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Uttarakhand school books: चल पड़ा महंगी किताबों का खेल, पर्चियां दे कर दबाव डाल रहे स्कूल
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Uttarakhand school books: किताबों के नाम पर खेल: स्कूलों की पर्चियों से महंगी किताबों का दबाव, प्रशासन की जांच में खुली परतें
Uttarakhand school books: admission expensive books schools putting pressure giving slips haldwani Bageshwar live update: उत्तराखण्ड में नए शैक्षिक सत्र की शुरुआत के साथ ही अभिभावकों पर आर्थिक बोझ बढ़ाने का एक बड़ा खेल सामने आया है। प्रशासनिक जांच में खुलासा हुआ है कि कुछ निजी विद्यालय एनसीईआरटी की सस्ती और मानक किताबों को दरकिनार कर महंगी पुस्तकों की पर्चियां थमा रहे हैं, जिनकी कीमत कई गुना तक अधिक है।
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प्रशासन ने गोदामों में मारा छापा haldwani School books admission: मिल रही जानकारी के मुताबिक नैनीताल जिले के हल्द्वानी में बीते रोज सिटी मजिस्ट्रेट एपी बाजपेयी, एसडीएम प्रमोद कुमार और तहसीलदार कुलदीप पांडे के नेतृत्व में गठित टीमों ने शहर के प्रमुख बुक डिपो और गोदामों का निरीक्षण किया। जांच के दौरान कई अभिभावकों ने शिकायत की कि स्कूलों की ओर से उन्हें विशेष दुकानों से ही किताबें खरीदने के लिए बाध्य किया जा रहा है। टीम ने मौके से किताबों की सूची और रेट लिस्ट जुटाकर उनका मिलान किया, जिसमें कई जगहों पर स्पष्ट अंतर सामने आया।
70 से 90 रूपए की किताबें बिक रही 400 रूपए तक NCERT books price
जांच में यह भी सामने आया कि जहां एनसीईआरटी की किताबें 70 से 90 रुपये के बीच उपलब्ध हैं, वहीं उसी स्तर की निजी प्रकाशकों की किताबें 350 से 400 रुपये तक बेची जा रही हैं। यानी एक ही विषय की किताब पर अभिभावकों को तीन से चार गुना अधिक कीमत चुकानी पड़ रही है। यह अंतर तब और बढ़ जाता है जब पूरे सत्र की किताबों का सेट खरीदा जाता है।
केवल एक या दो ही एनसीईआरटी की किताबें शामिल कर रहे स्कूल uttarakhand school books list
बागेश्वर में भी स्थिति कुछ अलग नहीं है। यहां कई निजी स्कूलों ने केवल औपचारिकता निभाने के लिए एक-दो विषयों में एनसीईआरटी को शामिल किया है, जबकि बाकी विषयों के लिए निजी प्रकाशकों की महंगी किताबें अनिवार्य कर दी गई हैं। अभिभावकों का कहना है कि जब वे अलग-अलग किताबें खरीदना चाहते हैं तो विक्रेता उन्हें पूरा सेट लेने के लिए मजबूर करते हैं, जिससे खर्च और बढ़ जाता है।
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शिक्षा विभाग करेगा कार्यवाही uttarakhand education policy books
प्रशासन ने निरीक्षण के दौरान किताबों के सैंपल भी एकत्र किए हैं और उनके आईएसबीएन नंबर के आधार पर सत्यापन की प्रक्रिया शुरू कर दी है। साथ ही संबंधित स्कूलों की मान्यता, पंजीकरण और नियमों के अनुपालन की भी जांच के निर्देश दिए गए हैं। प्राथमिक स्तर पर प्ले ग्रुप से लेकर यूकेजी तक संचालित कक्षाओं की वैधता भी जांच के दायरे में लाई गई है।
इस पूरे मामले में शिक्षा विभाग सख्त रुख अपनाने की तैयारी में है। अधिकारियों के अनुसार, यदि किसी स्कूल द्वारा अभिभावकों पर अनावश्यक दबाव डालने या नियमों के उल्लंघन की पुष्टि होती है, तो नोटिस जारी कर कार्रवाई की जाएगी। साथ ही पुस्तक विक्रेताओं को भी ग्राहकों के लिए बुनियादी सुविधाएं सुनिश्चित करने और निर्धारित निर्देशों का पालन करने के लिए कहा गया है।
यह मामला केवल महंगी किताबों तक सीमित नहीं है, बल्कि शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता और जवाबदेही पर भी सवाल खड़े करता है। एक ओर जहां सरकार सस्ती और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा की बात करती है, वहीं दूसरी ओर इस तरह की प्रथाएं अभिभावकों के भरोसे को कमजोर कर रही हैं। अब निगाहें प्रशासन की आगामी कार्रवाई पर टिकी हैं कि क्या इस खेल पर वास्तव में लगाम लग पाती है या फिर हर साल की तरह इस बार भी यह बोझ यूं ही बढ़ता रहेगा।
