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Banbhulpura haldwani latest update: decision on railway encroachment by Supreme Court
सांकेतिक फोटो Banbhulpura haldwani latest update:

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Banbhulpura haldwani latest update: बनभूलपुरा रेलवे मामले पर सुप्रीम फैसला, हटेगा अतिक्रमण

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Banbhulpura haldwani latest update: decision on railway encroachment by Supreme Court: सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला: बनभूलपुरा रेलवे भूमि खाली होगी, पुनर्वास प्रक्रिया के लिए कैंप लगाए जाएंगे

Banbhulpura haldwani latest update: decision on railway encroachment by Supreme Court: उत्तराखण्ड के लिए इस वक्त की सबसे बड़ी खबर देश की सर्वोच्च अदालत से सामने आ रही है। जी हां… राज्य के नैनीताल जिले के हल्द्वानी तहसील क्षेत्र के बहुचर्चित बनभूलपुरा रेलवे भूमि अतिक्रमण मामले में सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को अहम आदेश जारी करते हुए साफ कर दिया कि रेलवे की जमीन का उपयोग किस तरह होगा, यह तय करने का अधिकार रेलवे के पास ही रहेगा और इस भूमि पर अवैध रूप से कब्जा किए गए अतिक्रमण को हटाया जाएगा। इस फैसले का असर विवादित भूमि पर रह रहे 50 हजार लोगों पर पड़ेगा। कोर्ट के फैसले के बाद अब वर्षों से चल रहे विवाद में नई दिशा मिलती दिखाई दे रही है, हालांकि अंतिम समाधान की प्रक्रिया अभी जारी रहेगी।

अदालत ने क्या कहा

सुप्रीम कोर्ट की पीठ ने सुनवाई के दौरान स्पष्ट किया कि अपील करने वाले लोगों को यह अधिकार नहीं है कि वे उसी स्थान पर रहने की व्यवस्था की मांग करें, क्योंकि संबंधित भूमि रेलवे की संपत्ति है। अदालत ने कहा कि विकास परियोजनाओं के लिए जमीन का उपयोग कैसे किया जाए, इसका निर्णय संबंधित विभाग ही करेगा। इसके साथ ही कोर्ट ने यह भी निर्देश दिया कि जिन परिवारों पर विस्थापन का असर पड़ेगा, उनकी पहचान की जाए और पुनर्वास प्रक्रिया को व्यवस्थित ढंग से आगे बढ़ाया जाए।

फिलहाल अतिक्रमण हटाने पर रोक

हालांकि अदालत ने अंतरिम राहत देते हुए कहा कि अगली सुनवाई तक रेलवे भूमि से अतिक्रमण हटाने की कोई कार्रवाई नहीं की जाएगी। साथ ही यह भी स्पष्ट किया गया कि इस मामले में दी गई सुरक्षा को राज्य के अन्य अवैध कब्जों से नहीं जोड़ा जाएगा।

पुनर्वास के लिए योजना और आर्थिक सहायता

सुनवाई के दौरान रेलवे और राज्य सरकार ने अदालत को बताया कि सामूहिक रूप से विस्थापित होने वाले परिवारों को छह महीने तक प्रति माह दो हजार रुपये की आर्थिक सहायता दी जाएगी। कोर्ट ने निर्देश दिया कि रमजान के बाद 19 मार्च से क्षेत्र में विशेष कैंप लगाए जाएं, जहां प्रभावित लोग प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत आवेदन कर सकेंगे। इन आवेदनों की पात्रता पर अंतिम निर्णय जिला मजिस्ट्रेट स्तर पर लिया जाएगा।

विवाद की पृष्ठभूमि

बनभूलपुरा क्षेत्र में करीब 30 हेक्टेयर भूमि पर रेलवे द्वारा विकास और विस्तार की योजना प्रस्तावित है। रेलवे का कहना है कि हल्द्वानी उत्तराखंड का प्रवेश द्वार है और यहां स्टेशन विस्तार, ट्रैक सुरक्षा और अन्य परियोजनाएं लंबे समय से अतिक्रमण के कारण अटकी हुई हैं। दूसरी ओर स्थानीय निवासियों का दावा है कि कई परिवारों के पास भूमि से जुड़े दस्तावेज या पट्टे हैं, इसलिए उन्हें बिना वैकल्पिक व्यवस्था हटाना उचित नहीं होगा। राज्य सरकार ने अदालत में कहा कि जिन लोगों के पास वैध दस्तावेज होंगे, उनकी जमीन का मुआवजा देकर अधिग्रहण की प्रक्रिया अपनाई जाएगी।

प्रभावित परिवारों की संख्या पर मतभेद

सरकारी पक्ष के अनुसार क्षेत्र में लगभग पांच हजार से अधिक परिवार रहते हैं, जबकि याचिकाकर्ताओं का दावा है कि प्रभावित आबादी इससे कहीं ज्यादा है। इसी कारण मामला सामाजिक और प्रशासनिक दोनों स्तर पर संवेदनशील बना हुआ है।

आगे की राह

सुप्रीम कोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई अप्रैल में तय की है। फिलहाल प्रशासन और रेलवे को प्रभावित परिवारों की पहचान, पुनर्वास प्रक्रिया और आवेदन कैंप की तैयारियों पर काम करने के निर्देश दिए गए हैं।
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