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Ghughutiya Festival wishes 2026 Happy Ghughutiya Festival wishes image photo quotes Ghughutiya Festival 2026 Date Wishes|
सांकेतिक फोटो Ghughutiya Festival wishes 2026

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उत्तराखण्ड विशेष तथ्य लोकपर्व

Ghughutiya Festival wishes 2026 |घुघुतिया त्यौहार की हार्दिक शुभकामनाएं फोटो इंस्टाग्राम संदेश|

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Ghughutiya Festival wishes 2026 Happy Ghughutiya Festival wishes image photo quotes Ghughutiya Festival 2026 Date Wishes| घुघुतिया पर्व 2026 : तिथि, परंपरा, लोकभाव और शुभकामनाएं

Ghughutiya Festival wishes 2026 Happy Ghughutiya Festival wishes image photo quotes kumaon uttarakhand उत्तराखंड की लोकसंस्कृति अपने आप में बेहद अनूठी है। यहां सूर्य के राशि परिवर्तन यानी संक्रांति के दिन कोई ना कोई लोकपर्व मनाया ही जाता है। बात अगर सूर्य के मकर राशि में परिवर्तन यानी मकर संक्रांति की करें तो उत्तराखंड में यह दिन घुघुतिया, उत्तरायणी, मकरैण, माघीरौज आदि रूपों में मनाया जाता है। यह पर्व केवल घुघुते बनाने या कौए को खिलाने तक सीमित नहीं, बल्कि इसमें पहाड़ का जीवन दर्शन, प्रकृति से संवाद और लोकआस्था गहराई से जुड़ी हुई है।
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घुघुतिया पर्व 2026 की तिथियां Happy Ghughutiya Festival wishes 2026

साल 2026 में घुघुतिया पर्व अलग-अलग क्षेत्रों में परंपरा के अनुसार अलग दिनों में मनाया जाएगा। कुमाऊं का घुघुतिया त्योहार कुमाऊं में दो दिन मनाया जाता है। इन दिनों का विभाजन बागेश्वर जनपद में बहने वाली सरयू नदी से किया जाता है. सरयू नदी के पूर्वी भाग में उस पार इसका आयोजन एक दिन पहले होता है जबकि, सरयू नदी के इस पार इसका आयोजन एक दिन बाद होता है। दोनों ही त्योहारों का सार कौवों को भोजन कराना और उत्तर दिशा में सूर्य के आगमन का स्वागत किया जाता है।‌
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माषांत – पुषूडिया त्यार Happy Ghughutiya Festival wishes

13 जनवरी 2026
सरयू के इस पार (उत्तर) के लोग इसे एक दिन पहले, पौष माह के अंतिम दिन मनाते हैं, जिसे ‘पुस्योदिया’ या ‘पुस-प्यूं’ कहते हैं। माष मास के अंतिम दिन यानी माषांत आज 13 जनवरी को सरयू-गंगा पार के क्षेत्रों में घुघुतिया मनाया जाएगा। इस दिन घर-घर घुघुते बनाए जाते हैं। पहाड़ों में इस दिन देवी देवताओं के मंदिरों में जागरण की परंपरा भी निभाई जाती है, जो लोकआस्था और सामूहिक चेतना को मजबूत करती है।
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मकर संक्रांति – पहाड़ का घुघुतिया Ghughutita Festival wishes 2026

14 जनवरी 2026
मकर संक्रांति के दिन सरयू-गंगा पार के लोग कौए को घुघुते खिलाते हैं। इसी दिन षट्तिला एकादशी का व्रत भी रहेगा।सरयू पार (दक्षिण) के लोग मकर संक्रांति को ‘घुघुतिया’ या ‘उत्तरैणी’ मनाते हैं, जिसमें ‘घुघुते’ (गुड़-आटा के पकवान) कौवों को खिलाए जाते हैं। सरयू-गंगा इस पार के क्षेत्रों में 14 जनवरी को घुघुते बनाए जाएंगे और 15 जनवरी 2026 को कौए को अर्पित किए जाएंगे। यह भिन्नता पहाड़ की विविध लोकपरंपराओं को दर्शाती है, जहां हर क्षेत्र अपनी परंपरा को उसी श्रद्धा से निभाता है।

माघ मास की खिचड़ी का दान

घुघुतिया पर्व के साथ माघ मास के दान-पुण्य का भी विशेष महत्व है।
चूंकि 14 जनवरी 2026 को एकादशी है, इसलिए चावल की खिचड़ी का दान अगले दिन किया जाएगा। अत्यंत आवश्यक स्थिति में एकादशी के दिन साबूदाने की खिचड़ी का दान किया जा सकता है। यह परंपरा संयम और सात्विकता का प्रतीक मानी जाती है।

घुघुतिया : सिर्फ पर्व नहीं, एक प्रकृति के साथ संतुलन का भाव

घुघुतिया में ईजा द्वारा बच्चों के लिए बनाए गए मीठे घुघुते, कौए की पुकार और सुबह की ठंडी हवा — सब मिलकर एक ऐसा दृश्य रचते हैं, जो पहाड़ से दूर रह रहे लोगों को भी भावनात्मक रूप से जोड़ देता है। कौआ यहां केवल पक्षी नहीं, बल्कि संदेशवाहक माना जाता है। मान्यता है कि कौए के माध्यम से पितरों को अर्पण किया जाता है और प्रकृति के साथ संतुलन का भाव प्रकट होता है।

काले कौवा काले – लोकगीत

काले कौवा काले,
घुघुती माला खाले।
काले कौआ काले घुघुित माला खाले ले कौआ बड़, मकें दिजा सुनक घड़। काले कौआ काले घुघुित माला खाले॥ ले कौआ पूरी, मकें दिजा सुन छुरी। काले कौआ काले घुघुित माला खाले॥ ले कौआ डमरू मकें दिजा सुनक घुॅघरू। काले कौआ काले घुघुित माला खाले॥ ले कौआ पुआ मकें दिजा भल-भल धुला। काले कौआ काले घुघुित माला खाले॥ ले कौआ ढाल मकें दिजा सुनक थाल। काले कौआ काले घुघुित माला खाले॥
ईजा बनाय घुघुते,
भुला दे भाग्य उजाले।
काले कौवा बोल द्यौ,
सुख-समृद्धि खोल द्यौ।
घुघुतिया आयो आज,
घर-आंगन उज्यालो कर द्यौ।
यह भी पढ़ें- उत्तराखंड में कब है मकर संक्रांति, घुघुतिया, उत्तरैणी, मकरैंण |Ghughuti festival 2026|

घुघुतिया एवं उत्तरायणी की शुभकामनाएं

घुघुतों की खुशबू, ईजा का प्यार — सुफल हो तुम्हु यो घुघुतिया त्यार।
मकर संक्रांति और घुघुतिया पर्व की हार्दिक शुभकामनाएं। यह पर्व आपके जीवन में सुख, समृद्धि और खुशियां लाए।
घुघुतिया के मीठे घुघुते और काले कौवे की पुकार आपके जीवन में आनंद की बहार लाए।
पहाड़ की संस्कृति और परंपराओं का यह पावन पर्व आपके जीवन में सकारात्मकता और प्रेम भरे।

घुघुतों की मिठास और परंपराओं की खुशबू आपके जीवन को सुख, शांति और समृद्धि से भर दे।
घुघुतिया त्यौहार भाईचारे, प्रेम और एकता का संदेश दे — यही इसकी सबसे बड़ी पहचान है।
उत्तरायणी पर्व पर सूर्यदेव के उत्तरायण होने के साथ आपके जीवन में नई ऊर्जा और सफलता आए।
भगवान सूर्यदेव और बागनाथ जी आपके जीवन में सुख-शांति और समृद्धि प्रदान करें।
यह भी पढ़ें- उत्तराखण्ड: उतरैणी- घुघुतिया त्यार पर ताजा हो उठी बचपन की यादें, पहाड़ में नहीं दिखती अब वो रौनक

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