उत्तराखण्ड देहरादून
उत्तराखंड की मेजर प्रिया सेमवाल एक बड़े अभियान के लिए उतरी उफनती समुंद्र की लहरों के बीच
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Major Priya Semwal: मेजर प्रिया इसके पहले भी रह चुकी है पश्चिम बंगाल के हल्दिया से पोरबंदर, गुजरात के बीच आर्मी सेलिंग एक्सपीडिशन का हिस्सा…
भारतीय सेना व सशस्त्र बलों में महिलाओं का योगदान एक लंबे समय से रहा है। नारी शक्ति अपनी क्षमता को इस क्षेत्र में सिद्ध कर चुकी है। यदि हम बात करें उत्तराखंड की महिलाओं की तो भारतीय सेना में उनकी भी एक अलग भूमिका रही है। उत्तराखंड की बेटियां मां भारती की रक्षा के लिए तत्पर रहती हैं। आज हम ऐसी ही एक वीरांगना बेटी से आपको रूबरू कराने जा रहे हैं जिसको उसके साहस एवं हिम्मत के लिए राज्य सरकार द्वारा तीलू रौतेली सम्मान से भी सम्मानित किया गया है। हम बात कर रहे हैं राज्य की देहरादून निवासी मेजर प्रिया सेमवाल की जी हां… प्रिया सेमवाल जो चेन्नई से विशाखापट्टनम के बीच,थल सेना की महिला अधिकारियों के पहले नौकायान अभियान का हिस्सा बनी है। बता दें कि समुद्र की उफनती लहरों के बीच लगभग 44 फीट की एक नौका पर दस महिला अधिकारी इस अभियान को अंजाम दे रही हैं।बताते चले कि नाटिकल मील के इस अभियान का मकसद महिला सशक्तीकरण की भावना को प्रोत्साहित करना है। मेजर प्रिया सेमवाल का यह मानना है कि इस अभियान के द्वारा लड़कियों को सेना में शामिल होने और देश सेवा के लिए प्रेरित किया जाएगा।
(Major Priya Semwal)
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प्राप्त जानकारी के अनुसार राज्य के देहरादून जिले के धोरण गांव निवासी मेजर प्रिया सेमवाल (Major Priya Semwal) के पति नायक अमित शर्मा 20 जून 2012 को अरुणाचल प्रदेश में सेना के एक ऑपरेशन आर्किड में शहीद हो गए थे। बता दें कि पति के शहीद होने के बाद भी प्रिया ने अपना हौसला नहीं खोया और सेना में शामिल होने का फैसला लिया। मार्च 2014 को प्रिया सेमवाल आफिसर्स ट्रेनिंग ऐकेडमी (ओटीए) चेन्नई से बतौर लेफ्टिनेंट बनकर पासआउट हुईं। प्रिया को कई स्तर पर सम्मानित भी किया जा चुका है। प्रिया के भाई प्रवेश सेमवाल का मानना है कि ऐसी वीरांगनाओं को राज्य सरकार द्वारा एक रोल माडल के रूप में पेश करना चाहिए। बताते चलें कि मेजर प्रिया इसके पहले भी पश्चिम बंगाल के हल्दिया से पोरबंदर, गुजरात के बीच आर्मी सेलिंग एक्सपीडिशन का हिस्सा रह चुकी हैं। उस समय 50 सदस्यीय दल ने 45 दिन में समुद्र पर 3500 नाटिकल मील का सफर तय किया था। परंतु इस बार अभियान में केवल महिला अधिकारी ही शामिल हैं।
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