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Uttarakhand news: टिहरी गढ़वाल के सोहन बिष्ट ने बिना शराब पार्टी के विदा की बेटी ..
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Alcohol free wedding India: टिहरी में नशा मुक्ति का अनोखा संदेश पिता ने बिना शराब पार्टी के विदा की बेटी (Alcohol free Wedding india Uttarakhand)
Alcohol free Wedding india Uttarakhand: टिहरी गढ़वाल जनपद के घनसाली क्षेत्र स्थित ग्राम पदौखा बासर के निवासी सोहन सिंह बिष्ट ने समाज के सामने एक प्रेरणादायक उदाहरण पेश किया है। उन्होंने अपनी बेटी की शादी में शराब और मांस का पूरी तरह बहिष्कार कर नशा मुक्ति का मजबूत संदेश दिया। जहां आजकल पहाड़ी क्षेत्रों में शादी-ब्याह जैसे आयोजनों में शराब का चलन आम हो गया है, वहीं सोहन सिंह बिष्ट का यह कदम एक सकारात्मक बदलाव की ओर इशारा करता है।
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संघर्ष और सेवा से जुड़ी है सोच (Social Work Inspiration Story)
सोहन सिंह बिष्ट पहले होटल में काम करते थे, लेकिन लॉकडाउन के बाद गांव में ही रहकर समाज सेवा में जुट गए। उन्होंने कई बार जंगलों और नदी किनारों में फंसे गाय-बैलों को बचाया, वहीं सड़क दुर्घटनाओं में घायल लोगों को खुद अस्पताल तक पहुंचाया। उन्होंने कई जरूरतमंदों को ऋषिकेश एम्स और जॉली ग्रांट अस्पताल तक पहुंचाकर मानवता की मिसाल पेश की।
नशे के बढ़ते चलन से चिंतित (Alcohol Issue in Uttarakhand)
सोहन बिष्ट का कहना है कि उत्तराखंड में शराब और नशे का चलन तेजी से बढ़ रहा है। सड़क किनारे छोटे-छोटे होटलों में खुलेआम शराब बिक रही है, जिससे झगड़े और सामाजिक समस्याएं बढ़ रही हैं। खासकर शादी-विवाह और अन्य पारंपरिक आयोजनों में शराब का अत्यधिक उपयोग उन्हें परेशान करता था।
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बेटी की शादी से दिया बड़ा संदेश (Dry Wedding Initiative)
इसी सोच के चलते उन्होंने एक साल पहले ही तय कर लिया था कि अपनी बेटी की शादी में शराब और मांस नहीं रखा जाएगा। जब शादी का आयोजन हुआ तो इसे पूरी तरह “नशा मुक्त विवाह” के रूप में संपन्न किया गया। सबसे खास बात यह रही कि सोहन सिंह बिष्ट ने केवल शादी में ही नहीं, बल्कि शादी के निमंत्रण कार्ड में भी नशा मुक्ति का संदेश छपाया था, जिससे यह साफ होता है कि उन्होंने पहले से ही इस पहल को लेकर ठोस निर्णय लिया था।
लोगों ने की सराहना, समाज को मिला संदेश
शादी के बाद गांव के लोगों और बाहर से आए मेहमानों ने इस पहल की खूब सराहना की। कई लोगों ने उन्हें फोन कर बधाई दी और कहा कि उन्होंने समाज को एक नई दिशा दी है। लोगों का मानना है कि उनकी इस पहल से धीरे-धीरे अन्य लोग भी प्रेरित होंगे और गांवों में सकारात्मक बदलाव आएगा।
देवभूमि उत्तराखंड के लिए एक नई शुरुआत (Positive Change Uttarakhand)
सोहन सिंह बिष्ट का यह कदम केवल एक पारिवारिक निर्णय नहीं, बल्कि पूरे समाज के लिए एक प्रेरणा है। उन्होंने यह साबित कर दिया कि बिना नशे के भी पारंपरिक और खुशहाल आयोजन किए जा सकते हैं, जो देवभूमि उत्तराखंड की संस्कृति और मूल्यों को और मजबूत बनाते हैं।
