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Om parvat Pithoragarh: पिथौरागढ़ के नागलिंग गांव में मिला एक और ओम पर्वत
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Om Parvat Pithoragarh: second historical mountain found in Nagling village of darma valley uttarakhand news: उत्तराखंड को मिला एक और रहस्यमई ओम पर्वत, श्रद्धालुओं और शोधकर्ताओं के बीच बना चर्चा का विषय…
Om Parvat Pithoragarh: second historical mountain found in Nagling village of darma valley uttarakhand news: हिमालय क्षेत्र में धार्मिक पुस्तकों में 8 ओम पर्वतों का वर्णन किया गया है जिसमें से अभी तक दो ओम पर्वतों की पहचान हो पाई है। दरअसलओम पर्वतों की प्राकृतिक संरचना बर्फ जमने पर ऊँ की स्पष्ट आकृति के रूप में उभरती है जिसे धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जाता है।
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बता दें सबसे चर्चित ओम पर्वत व्यास घाटी में पिथौरागढ़ के नावीढांग के पास स्थित है, जहां पर बर्फबारी के दौरान पर्वत की सतह पर ऊँ बनता दिखाई देता है। जबकि दूसरा ओम पर्वत दारमा घाटी के नागलिंग गांव के पास स्थित है जिसे अतीत से एक प्रमुख धार्मिक स्थल माना जाता है। इतना ही नहीं बल्कि यहां पर स्थानीय ग्रामीण काफी लंबे समय से पूजा अर्चना करते आ रहे हैं जो आस्था का एक केंद्र माना जाता है। इसकी जड में नाग की आकृति है जिसके चलते इस गांव का नाम नागलिंग पड़ा है।
दो ओम पर्वतो की हुई पहचान
नागलिंग में एक छोटी नदी निकलती है जो धौली गंगा की सहायक नदी है इससे उत्तर की तरफ लगी हुई पंचाचुली पर्वत श्रृंखला है। जब पर्वत पर बर्फ कम होती है तो उस समय ओम की आकृति अपेक्षाकृत बड़ी और स्पष्ट दिखाई देती है। धार्मिक मान्यताओं और प्राकृतिक विविधताओं के संगम वाले इन ओम पर्वतों को लेकर क्षेत्र में रुचि लगातार बढ़ रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि शेष ओम पर्वतों की खोज के लिए विस्तृत अध्ययन और सर्वेक्षण की आवश्यकता है। नागलिंग गांव में लगभग 150 मीटर चढ़ाई के बाद हिमचुली का वयाशी बुग्याल आता है और सामने ओम पर्वत। शीतकाल में भारी बर्फबारी से पश्चिम में स्थित ओम नजर आता है। दारमा गांव में दिसंबर से अप्रैल तक जब सूर्य दक्षिणायन से उत्तरायण होता है तो पर्वत श्रृंखला के कारण दिन में सात बार सूर्य पर्वतों के पीछे छिप जाता है और नजर नही आता। ग्रामीणों का कहना है कि नागलिंग गांव में उक्त अवधि में सात बार सूर्योदय और सात बार सूर्यास्त होता है। इस दौरान ग्रामीण माइग्रेशन में निचली घाटी में निवास करते हैं।
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