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Uttarakhand PRD News: 2900 personnel were not removed from duty due to lack of budget for soldiers breaking news today
सांकेतिक फोटो Uttarakhand PRD News

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UTTARAKHAND NEWS देहरादून

Uttarakhand PRD News: उत्तराखण्ड पीआरडी जवानों के लिए बजट नहीं हटाए गए 2900 कर्मी

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Uttarakhand PRD News: 2900 personnel were not removed from duty due to lack of budget for soldiers breaking news today: बजट संकट की मार: उत्तराखंड में 2900 पीआरडी जवान यातायात और थानों से हटाए गए, संगठन में उबाल

Uttarakhand PRD News: 2900 personnel were not removed from duty due to lack of budget for soldiers breaking news today: उत्तराखंड में कार्यरत पीआरडी जवानों के लिए एक झटका देने वाली खबर सामने आ रही है जहां कानून-व्यवस्था और यातायात संचालन में वर्षों से अहम भूमिका निभा रहे 2900 प्रांतीय रक्षक दल (पीआरडी) स्वयंसेवकों को एक झटके में ड्यूटी से हटा दिया गया है। वजह साफ है—विभाग के पास अब इनके लिए बजट नहीं बचा। युवा कल्याण एवं प्रांतीय रक्षक दल निदेशालय के निर्देश पर चार फरवरी से इन स्वयंसेवकों से काम न लेने के आदेश जारी कर दिए गए हैं। इस फैसले के बाद प्रदेश भर में तैनात पीआरडी जवानों में गहरी नाराजगी है। यातायात व्यवस्था, थानों और चौकियों में तैनात ये स्वयंसेवक अचानक बेरोजगार हो गए हैं, जबकि राज्य में त्योहारों और आगामी आयोजनों को देखते हुए उनकी जरूरत लगातार बनी हुई है।

कैसे हटे 2900 पीआरडी जवान

बताया गया है कि यह प्रदेश में कुल 10 हजार से अधिक पीआरडी स्वयंसेवक पंजीकृत हैं, जिनमें से फिलहाल 7514 ड्यूटी पर बने हुए हैं। अधिकारियों के अनुसार, हटाए गए 2900 जवानों की तैनाती मई 2024 में चारधाम यात्रा के दौरान विभिन्न जिलों में की गई थी। इसके लिए सरकार ने करीब 32 करोड़ रुपये का बजट स्वीकृत किया था। बजट की अवधि समाप्त होते ही इनकी सेवाएं भी समाप्त कर दी गईं। देहरादून जिला युवा कल्याण एवं प्रांतीय रक्षक दल अधिकारी प्रमोद चंद्र पाण्डेय के अनुसार, पीआरडी जवानों की तैनाती पूरी तरह सरकार की मांग और बजट उपलब्धता पर निर्भर करती है। दिसंबर तक की स्वीकृति समाप्त हो चुकी है और अब नई मांग आने पर ही कुछ स्वयंसेवकों को दोबारा बुलाया जाएगा।

जवानों की पीड़ा: “जरूरत पड़ने पर ही काम, फिर बाहर”

ड्यूटी से हटाए गए पीआरडी जवानों का कहना है कि वे वर्षों से पुलिस थानों, सचिवालय, विधानसभा, आरटीओ, आबकारी, शिक्षा, जल संस्थान, समाज कल्याण जैसे विभागों में सेवाएं दे रहे हैं। प्रदेश संयोजक प्रमोद मंद्रवाल ने कहा— “विधायको मंत्रियों और अधिकारियों के वेतन-भत्ते बढ़ रहे हैं, लेकिन हमारे लिए न स्थायी रोजगार है, न सम्मानजनक वेतन। 1948 से चला आ रहा यह विभाग आज भी उपेक्षा झेल रहा है। जब जरूरत होती है, हमें बुला लिया जाता है और फिर हटा दिया जाता है। त्योहार सामने हैं, बच्चों की फीस और घर का खर्च कैसे चलेगा?”

समान काम, समान वेतन की मांग तेज

पीआरडी हित संगठन ने सरकार पर भेदभावपूर्ण रवैया अपनाने का आरोप लगाया है। संगठन का कहना है कि उपनल कर्मचारियों और होमगार्ड्स को समान कार्य के लिए समान वेतन दिया जा रहा है, जबकि पीआरडी जवानों को इससे वंचित रखा गया है। संगठन की निरंजनपुर में हुई बैठक में यह मांग जोर-शोर से उठी कि पीआरडी जवानों को भी समान काम के लिए समान वेतन दिया जाए और हटाए गए 2900 जवानों को तत्काल बहाल किया जाए।

आंदोलन की चेतावनी

बीते रोज इस संबंध में एक बैठक आयोजित की गई। बैठक में निर्णय लिया गया कि थानों और चौकियों से हटाए गए स्वयंसेवक प्रांतीय रक्षक दल निदेशालय जाकर निदेशक से सीधे वार्ता करेंगे। यदि मांगें नहीं मानी गईं, तो संगठन धरना-प्रदर्शन और उग्र आंदोलन शुरू करेगा। पीआरडी जवानों का कहना है कि सरकार ने उनके लिए नीति तो बनाई है—जिसमें सेवानिवृत्ति आयु और योग्यता तय की गई है—लेकिन साल भर काम की गारंटी अब भी नहीं है। यही अस्थिरता उनके भविष्य पर सबसे बड़ा सवाल बनकर खड़ी है।
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