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उत्तराखण्ड विशेष तथ्य

अटल बिहारी वाजपेयी ने उत्तराखण्ड के इस स्थान को मानसरोवर यात्रा का प्रवेश द्वार कहा था





पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के निधन से शोक में डूबा है उत्‍तराखंड आखिर ऐसा हो भी क्यों ना देवभूमि उत्तराखण्ड उन्ही के शासन काल की देन है जिसमे उनकी अहाम भूमिका रही थी। अटल बिहारी वाजपेयी को पहाड़ो और हिमालयी क्षेत्रों से बहुत प्रेम था जिसका उल्लेख उनकी कविताओं में मिलता है। बता दे की प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की यादें चम्पावत जिले की टनकपुर से भी जुड़ी हैं। वर्ष 1981 में जब पिथौरागढ़ जाते वक्त पूर्व प्रधानमंत्री टनकपुर में रुके तो यहाँ बढ़ती हुई भीड़ को रोकने के लिए उन्होंने एक जनसभा भी की जिसमे उन्होंने जनता को सम्बोधित किया था




यह भी पढ़े-उत्तराखण्ड भ्रमण में इस जिले की खूबसूरती से हुए थे अभिभूत और बोले स्विट्ज़रलैंड सा होता है प्रतीत
टनकपुर को मानसरोवर यात्रा का प्रवेश द्वार बताया – 10 नवंबर 1981 को सड़क मार्ग से चंपावत और लोहाघाट पहुंचे। अटल बिहारी वाजपेयी ने टनकपुर को मानसरोवर यात्रा का प्रवेश द्वार बताते हुए मां पूर्णागिरि धाम के विकास पर जोर दिया था। वे पिथौरागढ़ जाने के लिए कार से 9 नवंबर को टनकपुर आए थे। उन्होंने एक रात यहां सिंचाई विभाग के विश्राम गृह में गुजारी थी। दोनों जगहों पर जनसभाएं हुई, मगर उनकी लोहाघाट के पास मायावती अद्वैत आश्रम के दर्शन करने की हसरत अधूरी रही।
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