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अल्मोड़ा की शोभा उपाध्याय लोहनी ने समाज सेवा और स्वरोजगार से बदली गांव की तस्वीर
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Uttarakhand self employment news: अल्मोड़ा की शोभा उपाध्याय लोहनी ने समाजसेवा, और स्वरोजगार से बदली गांव की तस्वीर
Uttarakhand self employment news Shobha Upadhyay Lohani almora hawalbgh social service: अल्मोड़ा जिले की तहसील अल्मोड़ा के अंतर्गत ब्लॉक हवालबाग के ज्योली शिलिंग खरकूना क्षेत्र की निवासी शोभा उपाध्याय लोहनी आज सामाजिक सेवा और आत्मनिर्भरता की प्रेरक पहचान बन चुकी हैं। पिता श्री आनंद बल्लभ उपाध्याय और माता श्रीमती हंसी देवी के संस्कारों में पली-बढ़ी तथा समाजशास्त्र (Sociology) में पोस्ट ग्रेजुएट शोभा वर्ष 2010 से निरंतर सामाजिक कार्यों में सक्रिय हैं।
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सामाजिक सेवा का सफर (Social Work | Rural Development | NGO Activities)
विभिन्न संस्थाओं के साथ कार्य करते हुए उन्होंने जो अनुभव अर्जित किया, उसे वे अपने क्षेत्र के गरीब, श्रमिक वर्ग, विधवाओं, वृद्धों और दिव्यांगजनों तक पहुँचाकर उनके जीवन स्तर को सुधारने में लगा रही हैं। कई जरूरतमंदों को कृत्रिम अंग उपलब्ध कराने, पेंशन योजनाओं, वृद्धावस्था सहायता और अन्य सरकारी लाभ दिलाने में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका रही है, साथ ही वे गांव-गांव जाकर योजनाओं की जानकारी भी देती हैं।
स्वरोजगार और आत्मनिर्भरता की पहल (Self Employment | Turmeric Ginger Farming | Pine Needle Charcoal Business)
सामाजिक सेवा के साथ-साथ वे पशुपालन कर दूध डेयरी में बेचती हैं, हल्दी और अदरक का स्थानीय उत्पादन व विक्रय करती हैं — पहाड़ की अनुकूल जलवायु और जैविक मिट्टी में उगाई गई हल्दी व अदरक गुणवत्ता में बेहतर होती है, जिसे यदि स्थानीय स्तर पर सुखाकर, पाउडर बनाकर या आकर्षक पैकेजिंग के साथ बाजार तक पहुँचाया जाए तो यह कम लागत में अधिक लाभ देने वाला स्वरोजगार बन सकता है और ग्रामीण महिलाओं के लिए आय का सशक्त माध्यम सिद्ध हो सकता है — तथा पिरूल (चीड़ की पत्तियों) से कोयला बनाने का कार्य भी कर रही हैं, जिससे उन्हें अच्छी आय प्राप्त हो रही है और ग्रामीण महिलाओं को बिना पलायन किए गांव में रहकर आत्मनिर्भर बनने का मजबूत संदेश मिल रहा है।
परिवार का सहयोग और प्रेरणा (Family Support | Women Motivation Story | Rural Success Story)
देवभूमि दर्शन से खास बातचीत में शोभा बताती हैं कि लगभग 15 वर्ष पूर्व जब ग्रामीण समाज में लड़कियों को घर से बाहर निकलने की अनुमति बहुत कम मिलती थी, तब उनकी माता ने उनमें समर्पण, त्याग और जिम्मेदारी की भावना जगाकर उन्हें कार्य करने की अनुमति दी। विवाह के बाद दुर्गम क्षेत्र में रहने के बावजूद उनके पति नीरज चंद्र लोहनी (प्राइवेट कंपनी, गुरुग्राम) ने कभी रोक-टोक नहीं की, बल्कि हर कठिन परिस्थिति में मार्गदर्शन और सहयोग दिया। उनके बड़े भाई हिमांशु उपाध्याय, छोटे भाई भास्कर उपाध्याय, देवर योगेश चंद्र लोहनी (टूर एंड ट्रेवल्स व्यवसाय), छोटी बहन किरन और बच्चों का निरंतर समर्थन उन्हें आगे बढ़ने की शक्ति देता है।
चुनौतियां और संघर्ष (Challenges | Rural Women Issues | Social Responsibility)
गरीब, विधवा, वृद्ध और दिव्यांगजनों के लिए कार्य करते समय आर्थिक संसाधनों की कमी एक बड़ी चुनौती रही, क्योंकि कई बार कागजी कार्यवाही और आवश्यक प्रक्रियाओं में धन की आवश्यकता पड़ती है, फिर भी उन्होंने तन-मन से सेवा करते हुए उचित मार्गदर्शन और दस्तावेजी प्रक्रिया पूरी कराकर जरूरतमंदों की सहायता की।
ग्रामीण महिलाओं के लिए संदेश (Message to Rural Women | Stop Migration | Village Entrepreneurship)
ग्रामीण महिलाओं को संदेश देते हुए शोभा कहती हैं कि अपने हुनर और मेहनत के लिए किसी विशेष स्थान की आवश्यकता नहीं होती — बिना पलायन किए भी गांव में रहकर आत्मनिर्भर बनना संभव है। उनका जीवन यह सिद्ध करता है कि निष्ठा, शिक्षा और सकारात्मक सोच के साथ ग्रामीण महिलाएँ भी समाज में बड़ा परिवर्तन ला सकती हैं।
