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Uttarakhand Vikram Sharma Dehradun murder case Jharkhand gangster akhilesh singh guru, train martial arts
फोटो सोशल मीडिया Vikram Sharma Dehradun

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Vikram Sharma dehradun: झारखंड गैंगस्टर का था मास्टरमाइंड विक्रम शर्मा मार्शल आर्ट की देता था ट्रेनिंग

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Uttarakhand Vikram Sharma Dehradun murder case Jharkhand gangster akhilesh singh guru, train martial arts: देहरादून का स्टोन क्रशर संचालक निकला कुख्यात आपराधिक दिमाग, झारखंड के गैंगस्टर का रहा ‘गुरु’; पहचान बदलकर काटी एक दशक की जिंदगी

Uttarakhand Vikram Sharma Dehradun murder case Jharkhand gangster akhilesh singh guru, train martial arts: देहरादून के सिल्वर सिटी माल में शुक्रवार सुबह हुए घटनाक्रम के बाद मृतक स्टोन क्रशर संचालक विक्रम शर्मा का अतीत चौंकाने वाले खुलासों के साथ सामने आया है। दरअसल विक्रम के शांत स्वभाव और व्यवस्थित कारोबारी छवि के पीछे एक ऐसा आपराधिक इतिहास छिपा था, जिसने कभी झारखंड के औद्योगिक शहर जमशेदपुर को दहला दिया था। जांच में सामने आया है कि विक्रम का संबंध झारखंड के कुख्यात गैंगस्टर अखिलेश सिंह से रहा और उसे अपराध की दुनिया में आगे बढ़ाने में उसकी अहम भूमिका थी। गौरतलब हो कि विक्रम शर्मा की शुक्रवार सुबह देहरादून में हुए गोलीकांड में जान चली गई थी।

पहचान बदली, शहर बदला, लेकिन अतीत नहीं

करीब दस वर्ष पहले विक्रम शर्मा ने अपनी पहचान बदलकर देहरादून में ठिकाना बना लिया था। वह यहां कारोबारी के रूप में स्थापित हो गया और स्थानीय स्तर पर प्रभावशाली लोगों से संपर्क बढ़ाता रहा। हालांकि, उससे पहले जमशेदपुर पुलिस उसे देहरादून के एक किराये के फ्लैट से गिरफ्तार कर चुकी थी। उस समय तक उसका नाम कई चर्चित आपराधिक मामलों में सामने आ चुका था।

जमशेदपुर में खौफ का दौर

2 नवंबर 2007 को साकची आमबागान के पास श्रीलेदर्स के मालिक आशीष डे की हत्या ने शहर को हिला दिया था। इस मामले में अखिलेश सिंह के साथ विक्रम शर्मा का नाम भी जांच में उभरा। इसके बाद घटनाओं की श्रृंखला शुरू हुई—व्यापारियों, ठेकेदारों और प्रभावशाली व्यक्तियों को निशाना बनाया गया।

टाटा स्टील के सुरक्षा अधिकारी जयराम सिंह की बिष्टुपुर में हत्या, ट्रांसपोर्टर अशोक शर्मा की गोली मारकर हत्या, पूर्व जज आरपी रवि पर फायरिंग, कांग्रेसी नेता नट्‌टू झा के कार्यालय पर गोलीबारी और कई अन्य हमलों ने गिरोह की सक्रियता को उजागर किया। 2008 के दौरान साकची, बिष्टुपुर और बर्मामाइंस इलाके लगातार गोलियों की आवाज से दहले।

गिरोह की रणनीति और ‘मैनेजमेंट’

पुलिस सूत्रों के अनुसार विक्रम सीधे सामने आने के बजाय रणनीतिक भूमिका निभाता था। अखिलेश सिंह को उसने गिरोह का चेहरा बनाया, जबकि खुद पर्दे के पीछे रहकर संचालन करता रहा। उसे ‘मैनेजमेंट गुरु’ कहा जाता था क्योंकि वह पुलिस, नेताओं और मीडिया से समीकरण साधने में दक्ष माना जाता था। 2004 से 2009 के बीच जमशेदपुर में कई थाना प्रभारियों से लेकर डीएसपी स्तर तक के अधिकारियों से उसके संबंधों की चर्चा रही।

होटल कारोबारी अशोक शर्मा की हत्या के मामले में भी उसका नाम सामने आया। आरोप था कि संपत्ति विवाद में पत्नी पिंकी शर्मा ने साजिश रची और इस षड्यंत्र में विक्रम, अखिलेश सिंह तथा अन्य सहयोगी शामिल थे। बाद में पिंकी की शादी विक्रम के छोटे भाई से कराए जाने की बात भी जांच में उजागर हुई।

मार्शल आर्ट्स का प्रशिक्षक, अपराध का संरक्षक

विक्रम ब्लैक बेल्ट धारक था और बच्चों को मार्शल आर्ट्स की ट्रेनिंग देता था। बताया जाता है कि अखिलेश सिंह भी उसके पास प्रशिक्षण लेने आता था। प्रशिक्षण के दौरान वह विदेशी एक्शन फिल्मों के माध्यम से तकनीक समझाता था। बाहरी तौर पर अनुशासन और आत्मरक्षा की शिक्षा देने वाला यह शख्स भीतर से आपराधिक नेटवर्क को दिशा दे रहा था।

देहरादून में नई पहचान

जमशेदपुर में दबाव बढ़ने के बाद उसने उत्तराखंड को सुरक्षित ठिकाना बनाया। पहले काशीपुर और फिर देहरादून में कारोबार खड़ा किया, सामाजिक दायरा बढ़ाया और खुद को एक सामान्य व्यवसायी के रूप में स्थापित कर लिया। स्थानीय स्तर पर उसके प्रभाव और संपर्कों ने उसकी असल पहचान पर परदा डाले रखा।

फिर खुला अतीत का पन्ना

शुक्रवार को हुई घटना के बाद जब उसका नाम सुर्खियों में आया तो झारखंड कनेक्शन की परतें खुलती चली गईं। आपराधिक मामलों की फाइलें दोबारा खंगाली जा रही हैं और विभिन्न राज्यों की एजेंसियों के बीच समन्वय की प्रक्रिया तेज हुई है।
यह मामला सिर्फ एक व्यक्ति के दोहरे जीवन की कहानी नहीं, बल्कि उस सच्चाई का आईना भी है जिसमें अपराधी पहचान बदलकर नए शहरों में सहजता से घुलमिल जाते हैं। वैसे शुक्रवार को हुए गोलीकांड में उसकी जान चली गई परंतु अभी भी कुछ अनसुलझे सवाल ऐसे भी हैं जिनका जवाब पुलिस प्रशासन को देना ही चाहिए। सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या उत्तराखण्ड अपराधिक प्रवृत्ति के लोगों का नया ठिकाना बन रहा है?
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