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Harish Rana latest news दिल्ली एम्स में हरीश राणा का निधन, देश में पहली बार किसी को मिली इच्छामृत्यु
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Harish Rana latest news: gajiyabad youth died death passes away at Delhi AIIMS, first euthanasia granted in india: 13 साल की लंबी जंग के बाद थमा जीवन: इच्छामृत्यु प्रक्रिया के तहत हरीश राणा का निधन, पीछे छोड़ गए कई सवाल
Harish Rana latest news: gajiyabad youth died death passes away at Delhi AIIMS, first euthanasia granted in india: कभी इंजीनियर बनने का सपना देखने वाला एक युवा… 13 साल तक बिस्तर पर जिंदगी और मौत के बीच झूलता रहा, और अंततः उसने एक ऐसे रास्ते से विदाई ली, जिस पर देश में अक्सर बहस होती है—इच्छामृत्यु।
13 साल की पीड़ा का अंत
गाजियाबाद निवासी हरीश राणा का मंगलवार को दिल्ली के एम्स में निधन हो गया। वह पिछले 13 वर्षों से कोमा में थे और जीवन पूरी तरह मशीनों और देखभाल पर निर्भर हो चुका था। उनकी स्थिति ऐसी थी, जहां शरीर साथ छोड़ चुका था, लेकिन सांसें किसी तरह चल रही थीं।
सुप्रीम कोर्ट की अनुमति के बाद शुरू हुई प्रक्रिया
11 मार्च 2026 को सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी। इसके बाद उन्हें 14 मार्च को एम्स के पैलिएटिव केयर वार्ड में भर्ती कराया गया। डॉक्टरों की निगरानी में 16 मार्च से प्रक्रिया शुरू हुई। पहले चरण में पोषण देने की व्यवस्था रोकी गई, फिर पानी देना भी बंद कर दिया गया। यह सब चिकित्सा मानकों के तहत बेहद सावधानी से किया गया।
हर पल पर नजर, लेकिन चमत्कार नहीं हुआ
पूरी प्रक्रिया के दौरान डॉक्टरों की टीम लगातार उनकी स्थिति पर नजर बनाए रही। परिवार के लोग उम्मीद और हकीकत के बीच झूलते रहे। अस्पताल के गलियारे में बैठी और हनुमान चालीसा का पाठ करती मां की आंखों में एक ही सवाल था—क्या कोई चमत्कार होगा? लेकिन समय के साथ उम्मीदें भी धीरे-धीरे थम गईं।
एक हादसे ने बदल दी पूरी जिंदगी
साल 2013 में रक्षाबंधन के दिन एक हादसे ने हरीश की जिंदगी पूरी तरह बदल दी। चौथी मंजिल से गिरने के बाद वह गंभीर रूप से घायल हुए और बाद में क्वाड्रिप्लेजिया की स्थिति में पहुंच गए। इसके बाद उनका जीवन पूरी तरह बिस्तर तक सीमित हो गया।
परिवार की पीड़ा और कठिन फैसला
लंबे समय तक असहनीय स्थिति में बेटे को देखते हुए परिवार ने अदालत का दरवाजा खटखटाया। हाईकोर्ट से निराशा मिलने के बाद सुप्रीम कोर्ट ने अंततः अनुमति दी। यह फैसला आसान नहीं था—यह एक ऐसे माता-पिता का निर्णय था, जो अपने बेटे को दर्द से मुक्ति दिलाना चाहते थे।
अंगदान से दूसरों को मिलेगी जिंदगी
हरीश राणा के निधन के बाद उनके अंगदान का निर्णय भी लिया गया, जिससे कई अन्य लोगों को जीवन मिलने की उम्मीद है।
बेशक हरीश राणा चले गए…
लेकिन पीछे छोड़ गए एक ऐसी कहानी, जो लंबे समय तक लोगों के दिल और दिमाग में गूंजती रहेगी।
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