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उत्तराखण्ड पौड़ी गढ़वाल

उत्तराखण्ड :पहाड़ी क्षेत्रों में क्वारंटीन केंद्र की बदहाली, युवक ने सरकार से की मदद की अपील

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पहाड़ (hills)में क्वारंटीन सेंटर की बद‌इंतजामी से परेशान हुए प्रवासी, ना शासन-प्रशासन ध्यान दें रहा और ना ही प्रधान कुछ इंतजाम कर रहे.. 

अब तक खोजें ग‌ए कोरोना वायरस से बचाव के तरीकों में आपसी सामाजिक दूरी के साथ ही स्वच्छता का विशेष स्थान है, देश-विदेश के चिकित्सकों के साथ ही देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी राष्ट्र के नाम अपने संबोधनों में बार-बार इस पर जोर दे चुके हैं। खुद राज्य के मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत प्रदेश की जनता से स्वच्छता अपनाने और बार-बार हाथ धोने की अपील कर चुके हैं परन्तु शायद उनकी यह अपील शासन-प्रशासन पर बैठे लोगों को नहीं सुनाई दी। हमें ये बात इसलिए कहनी पड़ रही है क्योंकि प्रवासियों के लिए पहाड़ (hills) के गांवों में बने क्वारंटीन सेंटर आज खुद इसकी सच्चाई बयां कर रहे हैं। जी हां.. ये वही प्रवासी है जो बार-बार राज्य सरकार से घर वापसी की गुहार लगा रहे थे और इसके लिए बीस-पच्चीस दिन संस्थागत क्वारंटीन सेंटरों में रहने के लिए तैयार थे, परन्तु उन्हें क्या पता था कि पहाड़ में क्वारंटीन सेंटरों की इतनी बद‌इंतजामी होगी कि वहां मनुष्य तो क्या जानवर भी रहने को राजी नहीं होंगे।



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सरकार ने दी ग्राम प्रधानों को क्वारंटीन सेंटर की जिम्मेदारी, प्रधान ने दरी-चटाई देकर टाली अपने सर की बला:-

प्राप्त जानकारी के अनुसार राज्य के पौड़ी गढ़वाल जिले के नैनीडांडा ब्लाक के मोक्षणा गांव में प्रवासियों के लिए बनाया गया क्वारंटीन सेंटर इतनी दयनीय स्थिति में है कि उसे शब्दों में बयां करना भी हमारे लिए सम्भव नहीं। राजकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय मोक्षण में बनाए गए इस क्वारंटीन सेंटर में न तो साफ-सफाई का ध्यान रखा गया है और ना ही प्रवासियों के खाने-पीने की कोई व्यवस्था। यहां तक कि सोशल मीडिया में वायरल वीडियो में प्रवासियों ने गांव के प्रधान पर भी कोई व्यवस्था ना करने का आरोप लगाया है। उनका कहना है कि ग्राम प्रधान उन्हें केवल एक दरी-चटाई देकर चले गया और इससे ज्यादा व्यवस्था खुद करने को कह गया। इस वीडियो को देखने के बाद तो अब हम सिर्फ इतना ही कह पा रहे हैं कि सरकार ने गांवों के ग्राम प्रधानों को क्वारंटीन सेंटर में प्रवासियों की व्यवस्था करने की जिम्मेदारी दी और प्रधान क्वारंटीन सेंटर का दरवाजा खोलकर और प्रवासियों को दरी-चटाई देकर अपने सर की बला टालने में लगे हैं।

क्वारंटीन केंद्रों की बदहाली के चलते परेशान युवक यहां तक भी कह रहें हैं की अगर पहाड़ (hills) में किसी जंगली जानवर और आकाशीय बिजली से जंगल में कोई खतरा होता है तो कौन जिम्मेदार रहेगा।



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