UTTARAKHAND NEWS नैनीताल
Uttarakhand smart meter: स्मार्ट मीटर बने जी का जंजाल, डेढ़ महीने का बिल आया 19 हजार
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Uttarakhand smart meter became a problem, bill of 1.5 months came to 19 thousand in kaladhungi nainital news today: कालाढूंगी में स्मार्ट मीटर बने सिरदर्द: प्रीपेड सिस्टम के बाद बढ़े बिजली बिल, ग्रामीणों ने किया एसडीओ का घेराव
Uttarakhand smart meter became a problem, bill of 1.5 months came to 19 thousand in kaladhungi nainital news today: उत्तराखण्ड में लगे बिजली के स्मार्ट मीटर आए दिन चर्चाओं का हिस्सा बने रहते हैं। स्मार्ट मीटरों के कारण बेतहाशा बिजली बिल की ऐसी ही एक खबर आज राज्य के नैनीताल जिले से सामने आ रही है । दरअसल जिले के कालाढूंगी क्षेत्र में लगाए गए स्मार्ट मीटर अब उपभोक्ताओं के लिए राहत के बजाय नई मुसीबत बनते जा रहे हैं। अधिकारियों द्वारा इन्हें पारदर्शिता और सटीक बिलिंग का माध्यम बताया गया था, लेकिन जमीनी हालात कुछ और ही कहानी बयां कर रहे हैं। स्मार्ट मीटर को प्रीपेड प्रणाली में बदले जाने के बाद कई परिवारों के बिजली बिल अचानक बढ़ गए हैं, जिससे ग्रामीणों में आक्रोश फैल गया है।
बीते बुधवार को विजयपुर, गुलजापुर और पूरनपुर गांव के दर्जनों उपभोक्ता बिजलीघर पहुंचे और एसडीओ का घेराव कर समस्या के समाधान की मांग की। ग्रामीणों का आरोप है कि मीटर की रीडिंग में गंभीर गड़बड़ियां सामने आ रही हैं, जिसके चलते सामान्य खपत के बावजूद बिल कई गुना बढ़कर आ रहे हैं। इस दौरान हेमा मेहता ने बताया कि उनके पति दिव्यांग हैं और दो कमरों के छोटे से मकान में रहने के बावजूद 44 दिनों का बिल 18,937 रुपये आया है। मजदूरी कर परिवार चलाने वाली प्रेमा तिवारी के घर एक महीने का बिल 8,000 रुपये पहुंच गया। दीपक ने 45 दिन में 16 हजार रुपये का बिल आने की बात कही, जबकि बलबीर लाल डंगवाल के अनुसार दो महीने में 13 हजार रुपये का बिल थमा दिया गया।
ग्रामीणों का कहना है कि पहले सामान्य मीटर से गर्मियों में जितना बिल आता था, उतनी ही या उससे अधिक राशि अब कम खपत में भी दिखाई जा रही है। प्रीपेड सिस्टम में बैलेंस माइनस होते ही कनेक्शन कटने का भय अलग सताता है। इससे उपभोक्ताओं की परेशानी और बढ़ गई है। गुस्साए ग्रामीणों ने यहां तक कह दिया कि यदि यही हाल रहा तो “कनेक्शन काट दीजिए, इससे तो लालटेन और लैंप के दिन ही बेहतर थे।”
वहीं इस मामले पर ऊर्जा निगम के एसडीओ दीपक पाठक ने कहा कि पुराने मीटर की रीडिंग से अंतर आ सकता है। उन्होंने आश्वासन दिया कि मीटर की एमआरआई जांच कर डेटा निकाला जाएगा और तकनीकी खामियों की जांच के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी। इस विरोध प्रदर्शन के दौरान सामाजिक कार्यकर्ता अरविन्द कुमार, अरविन्द मनराल, मोहित कुमटिया, निखिल सामंत समेत कई ग्रामीण मौजूद रहे। फिलहाल सवाल यही है कि डिजिटल सुविधा के नाम पर शुरू की गई यह व्यवस्था क्या वाकई उपभोक्ताओं को राहत दे पाएगी या फिर तकनीकी उलझनों में आम आदमी ही पिसता रहेगा।
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