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Meerut Retired Judge Dr. Gyanendra Sharma Pranita’s Divorce Celebration Domestic Violence Law India

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तलाक के बाद बेटी को सम्मान के साथ पिता लाए घर Domestic Violence Law India

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मेरठ में अनोखी मिसाल: तलाक के बाद बेटी की घर वापसी बनी सम्मान का उत्सव पिता ढोल नगाड़ों के साथ लाए घर (Meerut Shastri Nagar’s Dr. Gyanendra Sharma Welcomes Daughter Pranita Vashisth with Celebration After Divorce Victory Domestic Violence Law India )

Domestic Violence Law India Meerut Story: Retired Judge Dr. Gyanendra Sharma Turns Daughter Pranita’s Divorce Into Celebration of Dignity: मेरठ के शास्त्रीनगर निवासी और उत्तराखंड कैडर के सेवानिवृत्त जिला जज डॉ. ज्ञानेंद्र कुमार शर्मा ने समाज के सामने एक ऐसी मिसाल पेश की है, जिसने पारंपरिक सोच को झकझोर कर रख दिया है। आमतौर पर जहां तलाक को दुख और सामाजिक दबाव से जोड़ा जाता है, वहीं उन्होंने अपनी बेटी प्रणिता वशिष्ठ की घर वापसी को एक सम्मानजनक उत्सव में बदल दिया।

कोर्ट से घर तक जश्न का माहौल (Pranita Vashisth Sharma Celebration After Divorce Victory)

4 अप्रैल 2026 को फैमिली कोर्ट द्वारा प्रणिता के तलाक पर मुहर लगने के बाद, डॉ. शर्मा ने शोक मनाने के बजाय खुशी जताई। उन्होंने ढोल-नगाड़ों, नाच-गाने और फूल-मालाओं के साथ अपनी बेटी का स्वागत किया। परिवार के सदस्यों ने “I Love My Daughter” लिखी टी-शर्ट पहनकर इस मौके को और खास बना दिया।

डॉ. शर्मा का कहना था कि उन्होंने कोई धन-दौलत या एलिमनी नहीं मांगी, बल्कि सिर्फ अपनी बेटी को सम्मान के साथ वापस घर लाए हैं। उनके शब्दों में, “बेटी कोई सामान नहीं है जिसे कहीं भी छोड़ दिया जाए, उसका सम्मान सबसे पहले है।”

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प्रताड़ना के खिलाफ उठाया साहसिक कदम (Domestic Violence Awareness)

प्रणिता की शादी साल 2018 में एक आर्मी मेजर से हुई थी, लेकिन शादी के बाद उन्हें मानसिक और शारीरिक प्रताड़ना का सामना करना पड़ा। ऐसे में उन्होंने अपने आत्मसम्मान को प्राथमिकता देते हुए कानूनी रास्ता अपनाया और आखिरकार न्याय पाया।

उनकी इस यात्रा ने यह संदेश दिया कि गलत रिश्तों में बने रहना मजबूरी नहीं, बल्कि उससे बाहर निकलना ही असली साहस है।

आत्मनिर्भर और मजबूत पहचान (Independent Women Success Story)

प्रणिता वशिष्ठ न केवल शिक्षित हैं, बल्कि पेशेवर रूप से भी मजबूत हैं। वह मनोविज्ञान में पोस्ट ग्रेजुएट हैं और वर्तमान में तेजगढ़ी चौराहे स्थित प्रणव वशिष्ठ ज्यूडिशियल अकादमी में फाइनेंस डायरेक्टर के रूप में कार्यरत हैं।

वह अपने माता-पिता की इकलौती संतान हैं। साल 2022 में उनके भाई, जो सुप्रीम कोर्ट में अधिवक्ता थे, एक दुर्घटना में गंभीर चोट लगने के कारण चल बसे। उनकी याद में ही इस अकादमी की स्थापना की गई, जो आज जरूरतमंदों के लिए शिक्षा और न्याय से जुड़ा एक महत्वपूर्ण केंद्र बन चुकी है।

समाज को मिला मजबूत संदेश (Domestic Violence Law India)

डॉ. ज्ञानेंद्र कुमार शर्मा के इस कदम की विभिन्न सामाजिक संगठनों द्वारा सराहना की जा रही है। यह घटना पूरे शहर में चर्चा का विषय बन गई है। उनकी यह पहल उन अभिभावकों के लिए एक प्रेरणा है, जो समाज के डर और लोक-लाज के कारण अपनी बेटियों को गलत रिश्तों में रहने के लिए मजबूर कर देते हैं। यह कहानी साफ तौर पर दिखाती है कि नारी सशक्तिकरण केवल शब्दों तक सीमित नहीं है, बल्कि ऐसे साहसी और ठोस फैसलों से ही समाज में असली बदलाव आता है।

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