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Haridwar news today हरिद्वार स्कूली बच्चों से मिड डे मील के लिए ढुलवाई लकड़ियां प्रधानाध्यापिका निलंबित
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Haridwar news today: Headmistress suspended for making school children carry wood for mid-day meal: हरिद्वार में स्कूल का वीडियो वायरल: बच्चों से लकड़ी ढुलवाने पर एक्शन, प्रधानाध्यापिका निलंबित
Haridwar news today: Headmistress suspended for making school children carry wood for mid-day meal: उत्तराखण्ड के सरकारी स्कूलों से आए दिन अजब-गजब खबरें सामने आती रहती है आज फिर हरिद्वार के एक सरकारी स्कूल से सामने आए एक वीडियो ने शिक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। बहादराबाद ब्लॉक के अजीतपुर स्थित राजकीय प्राथमिक विद्यालय में छोटे-छोटे बच्चों से लकड़ी ढुलवाए जाने का मामला सामने आने के बाद विभाग में हड़कंप मच गया है।
वीडियो ने खोली हकीकत
सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हुए वीडियो में स्कूल ड्रेस पहने बच्चे लकड़ियां उठाकर ले जाते नजर आए। बताया गया कि ये लकड़ियां मिड डे मील पकाने के लिए इस्तेमाल हो रही थीं। वीडियो सामने आते ही स्थानीय लोगों और अभिभावकों में नाराजगी फैल गई। सवाल उठने लगे कि जिन बच्चों को पढ़ने के लिए स्कूल भेजा जाता है, उनसे इस तरह का काम क्यों कराया जा रहा है।
जांच में आरोप सही पाए गए
मामले को गंभीरता से लेते हुए शिक्षा विभाग ने तुरंत जांच शुरू कराई। उसी दिन हुई जांच में आरोप सही पाए गए, जिसके बाद कार्रवाई में देर नहीं की गई। जिला शिक्षा अधिकारी (प्रारंभिक) की ओर से विद्यालय की प्रधानाध्यापिका सरस्वती चौहान को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया।
कानूनों का उल्लंघन
जांच रिपोर्ट में साफ किया गया कि बच्चों से इस प्रकार का कार्य कराना बाल श्रम कानून के खिलाफ है। साथ ही यह शिक्षा का अधिकार कानून की भावना के भी विपरीत है, जिसमें बच्चों को सुरक्षित और सम्मानजनक माहौल देने की बात कही गई है। अधिकारियों ने इसे बच्चों के शारीरिक और मानसिक उत्पीड़न की श्रेणी में भी माना है।
पहले भी सामने आ चुके हैं ऐसे मामले
यह पहली घटना नहीं है। इससे पहले भी हरिद्वार में एक स्कूल में बच्चों से सफाई करवाने का मामला सामने आ चुका है। लगातार सामने आ रही ऐसी घटनाएं विभागीय निगरानी पर सवाल खड़े कर रही हैं।
सख्ती के संकेत
शिक्षा विभाग ने स्पष्ट किया है कि स्कूलों में बच्चों से किसी भी प्रकार का श्रम कराना पूरी तरह अस्वीकार्य है। अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि निरीक्षण व्यवस्था को और मजबूत किया जाए, ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।
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