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Uttarakhand school fees structure : Schools in Uttarakhand are in trouble due to arbitrary fee hike latest news.
Image : सांकेतिक फोटो ( Uttarakhand school fees structure)

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UTTARAKHAND NEWS देहरादून

Uttarakhand school fees उत्तराखंड में मनमानी फीस बढ़ोतरी पर स्कूलों की खैर नहीं…

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Uttarakhand school fees structure : Schools in Uttarakhand are in trouble due to arbitrary fee hike latest news.  : स्कूलों में मनमानी फीस बढ़ोतरी पर राज्य बाल अधिकार आयोग सख्त, मिली शिकायत तो होगी कड़ी कार्रवाई

Uttarakhand school fees structure : Schools in Uttarakhand are in trouble due to arbitrary fee hike latest news: (Uttarakhand School Fee Hike News  Education Policy Update ) उत्तराखंड में बुधवार से नया शैक्षणिक सत्र 2026-27 शुरू हो गया है। इसी बीच कुछ निजी विद्यालयों द्वारा नियम विरुद्ध तरीके से फीस बढ़ाने की शिकायतें सामने आने लगी हैं। इस पर राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग ने सख्त रुख अपनाते हुए साफ चेतावनी दी है कि गलत तरीके से फीस बढ़ाने वाले स्कूलों पर कार्रवाई तय है।

आयोग की अध्यक्ष डॉ. गीता खन्ना ने कहा कि ऐसे विद्यालय प्रबंधन की “खैर नहीं” जो नियमों को ताक पर रखकर अभिभावकों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ डालते हैं। उन्होंने स्पष्ट कहा कि—
“नियमों के खिलाफ फीस बढ़ाने वाले स्कूलों को किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।”

यह भी पढ़े :Uttarakhand school news: 1 अप्रैल से 6.29 लाख प्राथमिक छात्रों को मिलेंगी मुफ्त किताबें

(Uttarakhand school News Update) शिक्षा का उद्देश्य केवल अंक नहीं, संस्कार और अनुशासन भी

डॉ. खन्ना ने कहा कि नया शैक्षणिक सत्र नई ऊर्जा, नए संकल्प और नई संभावनाओं के साथ शुरू होता है। अभिभावक और बच्चे इस समय सबसे ज्यादा उत्साहित रहते हैं, और यही भविष्य की सबसे बड़ी ताकत है।

उन्होंने कहा कि जब माता-पिता अपने बच्चों के लिए विद्यालय चुनते हैं तो उन्हें यह समझना चाहिए कि शिक्षा केवल अंकों और किताबों तक सीमित नहीं है।
एक विद्यालय का वास्तविक उद्देश्य बच्चों में—
संस्कार,
अनुशासन,
सशक्त व्यक्तित्व निर्माण
होना चाहिए।

(Uttarakhand School safety News) हाल की बस दुर्घटनाओं पर चिंता, बच्चों का व्यवहार भी बना चुनौती

पिछले दिनों हुई कई स्कूल बस दुर्घटनाओं और बच्चों के आक्रामक व्यवहार पर भी आयोग ने चिंता जताई।
डॉ. खन्ना ने कहा—
“ये घटनाएं हमें सोचने पर मजबूर करती हैं कि क्या हम अपने बच्चों को सही दिशा दे पा रहे हैं?”

उन्होंने कहा कि अब समय आ गया है कि शिक्षा के साथ-साथ बच्चों को—
जीवन कौशल,
भावनात्मक संतुलन,
नैतिक मूल्य
भी सिखाए जाएं।
अभिभावकों से भी अपील की गई कि वे बच्चों के साथ प्रेम और संवाद बनाए रखें, उनका समय दें और उनकी बात सुनें।

नया सत्र शुरू, फिर भी बच्चों को नहीं मिली किताबें( School Books Delay Education Department Uttarakhand)

नए शैक्षणिक सत्र की शुरुआत तो आज से हो गई, लेकिन विभाग के दावों के बावजूद बड़ी संख्या में बच्चों को मुफ्त पुस्तकें उपलब्ध नहीं हो सकीं।

माध्यमिक शिक्षा निदेशक डॉ. मुकुल कुमार सती ने बताया कि किताबें जल्द स्कूलों में पहुँचना शुरू होंगी। पहले कहा गया था कि सभी छात्र-छात्राओं को 28 मार्च तक किताबें मिल जाएँगी, परन्तु समय पर वितरण नहीं हो पाया।

जिला-वार किताबों की उपलब्धता इस प्रकार रही—
43 में से 78 हजार छात्र-छात्राओं को इंतज़ार,
44 हजार विद्यार्थियों तक को भी किताबें नहीं मिलीं, राज्यभर में 67 हजार से अधिक बच्चों को अभी भी किताबों का इंतज़ार है।

(Uttarakhand School Breaking News) छह प्रमुख विषयों की किताबें नहीं मिलीं

अधिकांश विद्यालयों में हिंदी, अंग्रेजी, गणित, विज्ञान, सामाजिक विज्ञान और संस्कृत—इन छह मुख्य विषयों की किताबें उपलब्ध नहीं हो पाईं।
कई जिलों में तो केवल 50% किताबें ही पहुँची हैं।
प्राथमिक स्कूलों में भी किताबों की कमी बरकरार है।

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