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Uttarakhand teacher transfer highcourt decision order regarding school teacher sugam durgam transfer latest news today
Image : सांकेतिक फोटो ( Uttarakhand teacher transfer)

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UTTARAKHAND NEWS नैनीताल

Uttarakhand teacher transfer: हाईकोर्ट का फैसला अब सुगम दुर्गम के आधार पर नहीं होगा ट्रांसफर

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Uttarakhand teacher transfer: उत्तराखंड में अब सुगम दुर्गम के आधार पर नहीं होगा ट्रांसफर, नैनीताल हाई कोर्ट का बड़ा फैसला

Uttarakhand teacher transfer highcourt decision order regarding school teacher sugam durgam transfer latest news today: उत्तराखंड के नैनीताल हाई कोर्ट ने वार्षिक स्थानांतरण अधिनियम 2017 के बाद 2018 में जारी हुए सर्कुलर के माध्यम से सरकारी विद्यालयों का सरकार की ओर से किया गया सुगम और दुर्गम वर्गीकरण मानने से इनकार कर दिया है। इतना ही नही बल्कि कोर्ट ने कहा है कि अन्य आधार पर सरकारी विभाग किसी भी कर्मचारी का स्थानांतरण एक जगह से दूसरी जगह करने के लिए स्वतंत्र हैं।

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Uttarakhand sugam durgam transfer: प्राप्त जानकारी के अनुसार नैनीताल हाई कोर्ट के न्यायाधीश न्याय मूर्ति राकेश थपलियाल की एकल पीठ ने सरकारी शिक्षक अंजू समेत अन्य की याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए महत्वपूर्ण निर्णय लिया। इस निर्णय में कोर्ट ने आदेश दिया की पिछले साल 9 अप्रैल को हाई कोर्ट की ओर से जारी आदेश बहुत स्पष्ट था , जिसके तहत सरकार को खास स्थितियों मे स्थानांतरण करने की अनुमति दी गई थी। जिसमें लंबा कार्यकाल शामिल था जिसकी जांच सरकार देहरादून ,हरिद्वार, हल्द्वानी रुद्रपुर ,रामनगर और कोटद्वार जैसे मैदानी क्षेत्रों में बिताए गए समय के आधार पर कर सकती थी। तर्क दिया गया कि यह एक्ट सुगम और दुर्गम क्षेत्र के वर्गीकरण के मामले में मनमाना लगता है ऐसे में सुगम और दुर्गम को असल में परिभाषित नहीं किया गया। इसके लिए एक दो और तीन के तहत तीन समितियां बनाई गई।

राज्य सरकार ने 19 मार्च 2018 को सर्कुलर किया जारी

राज्य सरकार ने 19 मार्च 2018 को एक सर्कुलर जारी किया था जिसमें सुगम और दुर्गम दोनों जगह की पहचान करने के लिए मापदंड तय किए गए थे। पिछली सुनवाई में शिक्षा विभाग के सचीव ने स्वयं कोर्ट को बताया कि विभाग को स्थान का वर्गीकरण करने में दिक्कत हो रही है और बड़ी संख्या में सरकारी अधिकारियों को सिर्फ इसी काम के लिए नियुक्त किया जा रहा है।

उत्तराखंड में अधिकांश जिले हैं पहाड़ी ( Uttarakhand breaking news nainital)

हाई कोर्ट ने निर्णय में कहा कि पहाड़ियों से घिरा होने की वजह से उत्तर प्रदेश से अलग उत्तराखंड राज्य का गठन किया गया था। जिसमें 13 जिलों में से अधिकतर जिले पहाड़ी क्षेत्र में है अब प्रश्न यह है कि इस तरह से वर्गीकरण का क्या औचित्य है। पिछले साल 13 फरवरी को जब इस मामले पर सुनवाई हुई तो मुख्य स्थाई अधिवक्ता चंद्रशेखर रावत ने साफ तौर पर कहा कि दो संस्थान एक ही गांव एक ही जगह और एक ही ग्राम सभा में स्थित है लेकिन उन्हें सुगम और दुर्गम के रूप में वर्गीकृत किया गया है।

हाई कोर्ट के नियमों का हुआ उल्लंघन ( nainital high court)

कोर्ट ने इसे अजीब स्थिति बताते हुए एक ही स्थान पर दो तरह के संस्थाओं को सुगम और दुर्गम में बाँटा जिससे यह स्पष्ट हुआ कि सरकारी संस्थानों विभागों का किया गया यह काम पूरी तरह से बेकार है। याचिकाकर्ता के अधिवक्ता ने कहा की जून में निदेशक स्वास्थ्य की ओर से कहा की 9 फार्मासिस्ट का स्थानांतरण आदेश जारी किया गया था जो फरवरी में हाई कोर्ट की ओर से पारित आदेश का सरासर उल्लंघन था। इस आदेश में सुगम और दुर्गम के आधार पर किसी भी कर्मचारी का ट्रांसफर करने से रोका गया था।

कोर्ट ने दिया स्पष्ट निर्देश ( nainital highcourt news)

कोर्ट ने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि अगर कोई नियमों का उल्लंघन करता है तो उसके खिलाफ आवश्यक कार्यवाही की जाएगी। कोर्ट ने कहा कि सुगम और दुर्गम के वर्गीकरण के आधार पर स्थानांतरण किया जा सकता है इसमें कोई संदेह नहीं है यह कानून विधायकी ने बनाया है।

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