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Uttarakhand news: उत्तराखंड चुनाव से पहले भाजपा सख्त, विधायकों को मिला अल्टीमेटम
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Uttrakhand BJP election strategy: |Uttarakhand BJP Election Strategy for 2027| उत्तराखंड चुनाव से पहले भाजपा हाईकमान सख्त, विधायकों को मिला प्रदर्शन सुधारने का आखिरी मौका
|Uttarakhand BJP Election Strategy for 2027| उत्तराखंड में आगामी विधानसभा चुनावों को देखते हुए भारतीय जनता पार्टी ने अपनी राजनीतिक तैयारियां तेज कर दी हैं। चुनाव से पहले भाजपा हाईकमान ने अपने विधायकों को प्रदर्शन सुधारने का एक और अवसर देते हुए साफ संदेश दिया है कि अब जनता के बीच सक्रिय रहकर विकास कार्यों को जमीन पर उतारना होगा। पार्टी की ओर से सभी विधायकों को 31 अक्टूबर तक लगातार अपने विधानसभा क्षेत्रों में सक्रिय रहने, लंबित विकास कार्यों को तेजी से पूरा कराने और जनता से जुड़े मुद्दों पर विशेष ध्यान देने के निर्देश दिए गए हैं। माना जा रहा है कि आने वाले महीनों में विधायकों के प्रदर्शन पर पार्टी की पैनी नजर रहने वाली है।
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विकास कार्यों में तेजी लाने के निर्देश (Uttarakhand Election Strategy)
पार्टी सूत्रों के अनुसार भाजपा नेतृत्व ने विधायकों से कहा है कि वे अपने विधानसभा क्षेत्रों में चल रहे विकास कार्यों की नियमित समीक्षा करें और मुख्यमंत्री समेत संबंधित मंत्रियों के साथ लगातार संपर्क बनाए रखें, ताकि सरकारी योजनाओं और घोषणाओं को तेजी से अमल में लाया जा सके। पार्टी चाहती है कि चुनाव से पहले जनता तक विकास कार्यों का सीधा असर दिखाई दे और सरकार की योजनाओं का लाभ लोगों तक समय पर पहुंचे।
नवंबर-दिसंबर में होगा बड़ा मूल्यांकन (Political Performance Survey)
बताया जा रहा है कि भाजपा हाईकमान अगले छह महीनों में विधायकों के प्रदर्शन का आकलन दो नए सर्वे के जरिए करेगा। नवंबर और दिसंबर के दौरान होने वाले इन सर्वे की रिपोर्ट को टिकट वितरण में अहम आधार माना जाएगा। हालांकि पार्टी के एक वरिष्ठ नेता का कहना है कि फिलहाल भाजपा किसी मौजूदा विधायक का टिकट काटने के पक्ष में नहीं दिख रही है, लेकिन अंतिम फैसला जीत की संभावना और क्षेत्रीय प्रदर्शन के आधार पर ही लिया जाएगा।
तीन सर्वे में सामने आई एंटी इंकम्बेंसी (Uttarakhand Political News)
सूत्रों की मानें तो उत्तराखंड विधानसभा चुनाव को लेकर अब तक पार्टी की ओर से तीन अलग-अलग सर्वे कराए जा चुके हैं। इन सर्वे में भाजपा की स्थिति कई क्षेत्रों में मजबूत मानी गई है, लेकिन कुछ सीटों पर विधायकों के खिलाफ एंटी इंकम्बेंसी यानी जनता की नाराजगी के संकेत भी मिले हैं। बताया जा रहा है कि ऐसे विधायकों की संख्या 12 से अधिक हो सकती है, जिनके प्रदर्शन को लेकर पार्टी स्तर पर चिंता बनी हुई है।
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कमजोर सीटों और कांग्रेस के गढ़ पर विशेष नजर (Election Campaign Management)
भाजपा संगठन को वर्ष 2022 विधानसभा चुनाव में कम अंतर से जीती सीटों पर विशेष रणनीति बनाने को कहा गया है। श्रीनगर, टिहरी, गदरपुर और नरेंद्रनगर जैसी सीटों पर पार्टी बेहद कम अंतर से जीत दर्ज कर पाई थी, जहां जीत का मार्जिन करीब 587 से 1798 वोटों के बीच रहा। वहीं चकराता, भगवानपुर, पिरान कलियर और धारचूला जैसी सीटें ऐसी हैं, जहां भाजपा अब तक जीत हासिल नहीं कर सकी है। ऐसे में पार्टी संगठन को न सिर्फ कमजोर सीटों बल्कि कांग्रेस के मजबूत गढ़ माने जाने वाले क्षेत्रों में भी जमीनी स्तर पर रणनीतिक तरीके से काम करने के निर्देश दिए गए हैं। उत्तराखंड विधानसभा चुनाव से पहले भाजपा अब संगठन और विधायकों के प्रदर्शन को लेकर किसी तरह की ढिलाई के मूड में नजर नहीं आ रही है।
