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Deepa kuniyal poems
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कुमाऊंनी कविता- “- पहाड़ छुटी गो…” दीपा कुनियाल (काव्य संकलन देवभूमि दर्शन)

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कुमाऊंनी कविता- पहाड़ छुटी गो…Deepa kuniyal poem

सांस में बसी हमर पहाड़ छुटी गो,
दिल में बांधी एक तार टूटी गो।।
के भलो देखी गधेरो को पाणी, हावक सरसराट, बादलो मे बनी चित्र देखीं छि।।
रात्ति, दिन, ब्यव जब देखो फूल हरी – भरी चारो तरफ़ बे हमर पहाड़ घिरी छी।।
खाण मे खुबे स्वाद छी,
खटाई दाव और भात छी।।
सबुके दगै बैठछी
हंसी – मज़ाक खुब चलछि।।
” टैम दगै सब बदलिगो ”
लोग भलक कोशिश में पहाड़ छोड़ी गो,
लोग भलक कोशिश में पहाड़ छोड़ी गो।।
रचना- दीपा कुनियाल, सिरकोट, हविल कुलवान, जिला – बागेश्वर (उत्तराखण्ड)
Deepa kuniyal poem

यह भी पढ़ें- गढ़वाली कविता- “मेरु स्वर्ग सी पहाड़……” पूजा नेगी (काव्य संकलन देवभूमि दर्शन)

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