उत्तराखण्ड देहरादून
Uttarakhand Forest Fire Scheme: उत्तराखंड वनों को आग से बचाओं इनाम पाओ मिलेंगे 30 हजार
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Uttarakhand Forest Fire Scheme: कैबिनेट का फैसला वनाग्नि नियंत्रण के लिए काम करने वाली समितियों को मिलेंगे 30 हजार रुपये, प्रत्येक समिति को बांटे जाएंगे 500-600 हेक्टेयर वन क्षेत्र…..
Uttarakhand Forest Fire Scheme: उत्तराखंड सरकार ने वनों को आग से बचाने के लिए कैबिनेट बैठक में एक महत्वपूर्ण फैसला लिया है जिसके चलते वनाग्नि को नियंत्रित करने के लिए समितियों का चयन किया जाएगा जिन्हे प्रति वर्ष ₹30,000 दिए जाएंगे। दरअसल यह निर्णय वनाग्नि पर काबू पाने और वन क्षेत्र को सुरक्षित रखने के लिए लिया गया है। इतना ही नहीं बल्कि इसके लिए हर समिति को 500 से 600 हेक्टेयर वन क्षेत्र सौंपा जाएगा जिसके तहत वे आग की घटनाओं को रोकने के लिए काम करेंगी। यदि इस बीच किसी भी क्षेत्र में आग लगती है तो समितियों के वेतन में कटौती की जाएगी।
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Uttarakhand Forest Fire news बता दें बीते बुधवार को धामी सरकार ने मंत्रिमंडल की कैबिनेट बैठक आयोजित की थी जिसमें कई सारे महत्वपूर्ण प्रस्तावों पर धामी सरकार ने मुहर लगाई। इसी बीच प्रदेश में जंगल की आग पर नियंत्रण के लिए जन सहभागिता को बढ़ाने के लिए ग्राम पंचायत स्तरीय वनाग्नि सुरक्षा समितियों का गठन किए जाने का फैसला लिया जिसके लिए समितियां 21 प्रभागो में काम करेंगी। इतना ही नहीं बल्कि समितियों को प्रोत्साहन राशि के तौर पर हर वर्ष ₹30,000 दिए जाएंगे जिसके लिए कैबिनेट बैठक में मुहर लग गई है। इसके अलावा वनाग्नि सत्र के दौरान अस्थाई रूप से क्षेत्र आवंटित कर जंगल की आग के नियंत्रण और प्रबंधन की जिम्मेदारी दी जायेगी। जिसमे ग्राम पंचायत, ग्राम पंचायतों के कलस्टर स्तर पर बनने वाली वनाग्नि सुरक्षा प्रबंधन समितियों में ग्राम प्रधान, वन पंचायत सरपंच, महिला व युवक मंगल दलों के प्रतिनिधि के अलावा वन विभाग, राजस्व विभाग के कार्मिकों को शामिल किया जाएगा जिसके लिए प्रत्येक समिति को ₹30, 000 प्रति वर्ष दिए जाएंगे।
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Uttarakhand Forest Fire reward दरअसल यह निर्धारित धनराशि वनाग्निकाल के प्रारम्भ में आधी व वनाग्निकाल के बाद समिति के वनाग्नि नियंत्रण कार्यों के अनुश्रवण, मूल्यांकन के बाद आधी दी जाएगी। यदि वनाग्नि सत्र के दौरान उपलब्ध कराए गए क्षेत्रों में आग लगती है तो प्रभावित क्षेत्र के आंकलन के अनुसार प्रोत्साहन राशि में कटौती की जाएगी। बताते चले प्रत्येक समिति को औसतन 500 से 600 हेक्टेयर वन क्षेत्र आवंटित किया जाएगा जिसमे वनों को आग से बचाना उनकी जिम्मेदारी होगा।
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