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Uttarakhand school bus fare: A policy will be made to fix school bus fares, a major decision will be taken today.
सांकेतिक फोटो Uttarakhand school bus fare

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UTTARAKHAND NEWS देहरादून

Uttarakhand school bus fare: स्कूल बस किराया तय करने को बनेगी नीति, आज होगा बड़ा फैसला

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Uttarakhand school bus fare: A policy will be made to fix school bus fares, a major decision will be taken today: स्कूल बस-वैन किराए पर लगेगी लगाम: पहली बार बनेगी नीति, अभिभावकों और संचालकों के बीच संतुलन की कोशिश

Uttarakhand school bus fare: A policy will be made to fix school bus fares, a major decision will be taken today: उत्तराखंड में लंबे समय से विवाद और शिकायतों का कारण बने स्कूल बस और वैन किराए को लेकर अब सरकार निर्णायक कदम उठाने जा रही है। आज बुधवार को देहरादून में होने वाली राज्य परिवहन प्राधिकरण की बैठक में इस मुद्दे पर ठोस नीति तय किए जाने की संभावना है, जिससे अभिभावकों को राहत और परिवहन संचालकों को स्पष्ट दिशा मिल सके।

अब तक क्यों था विवाद

प्रदेश में स्कूल वाहनों के किराए को लेकर कोई निर्धारित ढांचा नहीं था। इसी वजह से अलग-अलग क्षेत्रों में मनमाने शुल्क की शिकायतें सामने आती रही हैं। पिछले वर्ष इन शिकायतों के बाद गठित समिति ने विस्तृत अध्ययन कर अपनी रिपोर्ट शासन को सौंप दी थी, जिसके आधार पर अब अंतिम निर्णय की तैयारी है।

मैदान और पहाड़ के लिए अलग व्यवस्था

सूत्रों के अनुसार, प्रस्तावित नीति में मैदानी और पर्वतीय क्षेत्रों की भौगोलिक परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए अलग-अलग श्रेणियां बनाई जा सकती हैं। पहाड़ी क्षेत्रों में दूरी, ईंधन खर्च और मार्ग की कठिनाई को देखते हुए किराए का ढांचा अलग रखने पर सहमति बनती दिख रही है।

बढ़ती लागत का दबाव

स्कूल वाहन संचालकों का कहना है कि वर्तमान किराया बढ़ती महंगाई के मुकाबले पर्याप्त नहीं है। जीपीएस, सीसीटीवी, फिटनेस, बीमा और कर्मचारियों के वेतन जैसे खर्च लगातार बढ़ रहे हैं। उनका तर्क है कि यदि न्यूनतम मासिक शुल्क तय नहीं किया गया, तो संचालन लागत निकालना मुश्किल हो जाएगा।

हजारों परिवारों की रोजी-रोटी जुड़ी

यह क्षेत्र केवल परिवहन सेवा तक सीमित नहीं है, बल्कि बड़े स्तर पर रोजगार का माध्यम भी है। प्रदेश में हजारों बसें और वैन संचालित हैं, जिनसे जुड़े ड्राइवर, कंडक्टर और अन्य कर्मचारी अपनी आजीविका चला रहे हैं।

संतुलन की चुनौती

सरकार के सामने सबसे बड़ी चुनौती यही है कि वह ऐसा किराया ढांचा तय करे जो अभिभावकों पर अतिरिक्त बोझ न डाले और साथ ही संचालकों की लागत भी पूरी हो सके।

फैसले पर टिकी नजरें

आज होने वाली बैठक को इस लिहाज से अहम माना जा रहा है कि यह पहली बार होगा जब राज्य में स्कूल परिवहन को लेकर स्पष्ट नीति सामने आएगी।
यह भी पढ़ें- Uttarakhand school bus fare: उत्तराखण्ड स्कूल बस और वैन संचालक नहीं वसूल सकेंगे मनमाना किराया

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