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उत्तराखण्ड Uttarakhand Martyr

पिथौरागढ़: पिता को तिरंगे में लिपटा देख बोला उठो पापा, कोई जवाब न मिलने पर बिलख पड़ा हर्षित

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uttarakhand: शहीद शंकर के मासूम बेटे हर्षित के प्यारे सवालों को सुनकर हर किसी की आंखों में आ ग‌ए आंसू..

उठो पापा, उठो ना यही वो शब्द थे जिन्होंने भारी भीड़ को भी एक पल के लिए शांत कर दिया, सब एक दूसरे की ओर देखने लगे तभी उस गमहीन माहौल में एक बार फिर प्यारी सी आवाज सुनाई दी, पापा मेरे लिए चीज नहीं लाए… हर्षित की इस आवाज में मासूमियत साफ झलक रही थी। जिसे सुनकर नाली गांव में शहीद शंकर के घर पर भारी संख्या में उपस्थित सभी लोगों की आंखों में आंसू आ गए। पिता की ओर से कोई जवाब नहीं मिलने पर शहीद शंकर का पांच वर्षीय बेटा हर्षित खुद भी रोने लगा, जिसके बाद हर्षित के चाचा ने उसे संभाला। फिर हर्षित अपनी दादी से कहने लगा दादी, दादी “पापा ने कहा था हर्षित मैं तेरे लिए घर और स्विमिंग पूल बनवाऊंगा” ये सब अब कैसे बनेगा? ये सब तो दुखों के उस पहाड़ का एक छोटा सा पत्थर है जो इस समय शंकर के परिवार पर टूट पड़ा है। दुखों के उस पहाड़ को शब्दों में बयां कर पाना असम्भव है। पार्थिव शरीर को देखकर शंकर की मां और पत्नी इंदू का भी यही हाल था। बेटे को तिरंगे में लिपटा देखकर जहां मां जानकी देवी पछाड़ खाकर एक तरफ गिर पड़ी तो वहीं दूसरी तरफ इंदू शंकर के पार्थिव शरीर से लिपट गई। इस भावुक दृश्य को देखकर तो कोई पत्थर दिल भी पिघल जाए।



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सैन्य सम्मान के साथ हुआ शंकर का अंतिम संस्कार, आज पंचतत्व में विलीन हो गया मां भारती का लाल

गौरतलब है कि शंकर सिंह मेहरा बीते शुक्रवार को जम्मू-कश्मीर में पाकिस्तानी सेना की नापाक हरकतों का जबाव देते हुए शहीद हो गए थे। शंकर का पार्थिव शरीर घर पहुंचा तो पिता खुद के दुःख को छुपाते हुए केवल इतना ही बोल पाए कि यही विधाता को मंजूर होगा। यही मेरे नसीब में होगा। मुझे गर्व है, मेरा बेटा शंकर देश के काम आया परिजनों के अंतिम दर्शन करने के बाद शहीद जवान की अंतिम यात्रा रामेश्वर घाट तक निकाली गई, जिसके बाद रामेश्वर स्थित पैतृक घाट पर शहीद जवान का अंतिम संस्कार पूरे सैन्य सम्मान के साथ किया गया। सेना के जवानों ने मातमी धुन के साथ सलामी देकर अपने वीर साथी को अंतिम विदाई दी। शहीद शंकर के अंतिम संस्कार में उत्तराखंड सरकार (uttarakhand government) की ओर से जिले के प्रभारी मंत्री अरविंद पाण्डेय ने भावभीनी श्रद्धांजलि दी। जिसके बाद जब तक सूरज चांद रहेगा शंकर तेरा नाम रहेगा, जैसे गगनभेदी नारों के साथ शहीद शंकर सिंह मेहरा पंचतत्व में विलीन हो गया।


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