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Uttarakhand news today: उत्तराखण्ड पहाड़ में होगी चकबंदी पलायन रोकने में हो सकती है मददगार
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chakbandi in Uttarakhand: उत्तराखंड में आंशिक चकबंदी प्रोत्साहन नीति को मिली मंजूरी, 275 गांवों को जोड़ने का लक्ष्य..
Uttarakhand news today: Consolidation land chakbandi in Uttarakhand policy may stop migration palayan uttarakhand breaking news today: उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की अध्यक्षता में बीते बुधवार को हुई कैबिनेट बैठक में उत्तराखंड के पर्वतीय क्षेत्रों की विषम भौगोलिक परिस्थितियों को देखते हुए एक महत्वपूर्ण निर्णय लिया गया है। इस निर्णय के तहत पर्वतीय क्षेत्रों में बिखरी जोतों को एकीकृत करने और कृषि को बढ़ावा देने के लिए पर्वतीय क्षेत्रों में स्वैच्छिक आंशिक चकबंदी प्रोत्साहन नीति 2026 को लागू किया गया है।
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बता दें उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने पर्वतीय क्षेत्रों मे चकबंदी नीति को मंजूरी दी है। यह नीति पर्वतीय जिलों के काश्तकारों के आर्थिक उत्थान और कृषि विकास के लिए महत्वपूर्ण साबित होगी। बताते चले नीति के तहत प्रदेश के 11 पर्वतीय जिलों में हर साल 5 गांव में चकबंदी का काम पूरा किया जाएगा।
5 सालों में कुल 275 गांव को स्वैच्छिक आंशिक चकबंदी (dehradun news today)
5 सालों में कुल 275 गांव को स्वैच्छिक आंशिक चकबंदी का लाभ देने का लक्ष्य रखा गया है। चकबंदी केवल उन्हीं गांवों में होगी जहां पर चयन किया जाएगा, जो किसी भी प्रकार के भू विवाद से पूरी तरह से मुक्त होंगी।
क्षेत्रफल 10 हेक्टेयर होना जरूरी (Dehradun breaking news)
बताते चलें चकबंदी क्षेत्र का न्यूनतम कुल भूमि क्षेत्रफल 10 हेक्टेयर होना जरूरी रखा गया है। कम क्षेत्रफल होने की दशा में न्यूनतम 25 खाताधारकों की लिखित में सहमति देना अनिवार्य होगा। इस नीति के जरिए भूस्वामियों को अपने ओर से आपसी सहमति से चेक निर्माण का कार्य करना होगा। काश्तकारों की ओर से स्वयं चकबंदी योजना तैयार कर संबंधित अधिकारियों के समक्ष प्रस्तुत की जाएगी।
जानें कैसे मिलेगा चकबन्दी का लाभ (Uttarakhand news today)
सबसे पहले इच्छुक किसान/खाताधारक अपना आवेदन पत्र बंदोबस्त अधिकारी (चकबंदी) या फिर सहायक कलेक्टर (परगनाधिकारी) को प्रस्तुत करेंगे। इस नीति के पारदर्शी संचालन, अनुश्रवण एवं समीक्षा के लिए राज्य स्तर पर एक उच्चाधिकार समिति (HPC), राज्य स्तरीय अनुश्रवण समिति और जिला स्तर पर क्रियान्वयन समिति का गठन किया गया है।
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3 साल के बाद आवश्यक संशोधन
नीति के व्यावहारिक अनुभवों और सुझावों के आधार पर लागू होने के 3 साल के बाद इसमें आवश्यक संशोधन और सुधार किए जाएंगे। यहाँ पर वन संपदा और वन्य जीव विविधता अधिक है जिसके चलते कृषि उत्पादन के लिए भूमि की उपलब्धता कम है। हालांकि चकबंदी के कारण कृषि बागवानी और शहर कृषि को बढ़ावा मिलेगा।
चकबंदी के कारण रुकेगा पलायन ( Uttarakhand Consolidation of Land Holdings news)
बताते चलें उत्तराखंड के पर्वतीय क्षेत्रों में चकबंदी के कारण काफी हद तक पलायन रुक सकेगा इसके साथ ही लोगो को रोजगार मिलने की प्रबल संभावना है। विशेषकर बिखरे हुए छोटे खेतों को एक जगह इकट्ठा करने से कृषि उत्पादन बढ़ेगा और लोग खेती के लिए जागरूक होंगे।
अब बढ़ेगा उत्पादन
दरअसल अभी प्रदेश के एक ही किसान की जमीनें कई अलग-अलग स्थानों पर छोटे-छोटे टुकड़ों में बंटी रहती है, जिससे खेती की लागत बढ़ती है और सिंचाई मशीनों का उपयोग मुश्किल हो जाता इसके साथ ही उत्पादन भी घट जाता है। इसके अलावा बिखरे खेतों की घेराबन्दी करना मुश्किल हो जाता है। इसी वजह से लोग लगातार अपने गांव मे खेती छोड़कर शहरों की ओर पलायन करने लगते है। लेकिन चकबंदी के जरिए बिखरी जमीनों को एक साथ कर उनमे व्यवस्थित रूप से खेती की जा सकती है, जो काश्तकारों के लिए बड़ी राहत साबित होगी।
