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Haldwani Kalu Siddha mandir temple shift
फोटो सोशल मीडिया Kalu Siddha temple Haldwani

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Haldwani: विकास की भेंट चढ़ा 200 साल पुराना कालू सिद्ध मंदिर, शिफ्ट करने की तैयारी

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Kalu Siddha temple Haldwani : हल्द्वानी के कालाढूंगी चौराहे पर स्थित 200 साल पुराना कालू सिद्ध बाबा का मंदिर दूसरी जगह होगा शिफ्ट….

Kalu Siddha temple Haldwani Shift News: उत्तराखंड के नैनीताल जिले के हल्द्वानी शहर स्थित कालाढूंगी चौराहे पर 200 साल पुराने कालू सिद्ध बाबा के मंदिर को शिफ्ट किए जाने की तैयारी चल रही है। दरअसल यह ऐतिहासिक मंदिर श्रद्धालुओं के लिए एक महत्वपूर्ण स्थान माना जाता है जिसके स्थानांतरण का निर्णय व्यापक चर्चा के बाद लिया गया है। बताया जा रहा है कि कालू सिद्ध बाबा मंदिर के स्थानांतरण का मुख्य कारण बढ़ती यातायात समस्याओं और नगर के विस्तार को ध्यान में रखते हुए लिया गया है।

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Haldwani Kalu Siddha Temple Shift News बता दें नैनीताल जिले के हल्द्वानी शहर के बीचों बीच स्थित 200 साल पुराने कालू सिद्ध मन्दिर को दूसरी जगह शिफ्ट किए जाने की तैयारी है। जिसको लेकर आज शनिवार को सिटी मजिस्ट्रेट एपी वाजपेई, एसडीएम परितोष वर्मा और तहसीलदार सचिन कुमार ने मंदिर के महंत कालू गिरी महाराज के साथ हुई वार्ता के बाद आम सहमति बना ली है। दरअसल प्रशासन का कहना है कि कालू सिद्ध मंदिर को बगल में ही शिफ्ट किया जाएगा और 12 मीटर सड़क चौड़ीकरण के साथ यहां पर एक फुटओवर ब्रिज बनाया जाएगा जिसके चलते जल्द ही मंदिर की शिफ्टिंग का कार्य शुरू किया जाएगा। बताया जा रहा है की मंगल पड़ाव से रोडवेज स्टेशन तक सड़क का चौड़ीकरण होना है जिसके तहत यह अहम निर्णय लिया गया है।
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कालू सिद्ध मन्दिर को माना जाता है हल्द्वानी शहर का रक्षक Haldwani Kalu Siddha mandir shift:-

बताते चलें कालू सिद्ध मन्दिर हल्द्वानी शहर का रक्षक माना जाता है तथा मंदिर के भीतर लगा पीपल का पेड़ भी लोगों के लिए आस्था का केंद्र है क्योंकि यहां पर बहुत समय पहले कालु सिद्ध बाबा हल्द्वानी पहुंचे थे जिन्होंने मंदिर परिसर में पीपल के पेड़ के नीचे भगवान शनि की उपस्थिति जानकर एक मठ की स्थापना की थी जो आगे चलकर कालू सिद्ध बाबा मंदिर के रूप में परिवर्तित हो गया। तब से लेकर आज तक यहाँ पर भगवान शनि की दशकों से पुरानी मूर्ति विराजमान है। हालांकि मंदिर में स्थित पेड़ कहां शिफ्ट किया जाएगा इस पर अभी फैसला नही लिया गया है। ऐसा माना जाता है कि उस समय यहां पर गुड और गन्ने का खूब कारोबार हुआ करता था इसलिए जो भी व्यापारी यहां से गुजरता था वो बाबा को प्रसाद के लिए गुड देता था क्योंकि बाबा को गुड काफी पसंद था।

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