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Uttarakhand principal vacancy 2026 Teacher promotion rules India education department jobs
Image : सांकेतिक फोटो ( Uttarakhand principal vacancy 2026)

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UTTARAKHAND NEWS देहरादून

Uttarakhand principal vacancy: उत्तराखंड में शिक्षकों की पदोन्नति का अध्यादेश प्रधानाचार्य पद रिक्त

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Uttarakhand principal vacancy 2026: शिक्षकों की पदोन्नति के लिए लाया जाएगा अध्यादेश, प्रदेश में 90 फ़ीसदी प्रधानाचार्य के पद खाली

Uttarakhand principal vacancy 2026 Teacher promotion rules India education department jobs: उत्तराखंड मे ऐसे कई सारे विद्यालय मौजूद है ,जहां पर प्रधानाचार्य एवं शिक्षकों के पद लंबे समय से रिक्त चल रहे हैं, जिन्हे भरने के लिए प्रदेश सरकार शिक्षकों की पदोन्नति के लिए अध्यादेश लाने जा रही है। बीते गुरुवार को कैबिनेट बैठक में हुई चर्चा में शिक्षा विभाग के प्रस्ताव पर सहमति बनी है।

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बता दें प्रदेश के सरकारी स्कूलों में प्रधानाचार्य के 1385 मे से 1250 पद खाली चल रहे हैं ,जो कुल पदों का करीब 90 फीसदी है। इतना ही नहीं बल्कि प्रधानाध्यापकों के 910 में से 870 पद खाली पड़े हैं जिनमे प्रवक्ताओं के भी 4000 से अधिक पद पदोन्नति के खाली है। प्राथमिक और जूनियर हाई स्कूल में भी शिक्षकों के कई पद खाली है ,जहां पर शिक्षा व्यवस्था की स्थिति चिंताजनक है। इतना ही नहीं बल्कि शिक्षकों के खाली पद होने के कारण इसका सीधा असर बच्चों की पढ़ाई पर पड़ रहा है।

कोर्ट में रुका पदोन्नति का मामला (Uttarakhand teacher news) 

शिक्षकों के खाली पद को ध्यान में रखते हुए सरकार शिक्षकों की पदोन्नति के लिए अध्यादेश लाकर सेवा नियमावली में संशोधन करने जा रही है। शिक्षा मंत्री धन सिंह रावत ने कहा कि सरकार छात्र और शिक्षकों के हित में हर आवश्यक कदम उठाएगी। उन्होंने बताया कि पदोन्नति विवाद और कोर्ट में मामला होने के कारण यह प्रक्रिया रुकी हुई है।

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शिक्षकों ने जताई नाराजगी

पदोन्नति न होने के कारण कई शिक्षक 30- 32 साल की सेवा के बाद भी बिना पदोन्नति के एक ही पद से रिटायर्ड हो रहे हैं, जिसके कारण शिक्षकों में भारी नाराजगी देखने को मिल रही है। उनका कहना है कि सरकार चाहे तो उनकी पदोन्नति को कोर्ट के अंतिम निर्णय के अधीन रखते हुए उन्हें पदोन्नत कर सकती है ,जिससे उनकी मांग पूरी होगी और स्कूलों में खाली पद भी भरे जा सकेंगे। लेकिन शिक्षकों की पदोन्नति के प्रकरण में कोर्ट से निर्णय आने में देरी हो रही है जिसके चलते सरकार इस प्रकरण पर अध्यादेश लाने जा रही है।

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