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Uttarakhand News: Subham Dimri Self Employment in Dehradun

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उत्तराखंड: शुभम बने युवाओं के लिए मिसाल, बीटेक के बाद स्वयं का खोला रोजगार

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इंजीनियरिंग करने के बाद शुभम ने किया देहरादून(Dehradun) में स्वयं का स्वरोजगार(Self Employment) अब हो रही है अच्छी खासी कमाई

उत्तराखंड में बेरोजगारी जहां अपने चरम सीमा पर है वही अनेक युवा ऐसे भी हैं जिन्होंने खुद रोजगार का साधन ढूंढ कर अपनी आजीविका का अवसर खुद तलाशा है। जी हां हम बात कर रहे हैं देहरादून (Dehradun) के शुभम डिमरी की जिन्होंने स्वयं का रोजगार(self Employment) खोलकर अपने साथ-साथ और लोगों को भी रोजगार दिया है। शुभम ने रोजगार की तलाश में भटक रहे लोगों को भी प्रेरित किया है । लॉकडाउन में नौकरी चले जाने के बाद भी शुभम ने हिम्मत नहीं हारी बल्कि खुद का रोजगार खोलकर और लोगों को भी प्रेरित किया है बता दें कि शुभम ने पहाड़ी मसालो हल्दी नमक मिर्च आदि से निर्मित नमकीन का रोजगार खोला है। शुभम ने इसकी पैकिंग और ब्रांडिंग का काम भी स्वयं ही किया है। आज पहाड़ी मसालों से युक्त शुभम की नमकीन का ज़ायका दूर-दूर तक के लोग ले रहे हैं। अब वह अपने काम को और आगे बढ़ाना चाहते हैं, ताकि उनके काम से और भी लोग रोजगार पा सकें।
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प्राप्त जानकारी के अनुसार देहरादून के गुमानीवाला क्षेत्र के शुभम डिमरी जिन्होंने स्वयं का रोजगार खोलकर रोजगार की तलाश में भटक रहे सभी लोगों को प्रेरित किया है बता दें कि शुभम मूल रूप से रुद्रप्रयाग जिले के अगस्त्यमुनि ब्लाक स्थित ग्राम मुन्ना देवल के निवासी है। सात वर्ष पहले इंटर की पढ़ाई के लिए शुभम ऋषिकेश आ गए थे। वर्ष 2018 में ऋषिकेश महाविद्यालय से बीएससी करने के बाद उन्होंने डोईवाला में सेंट्रल इंस्टीट्यूट आफ प्लास्टिक्स इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी से प्लास्टिक इंजीनियरिंग की डिग्री ली। इसके बाद उदयपुर राजस्थान में इंटर्नशिप की ।इसके बाद सिडकुल हरिद्वार स्थित एक कंपनी में पैकिंग का काम कर ही रहे थे कि 2020 मैं लॉकडाउन लगने के कारण उनकी नौकरी छूट गई ।शुभम के पिता दुकानों में सामान सप्लाई करने वाली गाड़ी चलाते हैं। शुभम का कहना है कि नौकरी छूटने के बाद उनके मन में विचार आया कि क्यों ना खुद का काम शुरू किया जाए तब उन्होंने पहाड़ में निर्मित पहाड़ी मसालो से तैयार नमकीन का रोजगार शुरू करने का विचार बनाया।उन्होंने आस-पास के गांव से पहाड़ी हल्दी, मिर्च, धनिया और पुदीना खरीदा और गुमानीवाला में बिना किसी सरकारी मदद के नमकीन बनाने के साथ ही पैकेजिंग का लघु उद्योग शुरू कर दिया।

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