UTTARAKHAND NEWS टिहरी गढ़वाल
Balbir Singh Negi MLA Ghansali: 3 बार के पूर्व विधायक बलबीर नेगी का निधन
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ex balbir singh negi MLA Ghansali tehri garhwal died death uttarakhand breaking news today: उत्तराखंड की राजनीति में शून्य छोड़ गए बलवीर सिंह नेगी, 77 वर्ष की उम्र में निधन
ex balbir singh negi MLA Ghansali tehri garhwal died death uttarakhand breaking news today: उत्तराखण्ड के राजनीतिक जगत से जुड़ी एक बेहद दुखद खबर देहरादून से सामने आ रही है जहां टिहरी गढ़वाल जिले के घनसाली विधानसभा क्षेत्र के पूर्व विधायक और उत्तराखंड की राजनीति के अनुभवी चेहरों में शामिल बलवीर सिंह नेगी का लंबी बीमारी के बाद निधन हो गया। सोमवार देर शाम उन्होंने कैलाश अस्पताल में उपचार के दौरान अंतिम सांस ली। उनके निधन की खबर फैलते ही घनसाली क्षेत्र से लेकर प्रदेश की राजनीति तक शोक की लहर दौड़ गई। आपको बता दें कि बलवीर सिंह नेगी उन गिने-चुने नेताओं में थे, जिन्होंने उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड—दोनों विधानसभाओं का प्रतिनिधित्व किया। उनका राजनीतिक जीवन सत्ता से अधिक जनसेवा और क्षेत्रीय सरोकारों के लिए समर्पित था।
उत्तर प्रदेश से उत्तराखंड तक लंबा राजनीतिक सफर
बताते चलें कि बलवीर सिंह नेगी 1970 के दशक से टिहरी की राजनीति में सक्रिय थे। उत्तराखंड राज्य गठन से पहले वर्ष 1989 में उन्होंने जनता दल के टिकट पर टिहरी विधानसभा क्षेत्र से उत्तर प्रदेश विधानसभा का चुनाव जीतकर विधायक बने। उस समय पूरे टिहरी जनपद में केवल दो विधानसभा क्षेत्र हुआ करते थे। उत्तराखंड राज्य बनने के बाद वर्ष 2002 में उन्होंने राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) से घनसाली विधानसभा सीट जीतकर पहले उत्तराखंड विधानसभा में प्रवेश किया। इसके बाद वर्ष 2007 में वे कांग्रेस के टिकट पर पुनः घनसाली से विधायक चुने गए। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि घनसाली सीट के अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित हो जाने के बाद ही उनका विधानसभा सफर थमा, अन्यथा वे और लंबे समय तक क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करते।
प्रचार से दूर, काम में विश्वास रखने वाले नेता
बलवीर सिंह नेगी को हमेशा एक सरल, कम बोलने वाले और बिना शोर-शराबे के काम करने वाले नेता के रूप में जाना गया। वे सुर्खियों से दूर रहकर सड़क, शिक्षा और बुनियादी सुविधाओं जैसे मुद्दों पर लगातार काम करते रहे। अखबारों और मंचों पर उनका नाम कम दिखाई देता था, लेकिन क्षेत्र के लोगों के बीच उनका भरोसा हमेशा मजबूत रहा।
राजनीति से परे एक शांत जीवन
पिछले कुछ वर्षों में उन्होंने सक्रिय राजनीति से दूरी बनाकर अपने गांव में समय बिताना शुरू किया था। यहां उन्होंने एक बागीचा विकसित किया, जिसमें कीवी की खेती की गई। यह बागीचा उनके शांत, प्रकृति-प्रेमी व्यक्तित्व का प्रतीक बन गया था। आपको बताते चलें कि बलवीर सिंह नेगी, टिहरी के प्रसिद्ध चिकित्सक डॉ. नरेंद्र सिंह नेगी के छोटे भाई और नई टिहरी के जाने-माने डॉक्टर डॉ. विजय प्रताप सिंह नेगी के चाचा थे। उनका सामाजिक और पारिवारिक दायरा भी क्षेत्र में सम्मान के साथ देखा जाता था। उनका पार्थिव शरीर वर्तमान में देहरादून के बदरीपुर स्थित आवास पर दर्शनार्थ रखा गया है। अंतिम संस्कार 27 जनवरी को प्रातः 11 बजे हरिद्वार में किया जाएगा। बलवीर सिंह नेगी का निधन उत्तराखंड की राजनीति के लिए एक ऐसी क्षति है, जिसकी भरपाई आसान नहीं है।
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