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Image : सांकेतिक फोटो ( Uttarakhand news today)

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UTTARAKHAND NEWS पिथौरागढ़

Uttarakhand news today: उत्तराखण्ड वाइब्रेंट विलेज में सेना ने 35 साल बाद खोला बंद स्कूल

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Uttarakhand news today: Pithoragarh news today Indian Army news today army goodwill school gunji 35 साल बाद फिर गूंजी गांव में गूंजेगी बच्चों की आवाज, भारतीय सेना ने दुर्गम सीमा क्षेत्र में फिर जलाया शिक्षा का दीप

Uttarakhand news today: indian Army reopens closed school in gunji uttarakhand Vibrant Village Pithoragarh nepal china border uttarakhand breaking news today: भारत-चीन सीमा से सटे उत्तराखंड के अंतिम गांवों में शामिल गुंजी में तीन दशक बाद शिक्षा की नई शुरुआत होने जा रही है। समुद्र तल से करीब 10,500 फीट की ऊंचाई पर बसे इस सामरिक रूप से संवेदनशील गांव में वर्ष 1991 से बंद पड़ा राजकीय प्राथमिक विद्यालय अब फिर से बच्चों की किलकारियों से गुलजार होगा। भारतीय सेना ने ऑपरेशन सद्भावना के तहत इस विद्यालय का आधुनिक स्वरूप में पुनर्निर्माण कर सीमांत क्षेत्र के लोगों को बड़ी सौगात दी है।हाल ही में सेना के वरिष्ठ अधिकारियों और ब्रिगेडियर स्तर के अधिकारियों की मौजूदगी में विद्यालय भवन का लोकार्पण किया गया। कार्यक्रम में स्थानीय ग्रामीणों ने पारंपरिक रं संस्कृति के अनुसार तिलक, आरती और माल्यार्पण कर सेना का स्वागत किया।

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सीमांत गांव में शिक्षा की नई उम्मीद (Pithoragarh news today uttarakhand Border Education Initiative)

उच्च हिमालयी व्यास घाटी की कठिन भौगोलिक परिस्थितियों और सर्दियों में होने वाले पलायन के कारण यह विद्यालय करीब 35 वर्षों से बंद पड़ा था। अब सेना ने लगभग 72 लाख रुपये की लागत से यहां आधुनिक सुविधाओं से लैस नया भवन तैयार किया है. विद्यालय परिसर में बच्चों के लिए कंप्यूटर लैब, किड्स पार्क और आधुनिक शिक्षण संसाधनों की व्यवस्था की गई है। उद्घाटन के बाद भवन को संचालन के लिए ग्राम सभा गुंजी को सौंप दिया गया। ग्राम सभा के निर्णय के अनुसार आगामी शिक्षा सत्र से गुंजी, नाबी, कुटी, रोंगकोंग और नपलच्यू गांवों के बच्चों को नर्सरी में प्रवेश दिया जाएगा। अभिभावकों से आधार कार्ड और जन्म प्रमाण पत्र जमा कराने को कहा गया है।

सेना खुद शुरू करेगी नर्सरी कक्षाएं (uttarakhand army school indian army Operation Sadbhavana)

फिलहाल प्रारंभिक स्तर की कक्षाओं का संचालन भारतीय सेना की ओर से किया जाएगा। बाद में शिक्षा विभाग के सहयोग से यहां नियमित सरकारी शिक्षकों की नियुक्ति की संभावना भी जताई जा रही है।खंड शिक्षा अधिकारी धारचूला की मौजूदगी में इस दिशा में आगे की प्रक्रिया पर भी चर्चा हुई। अधिकारियों का मानना है कि यदि व्यवस्थाएं सुचारु रहीं तो यह विद्यालय भविष्य में स्थायी सरकारी स्कूल के रूप में संचालित किया जा सकेगा।

सीमांत गांवों के लिए बड़ी राहत (uttarakhand Vibrant Village Scheme)

गुंजी गांव न सिर्फ प्रथम वाइब्रेंट विलेज योजना के तहत महत्वपूर्ण गांवों में शामिल है, बल्कि आदि कैलास और कैलास मानसरोवर यात्रा का प्रमुख पड़ाव भी माना जाता है। यही क्षेत्र भारत-चीन सीमा व्यापार के लिए भारतीय मंडी के रूप में भी पहचान रखता है।स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि वर्षों से बच्चों की पढ़ाई के लिए परिवारों को नीचे के क्षेत्रों की ओर पलायन करना पड़ता था। स्कूल बंद होने से गांवों में शैक्षिक गतिविधियां लगभग समाप्त हो गई थीं। अब नए भवन के निर्माण से सीमांत क्षेत्र में फिर उम्मीद जगी है।

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आंगनबाड़ी केंद्र संचालन पर भी मंथन (uttarakhand school news today Rural Education Development)

कार्यक्रम के दौरान शीतकालीन प्रवास के समय आंगनबाड़ी केंद्र संचालन को लेकर भी चर्चा की गई। ग्रामीणों ने जिला प्रशासन और महिला कल्याण विभाग से इस संबंध में वार्ता आगे बढ़ाने का निर्णय लिया। इस अवसर पर पद्मश्री मोहन सिंह गुंज्याल, पूर्व डीआईजी के.एस. गुंज्याल, पूर्व प्रधान सुरेश गुंज्याल, सरपंच लक्ष्मी गुंज्याल और व्यास घाटी की पांचों ग्राम सभाओं के लोग पारंपरिक वेशभूषा में मौजूद रहे। गौरतलब है कि व्यास और दारमा घाटी के गांवों में पहले गर्मियों के दौरान स्थानीय विद्यालय संचालित होते थे, जबकि सर्दियों में इन्हें निचले इलाकों में शिफ्ट किया जाता था। वर्तमान में इन क्षेत्रों के अधिकांश विद्यालय धारचूला नगर में संचालित हो रहे हैं। अब गुंजी में विद्यालय दोबारा खुलने से सीमांत क्षेत्र में शिक्षा को लेकर नई उम्मीदें पैदा हो गई हैं।

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