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उत्तराखण्ड चमोली

उत्तराखण्ड की महिलाओं का स्वरोजगार की ओर नया कदम, अब बनाया लिंगुड़े का अचार

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Lingda pickle: पहाड़ की महिलाओं ने लिंगुडे़ का अचार बनाकर पेश की मिशाल, युवाओं को सुझाया स्वरोजगार का नया विकल्प..

वास्तव में पहाड़ में स्वरोजगार के अवसरों की कोई कमी नहीं है बस जरूरत है तो केवल पहाड़ में पाए जाने वाले पोष्टिक, गुणकारी एवं तमाम रोगों के उपचार में सक्षम फलों, सब्जियों, दालों एवं जड़ी-बूटियों से न‌ए-न‌ए उत्पाद निर्मित करने की। पहाड़ी उत्पादों की खासी मांग के कारण इसमें कोई संदेह नहीं कि इन नवनिर्मित उत्पादों को न केवल लोगों द्वारा खासा पसंद किया जाएगा बल्कि इससे आप अच्छा खासा मुनाफा भी कमा सकते हैं। लेकिन इसके लिए आपको अपनी रचनात्मकता और क्रियात्मकता को बढ़ाकर न‌ए-न‌ए आइडिया को अपनाना होगा। रचनात्मक विचारों का एक उदाहरण आज चमोली जिले की कुछ महिलाओं ने हमारे सामने पेश किया है, जिन्होंने पहाड़ों में बहुतायत मात्रा में पाए जाने वाले लिंगुडे़ का अचार (Lingda pickle) बनाकर उसे बाजार में उतारा है।
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पूरे क्षेत्र में हो रही महिलाओं के प्रयास की सराहना, लोगों को खूब पसंद आ रहा लिंगुडे़ का अचार:-

बता दें कि लिंगुड़ा अपने आयुर्वेदिक गुणों के लिए न केवल समूचे उत्तराखण्ड में पंसद किया जाता है बल्कि एक इम्यूनिटी बूस्टर होने के नाते अब दूसरे प्रदेशों के लोग भी इसे पसंद कर रहे हैं। एक जैविक उत्पाद होने के साथ-साथ इसमें प्रचुर मात्रा में आइरन भी पाया जाता है। जिससे दिन प्रतिदिन इसकी मांग बढ़ती जा रही है। इसी का फायदा उठाते हुए चमोली जिले के अलकनंदा स्वायत्त सहकारिता समूह की महिलाओं ने लिंगुडे़ का अचार (Linguda pickle) बनाया है। अलकनंदा समूह की महिलाओं ने इस अचार का निर्माण एच‌एआरसी संस्था के तत्वाधान में किया है। महिलाओं का कहना है कि उन्हें लिंगुडे़ का अचार बनाने का आइडिया डॉ महेंद्र कुंवर से मिला और उन्हीं की प्ररेणा से महिलाओं ने इस अचार को बनाना भी शुरू किया। क्षेत्र के लोगों द्वारा न केवल महिलाओं के इस नवनिर्मित अचार को पसंद किया जा रहा है बल्कि उन्होंने महिलाओं की इस रचनात्मकता की जमकर सराहना भी की है।

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