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विख्यात लोकगायक प्रीतम भरतवाण ने अमेरिका में लहराया अपनी पहाड़ी संस्कृति का परचम ,अमेरिकी बजा रहे है ढोल दमो

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विख्यात लोकगायक प्रीतम भरतवाण ने अमेरिका में लहराया अपनी पहाड़ी संस्कृति का परचम ,अमेरिकी बजा रहे है ढोल दमोफोटो स्रोत- प्रीतम भरतवाण फेसबुक ऑफिसियल ग्रुप 




लोक गायक प्रीतम भरतवाण इन दिनों अपनी हिमालयी क्षेत्र की संस्कृति का परचम अमेरिका में लहरा रहे है। इस से संबंधित जानकारी और फोटो उन्होंने अपने फेसबुक के ऑफिसियल ग्रुप में शेयर की हुई है।  उन्होंने अपने फेसबुक के ऑफिसियल ग्रुप में कहा है –” जागर और ढोल कु संबध बहुत गहरू छ, जागर कु प्रशिक्षण और व्याखान  अमेरिका का प्रशिक्षणार्थियों का बीच। बहुत रूचिकर विषय और मन से ज्ञान प्राप्त करदा सिनसिनाटी विश्वविद्यालय का शोधार्थी।” अपने अमेरिका प्रवास में वह नार्थ कैरेलिना की सिनसिनाटी यूनिवर्सिटी में अमेरिकियों को ढोल-दमौं के गुड़ रहस्य की बाते सिख रहे है । इस से उत्तराखंड की संस्कृति को अमेरिका में एक नयी पहचान मिली है, सोशल मीडिया पर प्रीतम भरतवाण के इन सराहनीय कार्यो की खूबी प्रशंसा की जा रही है।

विख्यात लोकगायक प्रीतम भरतवाण ने अमेरिका में लहराया अपनी पहाड़ी संस्कृति का परचम ,अमेरिकी बजा रहे है ढोल दमोफोटो स्रोत- प्रीतम भरतवाण फेसबुक ऑफिसियल ग्रुप




प्रीतम ने अपनी जो फोटो प्रशंसकों के साथ शेयर की है ,उसमे वो विदेशी छात्र और छात्राओं के साथ ढोल दमौं गले में डालकर बजाते हुए दिख रहे है। वह 18 फरवरी को अमेरिका गए थे उनकी वापसी छह मार्च को होगी। आप को बताते चले जानकारी के अनुसार लोकगायक प्रीतम भरतवाण यूनिवर्सिटी ऑफ छान की मेजबानी में अपने अमेरिका प्रवास के दौरान न्यूयार्क, सिनसिनाटी, ओबेरलिन, ओकलाहोमा व शिकागो आदि शहरों में सांस्कृतिक कार्यक्रम करेंगे और विश्वविद्यालयों में जागर व ढोल सागर पर व्याख्यान भी देंगे जिस से उन्हें पहाड़ की इस संस्कृति के बारे में समझने में आसानी हो ।




प्रीतम भरतवाण का उत्तराखंड और यहां की संस्कृति के प्रति बहुत ही गहन रूचि और प्रेम है। खुद सिनसिनाटी यूनिवर्सिटी के शोध छात्र रहे और बाद में प्रोफेसर हुए स्टीफन फियोल अमेरिका में कई जोड़ी ढोल दमौं लेकर गए। प्रीतम भी इससे पहले भी अमेरिका जाकर जागर की प्रस्तुति व व्याख्यान दे चुके हैं। ये उनका पाचवां अमेरिका प्रवास है। उनका कहना है की उन्हें इस प्रकार अपनी संस्कृति को विदेशो में प्रचार करने और ढोल दमो की ये बारीकियां बताने में बहुत आनंद आ रहा है । यह उत्तराखंड के निवासियों के लिए बहुत गर्व की बात होनी चाहिए की हमारी संस्कृति जो की दिन प्रति दिन धूमिल होती जा रही है, वो आज विदेशो में भी अपनी गहरी छाप छोड़ रही है।

 

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