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Uttarakhand Government Happy Independence Day
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उत्तराखण्ड के नाम एक और बड़ी उपलब्धि, यूपीएससी के चेयरमैन बनाए गए प्रदीप जोशी

UPSC CHAIRMAN PRADEEP JOSHI: उत्तराखण्ड के प्रोफेसर प्रदीप जोशी बने यूपीएससी के न‌ए चेयरमैन, इससे पहले रह चुके हैं मध्य प्रदेश व छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग के अध्यक्ष..

उत्तराखण्ड के वाशिंदों ने अपनी प्रतिभाओं के दम पर ऊंचे-ऊंचे मुकाम हासिल किए हैं। यह उनकी काबिलियत का ही परिणाम है कि वह आज देश-विदेश के शीर्षस्थ पदों पर कार्यरत हैं। आज एक बार फिर राज्य को गौरवान्वित करने वाली खबर देश की राजधानी दिल्ली से आ रही है जहां उत्तराखण्ड के लाल को संघ लोक सेवा आयोग (यूपीएससी) की कमान सौंपी गई है। जी हां.. हम बात कर रहे हैं राज्य के अल्मोड़ा जिले के रहने वाले प्रोफेसर प्रदीप जोशी (PRADEEP JOSHI) की, जिन्हें सरकार द्वारा संघ लोक सेवा आयोग का नया चेयरमैन (UPSC CHAIRMAN) बनाया गया हैं। सबसे खास बात तो यह है प्रदीप इससे पहले मध्य प्रदेश व छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग के अध्यक्ष रह चुके हैं। प्रदीप की इस उपलब्धि से उनके गाव समेत पूरे क्षेत्र में हर्षोल्लास का माहौल है। क्षेत्रवासियों का कहना है कि प्रदीप ने न सिर्फ अपने गांव-अपने परिवार के साथ अल्मोड़ा जिले का नाम रोशन किया है बल्कि समूचे उत्तराखण्ड को भी गौरवान्वित किया है।
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वर्ष 2022 तक यूपीएससी के चेयरमैन रहेंगे प्रदीप, प्रदीप के पिता थे भारतीय सेना में अधिकारी:-
प्राप्त जानकारी के अनुसार मूल रूप से राज्य के अल्मोड़ा जिले के जोशीखोला निवासी प्रोफेसर प्रदीप जोशी को संघ लोक सेवा आयोग (यूपीएससी) का नया चेयरमैन बनाया गया है। इस पद वह वर्ष 2022 तक कार्यरत रहेंगे। बता दें कि यूपीएससी के नवनियुक्त चेयरमैन प्रदीप के पिता स्व• कैलाश चंद्र जोशी भारतीय सेना में एक अधिकारी थे। पिता के कानपुर में बस जाने के कारण प्रदीप की शिक्षा-दीक्षा भी कानपुर से ही सम्पन्न हुई। इस दौरान प्रदीप उत्तरप्रदेश विद्यार्थी परिषद के अध्यक्ष भी रहे और आपातकाल के दौरान सक्रिय भूमिका निभाने के कारण उन्हें जेल भी जाना पड़ा। पीएचडी करने के उपरांत प्रदीप ने बरेली कॉलेज के कॉमर्स विभाग में वर्ष 1979 से 2000 तक अध्यापन का कार्य किया। इस दौरान वह बरेली कालेज में अपने पहाड़ की चर्चाएं करते रहते थे। बरेली कालेज में प्रोफेसर बनने के बाद भी वह ऊंची-ऊंची उड़ाने भरते रहे। बरेली कालेज में प्रोफेसर के उपरांत वह पहले रानी दुर्गावती विश्वविद्यालय जबलपुर में एमबीए विभाग के डीन बने और फिर उन्होंने दिल्ली नेशनल एजुकेशन प्लानिंग एंड एडमिनिस्ट्रेशन में डायरेक्टर के पद पर कार्य किया। वर्ष 2015 में उन्हें संघ लोक सेवा आयोग का सदस्य बनाया गया था।

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