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पिथौरागढ़ की यामिनी पांडे की ऐपन कला ने देश-विदेश में बनाई पहचान, विदेशों तक पहुंच रहे हैं उत्पाद
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पिथौरागढ़ की बेटी यामिनी पांडे बना रही हैं Aipan Art को नई पहचान (Pithoragarh Yamini Pandey Aipan Art products Uttarakhand)
||Pithoragarh Yamini Pandey Aipan Art products Uttarakhand| उत्तराखंड की पारंपरिक लोक कला ऐपन (Aipan Art) को देश-विदेश तक पहुंचाने का सराहनीय कार्य पिथौरागढ़ जिले के छाना गांव की रहने वाली यामिनी पांडे कर रही हैं। पिछले नौ वर्षों से वह इस पारंपरिक कला को संरक्षित और प्रचारित करने में जुटी हुई हैं। यामिनी बताती हैं कि ऐपन कला उनके जीवन का हिस्सा बचपन से रही है। उन्होंने यह कला किसी कॉलेज, स्कूल या संस्थान से नहीं सीखी, बल्कि अपनी दादी, नानी, मां और परिवार की अन्य महिलाओं से पारंपरिक रूप से सीखी है।
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संस्कृति और आस्था की पहचान है ऐपन कला (Traditional Folk Art Aipan by Yamini Pandey)
यामिनी पांडे के अनुसार ऐपन उनके लिए केवल एक कला नहीं, बल्कि उत्तराखंड की संस्कृति, परंपरा और आस्था की पहचान है। वह अपनी प्रत्येक कलाकृति के माध्यम से प्रदेश की लोक संस्कृति को लोगों तक पहुंचाने का प्रयास करती हैं। खास बात यह है कि उनके परिवार में वर्तमान समय में ऐपन कला बनाने वाला कोई अन्य सदस्य नहीं है और वह अकेले ही इस विरासत को आगे बढ़ा रही हैं।
देश-विदेश से मिल रहे हैं ऑर्डर (Handmade Aipan Products)
यामिनी की मेहनत और कला का ही परिणाम है कि उत्तराखंड के अलावा दिल्ली, गुरुग्राम, राजस्थान, पुणे, सिलीगुड़ी, कोलकाता और उत्तर प्रदेश समेत देश के विभिन्न हिस्सों से उन्हें लगातार ऑर्डर मिल रहे हैं। इतना ही नहीं, अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया और दुबई जैसे देशों से भी उनकी कलाकृतियों की मांग बढ़ रही है। इसे वह उत्तराखंड की लोक कला के लिए गर्व का विषय मानती हैं।
बच्चों को भी दे रही हैं ऐपन कला की जानकारी (Aipan Art Workshop)
यामिनी पांडे को कई स्कूलों में बच्चों को ऐपन कला की जानकारी देने और करियर काउंसलिंग करने का अवसर भी मिल चुका है। इसके अलावा राजस्थान में आयोजित एक ऐपन प्रतियोगिता में उन्हें निर्णायक (Judge) की भूमिका निभाने का सम्मान भी प्राप्त हुआ, जो उनकी कला और अनुभव का बड़ा प्रमाण माना जा रहा है।
ऐपन से तैयार किए जाते हैं अनेक आकर्षक उत्पाद (Aipan Handicrafts)
यामिनी के यहां ऐपन कला से सजी पूजा थाली, नेम प्लेट, चाय कोस्टर, दीवार पर लगाने वाली ऐपन घड़ी, तांबे की गगरी, तोला, ऐपन चौकी, जनेऊ चौकी, पारंपरिक सांस्कृतिक चौकियां, कप सेट, कॉफी सेट, साड़ी, कुशन कवर, दुपट्टा, बेडशीट समेत कई सुंदर हस्तनिर्मित उत्पाद तैयार किए जाते हैं। उनकी कलाकृतियों में उत्तराखंड की संस्कृति और परंपराओं की झलक स्पष्ट दिखाई देती है।
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लोक कला को मिल रही नई उड़ान (Uttarakhand Culture News)
यामिनी पांडे का कहना है कि उनका उद्देश्य ऐपन कला को अधिक से अधिक लोगों तक पहुंचाना और नई पीढ़ी को अपनी सांस्कृतिक विरासत से जोड़ना है। उनकी यह पहल न केवल उत्तराखंड की पारंपरिक लोक कला को नई पहचान दे रही है, बल्कि प्रदेश की सांस्कृतिक विरासत को देश-विदेश तक पहुंचाने का भी महत्वपूर्ण कार्य कर रही है।
