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jonk uttarakhand monsoon 2026: उत्तराखण्ड पहाड़ में मानसून से पहले ही लगने लगी जोंक
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Jonk Uttarakhand monsoon 2026 : Pithoragarh news today uttarakhand monsoon 2026 Leech Infestation in Uttarakhand उत्तराखण्ड में मौसम का बदला मिजाज, पहाड़ में मानसून से पहले ही जंगलों में सक्रिय हुईं जोंकें
Jonk Uttarakhand Monsoon 2026: Leeches have started appearing in Pithoragarh even before the monsoon medical health uttarakhand breaking news Leech Infestation in Uttarakhand Monsoon Health Risks उत्तराखंड के पर्वतीय जनपद पिथौरागढ़ में इस बार मौसम के बदलते तेवरों का असर अब जंगलों और ग्रामीण जीवन पर भी साफ दिखाई देने लगा है। आमतौर पर बरसात के मौसम में सक्रिय होने वाली जोंकें इस बार मई महीने में ही बड़ी संख्या में दिखाई देने लगी हैं। जिले के कई वन क्षेत्रों में चारापत्ती लेने जा रही महिलाओं और जंगलों में चरने वाले मवेशियों के लिए यह नई परेशानी बन गई हैं।
विशेषज्ञ इसे सामान्य मौसमी बदलाव नहीं, बल्कि पर्यावरणीय असंतुलन का संकेत मान रहे हैं। उनका कहना है कि समय से पहले जोंकों का सक्रिय होना असामयिक बारिश, बढ़ती नमी और मिट्टी के तापमान में आए बदलाव से जुड़ा हो सकता है।
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जंगलों में बढ़ी परेशानी (Leech Attack Climate Change Effects in uttarakhand India)
जिला मुख्यालय से सटे चंडाक क्षेत्र के जंगलों में इन दिनों ग्रामीण महिलाएं जोंकों से खासा परेशान हैं। घास काटने और मवेशियों के लिए चारा लेने जंगल पहुंच रही महिलाओं का कहना है कि गीली घास और मिट्टी में जोंकें बड़ी संख्या में मौजूद हैं और पैरों से चिपक जा रही हैं।
स्थानीय निवासी भावना रावत, तारा देवी और लीला देवी ने बताया कि वे वर्षों से जंगलों में चारापत्ती काटने जाती रही हैं, लेकिन पहले जोंक केवल मानसून के दौरान ही दिखाई देती थीं। इस बार मई की शुरुआत से ही इनकी संख्या बढ़ने लगी है। महिलाओं के मुताबिक जोंक अब केवल इंसानों तक सीमित नहीं हैं, बल्कि मवेशियों को भी परेशान कर रही हैं।
मौसम में बदलाव का असर (Climate Change Impact Environmental Changes in Uttarakhand)
वन्यजीव और पर्यावरण विशेषज्ञों का मानना है कि इस वर्ष अप्रैल और मई में सामान्य से अधिक हुई बारिश ने जंगलों में नमी का स्तर तेजी से बढ़ाया है। यही वजह है कि जोंकें समय से पहले सक्रिय हो गई हैं।
आपदा प्रबंधन विभाग के आंकड़ों के अनुसार, जिले में अप्रैल और मई के केवल 45 दिनों के भीतर करीब 154 मिलीमीटर बारिश रिकॉर्ड की गई है। पिछले वर्ष इसी अवधि में यह आंकड़ा लगभग 97.22 मिलीमीटर था। यानी इस बार सामान्य से करीब डेढ़ गुना अधिक वर्षा हुई है। लगातार बारिश और उमस ने जंगलों की सतह को लंबे समय तक नम बनाए रखा, जिससे जोंकों के पनपने के लिए अनुकूल वातावरण तैयार हो गया।
हाइबरनेशन से बाहर आईं जोंकें (Leech Biology chipakne wali joke)
विशेषज्ञ बताते हैं कि जोंकें सामान्य तौर पर अत्यधिक सर्दी और गर्मी के दौरान मिट्टी की गहराई में सुप्तावस्था यानी हाइबरनेशन में चली जाती हैं। लेकिन इस बार मौसम चक्र में बदलाव के कारण उनकी सक्रियता समय से पहले बढ़ गई है।
जोंक एनेलिडा संघ का जीव है, जिसका वैज्ञानिक नाम हिरुडिनारिया ग्रैनुलोसा है। यह प्रायः नम मिट्टी, दलदली क्षेत्रों और ताजे पानी के आसपास पाई जाती है। इसके शरीर के दोनों सिरों पर सकर्स होते हैं, जिनकी सहायता से यह आसानी से त्वचा से चिपक जाती है।
विशेषज्ञों के अनुसार जोंक जब त्वचा को काटती है, तो वह “हिरूडिन” नामक रसायन छोड़ती है, जिससे खून जल्दी जम नहीं पाता। यही कारण है कि जोंक हटाने के बाद भी कुछ समय तक रक्तस्राव जारी रह सकता है।
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पारिस्थितिकी तंत्र के लिए संकेत (Ecological Imbalance Pithoragarh news today Medical Emergency Coverage)
पर्यावरण से जुड़े जानकार इस स्थिति को केवल एक मौसमी घटना नहीं मान रहे हैं। उनका कहना है कि पर्वतीय क्षेत्रों में जैविक चक्र का समय से पहले बदलना स्थानीय पारिस्थितिकी तंत्र में असंतुलन की ओर संकेत करता है। जंगलों में बढ़ती नमी, तापमान में उतार-चढ़ाव और असामान्य वर्षा अब वन्यजीवों और छोटे जीवों के व्यवहार को भी प्रभावित कर रही है।
ग्रामीणों का कहना है कि यदि आने वाले दिनों में बारिश का यही सिलसिला जारी रहा, तो जंगलों में काम करना और अधिक मुश्किल हो सकता है। फिलहाल लोग सावधानी बरतते हुए जंगल जाने के दौरान पैरों को पूरी तरह ढकने और नम स्थानों से बचने की कोशिश कर रहे हैं।
