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उत्तराखंड में कब है मकर संक्रांति, घुघुतिया, उत्तरैणी, मकरैंण |Ghughuti festival 2026|
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Ghughuti festival 2026 uttarakhand: kab hain Makar Sankranti, Ghughutiya, makrain Uttarayan, date: धूमधाम से मनाया जाएगा 14 जनवरी को मकर संक्रांति का पर्व…
Ghughuti festival 2026 uttarakhand: kab hain Makar Sankranti, Ghughutiya, makrain Uttarayan, date: उत्तराखंड के गढ़वाल और कुमाऊं मंडल के लिए हर पर्व बेहद खास होता है। क्योंकि यह किसी न किसी धार्मिक अनुष्ठान और लोगों के जीवन तथा लोकसंस्कृति से जुड़ा होता है। यहां मनाए जाने वाले पर्व बेहद खास होते हैं क्योंकि यह न केवल ऋतु परिवर्तन के संकेतक है बल्कि कई समय से पीढ़ी दर पीढ़ी चलते आ रहे हैं। ऐसा ही कुछ विशेष पर्व है उत्तराखंड में मनाए जाने वाला मकर संक्रांति जो प्रदेश में अलग-अलग नामों से जाना जाता है। इस बार मकर संक्रांति का पर्व 14 जनवरी 2026 को मनाया जाएगा।
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बता दें पौष मास के समाप्त होने और माघ की संक्रांति के भगवान सूर्य धनु राशि से मकर राशि में प्रवेश करते हैं। सूर्य के इस राशि में परिवर्तन को ही संक्रांति कहा जाता है इसलिए इसे मकर संक्रांति के नाम से जाना जाता है। इसी दिन सूर्य दक्षिणायन से उत्तरायण की ओर अग्रसर होता है यानी सूर्य उत्तर दिशा की ओर गमन करते हैं। जिसके कारण उत्तराखंड में इस पर्व को उत्तरैणी भी कहा जाता है। इस परिवर्तन के साथ दिन बड़े और राते छोटी होने लगती है जिसे शुभ और सकारात्मक ऊर्जा का प्रतीक माना जाता है।
कुमाऊं मंडल में मकर संक्रांति ( घुघुतिया पर्व Ghughuti festival 2026 uttarakhand
कुमाऊं मंडल की अगर बात करें तो मकर संक्रांति को यहां पर घुघुतिया या पुस्यौडिया के नाम से जाना जाता है। अल्मोड़ा जिले और सरयू नदी के पर्वतीय भाग में इस पर्व का आयोजन पौष मास की अंतिम तिथि को किया जाता है। इसी कारण इसे पौष मासिक त्यौहार कहा जाता है। इसके अलावा सरयू नदी के दूसरे छोर अधिकांश कुमाऊं क्षेत्र में इसे प्रथम माघ यानी मकर संक्रांति के दिन मनाया जाता है। घुघुतिया पर्व के दिन घरों में आटे गुड और घी से बने घुघते तैयार किए जाते हैं। बच्चों के गले में घुघतो की माला पहनाई जाती है और वह गाने गाते हुए कौओ को घुघते खिलाते हैं।
काले कवा, काले
घुघुती माला खाले…
गढ़वाल मे मकर संक्रांति उत्तरायणी और खिचड़ी संक्रांति Makar Sankranti, Ghughutiya, makrain Uttarayan, 2026 date:
बताते चले गढ़वाल क्षेत्र में मकर संक्रांति को उत्तरायणी मकरैंण या खिचड़ी संक्रांति के रूप में मनाया जाता है। इस दिन स्नान दान, सूर्य पूजा और खिचड़ी बनाने की परंपरा है। खिचड़ी को सामूहिक रूप से बांटना सामाजिक समरसता का प्रतीक माना जाता है। बताते चलें चमोली जिले के जोशीमठ क्षेत्र में 50 से अधिक गांव में मकर संक्रांति से दो-तीन दिन पहले तैयारी शुरू हो जाती है। जहां पर सात प्रकार के अनाज दाल चावल झंगोरा आदि की सामूहिक कुटाई पिसाई की जाती है जो स्वयं में एक लोक उत्सव जैसा दृश्य प्रस्तुत करता है। मकर संक्रांति के दिन गुड़ के घोल से चुन्या नाम का विशेष पकवान भी बनाया जाता है। सात अनाजों के घोल से घर की दीवारो पर भगवान सूर्य देव और उनके दल बल का प्रतीकात्मक चित्र अंकित किया जाता है जो कुमाऊं के ऐपण कला से मिलता जुलता है। इस दिन खिचड़ी गुलगुले अरसे भी जाते हैं।
जौनसार-बावर और जौनपुर क्षेत्र :मरोज पर्व
उत्तराखंड के जौनसार-बावर और जौनपुर क्षेत्र में मकर संक्रांति को मरोज पर्व के रूप में मनाया जाता है। यह पर्व पौष मास की 28वीं तिथि से शुरू होकर माघ मास के अंत तक चलता है। मरोज पर्व की विशेषता यह है कि माघ माह को सामान्यतः व्रत-सात्विक आहार का महीना माना जाता है, वहीं इस क्षेत्र में पूरे माघ महीने मांस और मदिरा का सेवन, नाच-गाना और मेहमाननवाजी की परंपरा निभाई जाती है।
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