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Uttarakhand nainital tiger attack today: kamla fartyal phartyal died in haldwani paniyali kathghariya
फोटो सोशल मीडिया nainital tiger attack today

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UTTARAKHAND GULDAR नैनीताल

Haldwani tiger attack today: नैनीताल घास लेने गई महिला को बाघ ने बनाया निवाला, क्षेत्र में दहशत

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Uttarakhand nainital tiger attack today: kamla fartyal phartyal died in haldwani paniyali kathghariya: उत्तराखंड में मानव-वन्यजीव संघर्ष: घास लेने गई थी कमला लेकिन लौटी नहीं, पनियाली गांव में बाघ के हमले से मातम

Uttarakhand nainital tiger attack today: kamla fartyal phartyal died in haldwani paniyali kathghariya: उत्तराखण्ड के पहाड़ की सुबह अक्सर रोजमर्रा की जिम्मेदारियों से शुरू होती है। पशुओं के लिए घास लाना, जंगल जाना और फिर शाम तक घर लौट आना… लेकिन फतेहपुर रेंज के पनियाली गांव में बुधवार की सुबह एक परिवार के लिए कभी खत्म न होने वाला इंतजार बन गई। जी हां… मानव वन्य जीव संघर्ष की यह दुखद खबर राज्य के नैनीताल जिले के हल्द्वानी से सटे कठघरिया क्षेत्र के पनियाली गांव की है जहां 53 वर्षीय कमला फर्त्याल घास लेने जंगल गईं, लेकिन वापस नहीं लौटीं। कुछ घंटों बाद जंगल के भीतर उनका क्षत-विक्षत शव मिला। शुरुआती जांच में बाघ के हमले की पुष्टि हुई है। इस घटना से जहां मृतका के परिवार में कोहराम मचा हुआ है वहीं पूरे क्षेत्र में भी दहशत के साथ ही मातम पसरा हुआ है।

रोज की तरह गईं, लेकिन घर में छा गया सन्नाटा(Haldwani tiger attack)

परिवार वालों के मुताबिक कमला सुबह करीब नौ बजे दरांती लेकर निकली थीं। गांव की महिलाओं के लिए यह सामान्य दिनचर्या है। दोपहर तक जब वह वापस नहीं आईं तो परिजनों की चिंता बढ़ी। तलाश शुरू हुई और करीब दो किलोमीटर दूर जंगल के भीतर जो दृश्य मिला, उसने पूरे गांव को झकझोर दिया। कमला के घर में अब सन्नाटा है। एक विधवा महिला, जो परिवार की जिम्मेदारियों को संभाल रही थी, अचानक यूं चली जाएगी — किसी ने सोचा भी नहीं था।

वन विभाग पहुंचा, लेकिन सवाल बाकी

सूचना मिलते ही वन विभाग और पुलिस टीम मौके पर पहुंची। शव को कब्जे में लेकर आगे की कार्रवाई शुरू की गई है। अधिकारियों का कहना है कि क्षेत्र में निगरानी बढ़ाई जाएगी और वन्यजीवों की गतिविधियों पर नजर रखी जा रही है। लेकिन गांव वालों का कहना है कि हादसों के बाद टीम तो आती है, मगर उसके बाद ना तो कोई पहल होती है और ना ही कोई ठोस कदम उठाए जाते हैं, जिससे इस तरह की घटनाएं बार-बार देखने को मिल रही है है।

15 दिन में दूसरी दर्दनाक घटना

यह घटना अकेली नहीं है। कुछ दिन पहले ही बीते 12 फरवरी को फतेहपुर रेंज से ही लगे पीपल पोखरा क्षेत्र में घास लेने गई महिलाओं पर भी बाघ ने हमला किया था, जिसमें एक बुजुर्ग महिला गंगा देवी की मौत हो गई थी। लगातार हो रहे हमलों ने ग्रामीणों की जिंदगी को असुरक्षा में बदल दिया है। अब महिलाएं जंगल जाने से डर रही हैं, लेकिन सवाल यह भी है कि चारा और लकड़ी के बिना ग्रामीणों का जीवन कैसे चले?

गांव में डर, बच्चों पर पहरा

पनियाली और आसपास के गांवों में लोग अब अकेले जंगल नहीं जा रहे। बच्चों को घर के बाहर ज्यादा देर खेलने से रोका जा रहा है। शाम ढलते ही दरवाजे बंद हो जाते हैं। ग्रामीणों का कहना है कि जंगल और बस्ती की दूरी अब सिर्फ नक्शे में रह गई है, खतरा सीधे घर तक पहुंच चुका है।

राजनीति भी गरमाई, कार्रवाई की मांग

घटना के बाद स्थानीय जनप्रतिनिधियों ने वन विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि क्षेत्र में बाघ की सक्रियता पहले से बढ़ रही थी, लेकिन समय रहते ठोस कदम नहीं उठाए गए। ग्रामीणों ने गश्त बढ़ाने, ट्रैप कैमरे लगाने और प्रभावित परिवार को जल्द राहत देने की मांग की है।
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