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Uttarakhand news: The names of two sisters Himani Mishr and Shiwani Mishr reached NASA spacecraft sent to Mars

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उत्तराखण्ड नैनीताल

अंतरिक्ष तक हुई उत्तराखण्ड की बेटियों की पहुंच, मंगल ग्रह पर पहुंचे इन दो बहनों के नाम..

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अंतरिक्ष तक हुई उत्तराखण्ड (Uttarakhand) की होनहार बेटियों की पहुंच, नासा (NASA) द्वारा मंगल ग्रह (Mars) पर भेजे अंतरिक्ष यान के साथ पहुंचे नैनीताल जिले में रहने वाली दो बहनों के नाम..

अमेरिका की अंतरिक्ष एजेंसी नासा का अंतरिक्ष यान ‘पर्सावियरेंस रोवर’ मंगल ग्रह की धरती पर उतर चुका है। लाल ग्रह पर इसकी सुरक्षित लैंडिंग ने जहां अंतरिक्ष वैज्ञानिकों को खुश होने का एक सुनहरा अवसर प्रदान किया है वहीं यह खबर देवभूमि उत्तराखंड (Uttarakhand) के लिए भी खुशखबरी लेकर आई है। दरअसल इस यान के साथ ही राज्य की दो होनहार बेटियों के नाम भी लाल ग्रह पर पहुंच गए हैं। जी हां.. हम बात कर रहे हैं कुमाऊं विश्वविद्यालय की छात्रा शिवानी मिश्र व हिमानी मिश्र की, जिनके नाम हमेशा के लिए मंगल ग्रह की धरती पर सुरक्षित रहेंगे। सबसे खास बात तो यह है कि ये दोनों छात्राएं सगी बहनें हैं। नासा (NASA) के इस यान के साथ मंगल ग्रह (Mars) पर अपने नाम पहुंचने की खबर से जहां दोनों बहनें काफी खुश हैं वहीं उनका यह भी कहना है कि हमें विश्वास है कि भारत की अंतरिक्ष एजेंसी इसरो जल्द ही मानवयुक्त यान मंगल पर भेजने में कामयाब होगी और जब ऐसा होगा तो उस पल हमारी खुशी दोगुनी हो जाएगी।
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वर्तमान में हल्द्वानी से पढ़ाई कर रही है दोनों बहनें, भौतिक विज्ञान विषय की है छात्राएं:-

प्राप्त जानकारी के अनुसार अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा का अंतरिक्ष यान ‘पर्सावियरेंस रोवर’ बीते शुक्रवार को मंगल ग्रह पर सुरक्षित पहुंच गया है। बता दें कि नासा ने बीते सितंबर 2019 तक अंतरिक्ष में रुचि रखने वाले लोगों से नाम मागे थे। इस दौरान राज्य के नैनीताल जिले के हल्द्वानी की दो बहनों शिवानी मिश्र व हिमानी मिश्र ने भी अपने नाम नासा को भेजें थे। बताते चलें कि शिवानी मिश्र जहां एमबीपीजी कालेज हल्द्वानी से भौतिक विज्ञान में शोध कर रही हैं वहीं हिमानी मिश्र महिला महाविद्यालय में भौतिक विज्ञान में एमएससी की छात्रा है। इनके पिता डॉ. संतोष मिश्र एमबीपीजी कॉलेज में हिंदी के प्रोफेसर हैं। बताया गया है कि जिन लोगों ने अपने नाम भेजे, उन्हें आनलाइन बोर्डिंग पास भी दिए गए और इन सभी नामों को नासा के वैज्ञानिकों द्वारा एक सिलिकॉन वेफर माइक्रोचिप पर एक इलेक्ट्रॉनिक बीम की मदद से उकेरा गया है। जो हमेशा के लिए मंगल ग्रह पर रहेगी।

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