयारी के लिए देहरादून को चुना और वहीं रहकर ऑनलाइन माध्यम से अध्ययन शुरू किया। ऑनलाइन लेक्चर, डिजिटल अध्ययन सामग्री और नियमित अभ्यास के सहारे उन्होंने अपनी पढ़ाई को व्यवस्थित ढंग से आगे बढ़ाया। तकनीक के सही उपयोग और अनुशासित दिनचर्या ने उनकी तैयारी को मजबूती दी।

पहले प्रयास की असफलता बनी सीख

मीनल की सफलता का रास्ता आसान नहीं रहा। अपने पहले प्रयास में वह प्रारंभिक परीक्षा भी पार नहीं कर सकीं। हालांकि उन्होंने इस असफलता को निराशा नहीं बनने दिया। उन्होंने अपनी तैयारी का गहन विश्लेषण किया और कमियों को समझते हुए नई रणनीति के साथ दोबारा तैयारी शुरू की। यही दृढ़ता दूसरे प्रयास में उनकी सफलता का आधार बनी।

गांव से लेकर पूरे प्रदेश में खुशी

मीनल नेगी की उपलब्धि की खबर जैसे ही सामने आई, उनके गांव दिवाड़ा समेत पूरे चंबा क्षेत्र में खुशी का माहौल बन गया। रानीचौरी से आगे नकोट की दिशा में स्थित यह छोटा सा गांव आज उनकी सफलता के कारण चर्चा में है। स्थानीय लोगों का कहना है कि मीनल की उपलब्धि पहाड़ के युवाओं, खासकर बेटियों के लिए प्रेरणा बनेगी।

युवाओं को दिया सफलता का मंत्र

मीनल का मानना है कि सिविल सेवा जैसी कठिन परीक्षा की तैयारी के लिए सबसे पहले लक्ष्य स्पष्ट होना चाहिए। उनके अनुसार नियमित दिनचर्या, सही अध्ययन सामग्री का चयन और निरंतर पुनरावृत्ति सफलता की कुंजी है। वे यह भी कहती हैं कि लंबी तैयारी के दौरान कई बार निराशा आती है, लेकिन ऐसे समय में धैर्य और सकारात्मक सोच बनाए रखना बेहद जरूरी होता है।
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