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लालकुआं: 43 छात्रों को अभी तक नहीं मिली 2024-25 की छात्रवृत्ति, विधायक ने लिया संज्ञान
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Lalkuan news today: छात्रवृत्ति अटकी, उम्मीद अधर में: विधायक की पहल के बावजूद 43 छात्रों का भविष्य अनिश्चित
Lalkuan news today: 43 students have not get their scholarships for 2024-25, MLA mohan Bisht took cognizance nainital uttrakhand govt news: उत्तराखण्ड के नैनीताल जिले के लालकुआं में छात्रवृत्ति को लेकर उठे एक मामले ने अब प्रशासनिक संवेदनशीलता और कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं। दरअसल वर्ष 2024-25 में 43 छात्रों की रुकी हुई छात्रवृत्ति ने उनके शैक्षणिक भविष्य पर अनिश्चितता का संकट खड़ा हो गया है। हालांकि, इस पूरे प्रकरण में स्थानीय विधायक की सक्रियता ने उम्मीद जरूर जगाई, लेकिन शासन स्तर पर ठोस कार्रवाई का अभाव अब भी बना हुआ है।
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मामले के सामने आते ही लालकुआं क्षेत्र के विधायक मोहन सिंह बिष्ट ने बिना देर किए हस्तक्षेप किया। छात्रों और सामाजिक संगठन की ओर से जानकारी मिलते ही उन्होंने इसे गंभीरता से लिया और पूरे मुद्दे को सीधे मुख्यमंत्री तक पहुंचाया। बताया जा रहा है कि उन्होंने व्यक्तिगत रुचि लेते हुए इस विषय को मजबूती से रखा, जिससे प्रभावित छात्रों और उनके परिजनों में राहत की भावना पैदा हुई।
इस पहल की सराहना करते हुए देवभूमि दर्शन उत्थान समिति ने कहा कि जनप्रतिनिधि ने अपने दायित्व को बखूबी निभाया है। समिति का मानना है कि एक जनप्रतिनिधि का यही कर्तव्य होता है कि वह जनता की समस्याओं को प्राथमिकता दे और समय रहते समाधान की दिशा में प्रयास करे। विधायक की तत्परता ने छात्रों को यह भरोसा दिया कि उनकी आवाज दबेगी नहीं।
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हालांकि, सकारात्मक शुरुआत के बावजूद मामला आगे नहीं बढ़ पाया है। मुख्यमंत्री कार्यालय और प्रशासनिक तंत्र के स्तर पर अब तक कोई निर्णायक कदम सामने नहीं आया है। दस्तावेजों के अनुसार प्रक्रिया पूरी होने का दावा किया जा रहा है, लेकिन वास्तविकता यह है कि छात्रवृत्ति अब तक छात्रों के खातों तक नहीं पहुंच सकी है।
सूत्रों के अनुसार, केंद्र और राज्य के बीच समन्वय की कमी इस देरी की मुख्य वजह बन रही है। यही कारण है कि कागजों में कार्रवाई पूरी दिखने के बावजूद जमीनी स्तर पर स्थिति जस की तस बनी हुई है। इस देरी का सीधा असर छात्रों की पढ़ाई पर पड़ रहा है, जिससे उनका पूरा सत्र प्रभावित होने का खतरा बढ़ गया है।
समिति ने साफ तौर पर कहा है कि अब जिम्मेदारी शासन और मुख्यमंत्री स्तर पर है। उन्होंने मांग की है कि इस मामले को प्राथमिकता में लेते हुए तत्काल समाधान निकाला जाए, ताकि छात्रों का भविष्य सुरक्षित किया जा सके।
