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Uttarakhand News: Fastag account empty again, Transport Corporation had to pay double the toll

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उत्तराखंड: फास्टैग खाता फिर से खाली परिवहन निगम को देना पड़ा दोगुना टोल

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फास्टैग में पैसे ना रहने के चलते चुकाना पड़ा दोगुना टोल कर्मचारियों में आक्रोश

हमेशा से ही चर्चाओं में रहने वाला उत्तराखंड रोडवेज परिवहन निगम एक बार फिर चर्चाओं का कारण बन गया है। फास्टैग खाते में फिर से पैसे ना होने के कारण रोडवेज को करोड़ों का नुकसान झेलना पड़ा जी हां कुछ दिन पहले की बात है जब फास्टैग में पैसे ना होने के कारण परिवहन निगम को लाखों का टोल देना पड़ा था। वही दोबारा से फास्टैग अकाउंट में पैसे खत्म होने के कारण टोल प्लाजा में बसों को दोगुना टोल चुकाना पड़ा।दो सप्ताह में रोडवेज का फास्टैग का खाता दूसरी बार खाली हो गया। इससे रविवार को सुबह से शाम तक बसों ने सभी मार्गों पर दोगुना टोल चुकाया और निगम को लाखों की चपत लग गई। निगम प्रबंधन हर बार की तरह इस बार भी तकनीकी खराबी का झांसा दे रहे है।दो साल पहले टोल प्लाजा पर फास्टैग अनिवार्य होने के बाद रोडवेज मुख्यालय ने अपनी सभी बसों पर फास्टैग लगवा दिए थे।फास्टैग का खाता भी अलग कर दिया गया। एक अधिकारी को सिर्फ इस खाते की देखरेख के लिए नियुक्त किया गया था उसकी जिम्मेदारी थी कि खाता कभी खाली न हो, क्योंकि इससे बसों को दोगुना टोल देना पड़ता है।

प्राप्त जानकारी के अनुसार उत्तराखंड रोडवेज परिवहन निगम करोड़ों के घाटे में चल रहा है,जिसकी वजह अधिकारियों की लापरवाही है। फास्टैग अकाउंट में पैसे ना होने के कारण रोडवेज की बसों को दोगुना टोल चुकाना पड़ा। जिससे परिवहन निगम को लाखों का चुना लग गया। अधिकारियों की इस लापरवाही से कर्मचारी वर्ग में भी बहुत आक्रोश है। उनके अनुसार निगम के पास कर्मचारियों को दिवाली का बोनस एवं वेतन देने के लिए पैसा नहीं है। लेकिन दोगुना टोल भरने के लिए निगम के पास पैसा है।पिछले छह माह में यह चौथी बार है, जब फास्टैग का खाता खाली होने से बसों को दोगुना टोल चुकाना पड़ा। इससे पहले 9 अप्रैल, फिर 27 अक्टूबर और उसके बाद 30 नवंबर को भी यही परेशानी हुई । प्रबंधन ने तकनीकी खराबी को कारण बताकर बात को संभाल लिया था। लेकिन रविवार को फिर से सुबह करीब 10 बजे बसों में टोल के लिए लगाए गए फास्टैग का खाता खाली हो गया।दिल्ली मार्ग पर दौराला मेरठ टोल प्लाजा पर बस का टोल 310 रुपये है, लेकिन उत्तराखंड की रोडवेज बसों ने 620 रुपये टोल दिया। दून-हल्द्वानी मार्ग पर रामपुर में टोल प्लाजा पर 405 रुपये शुल्क है, लेकिन वहां बसों को 810 रुपये टोल देना पड़ा। दून-हरिद्वार मार्ग पर लच्छीवाला टोल प्लाजा एंव हरिद्वार-रुड़की मार्ग पर बहादराबाद के टोल प्लाजा पर भी दोगुना टोल लगा। चालक- परिचालकों की शिकायत के आधार पर रोडवेज प्रबंधन ने फास्टैग अकाउंट में धनराशि डाली। यदि प्रबंधन द्वारा समय पर फास्टैग अकाउंट चेक किया जाता है तो निगम को करोड़ों की चपत नहीं लगती।

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