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Prashant Chaurasia Martyr Captain: in vikasnagar Dehradun army traning after saving the life of his colleague gajipur up.
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Prashant chaurasia Martyr captain: देहरादून साथी की बचाई जान खुद शहीद हो गए कैप्टन प्रशांत

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Prashant Chaurasia Martyr Captain: in vikasnagar Dehradun army traning after saving the life of his colleague gajipur up: साथी को बचाते हुए खुद बह गया जांबाज़: देहरादून में नदी में कूदकर कैप्टन प्रशांत चौरसिया शहीद

Prashant Chaurasia Martyr Captain: in vikasnagar Dehradun army traning after saving the life of his colleague gajipur up: कभी-कभी एक पल का फैसला पूरी जिंदगी की कहानी बन जाता है… और उसी पल में कोई सैनिक अपने कर्तव्य को निभाते हुए इतिहास लिख जाता है। उत्तराखण्ड के देहरादून जिले में हुए एक सैन्य अभ्यास के दौरान ऐसा ही एक साहसिक और भावुक कर देने वाला वाकया सामने आया, जहां एक युवा कैप्टन ने अपने साथी की जान बचाने के लिए खुद को न्यौछावर कर दिया।

अभ्यास के दौरान हादसा, बहने लगे जवान

प्राप्त जानकारी के अनुसार भैरव बटालियन की घातक प्लाटून प्रतियोगिता के दौरान देहरादून के विकासनगर क्षेत्र में आसन नदी पार करने का अभ्यास चल रहा था। इसी दौरान कुछ जवान तेज बहाव में फंसकर डूबने लगे। स्थिति की गंभीरता को समझते हुए कैप्टन प्रशांत चौरसिया बिना एक पल गंवाए पानी में कूद पड़े। उनका उद्देश्य सिर्फ एक था—साथी को सुरक्षित बाहर निकालना।

बचा ली जान, लेकिन खुद नहीं लौट पाए

कैप्टन प्रशांत ने डूब रहे जवान को बचा लिया, लेकिन इसी दौरान वह खुद पानी के अंदर पत्थर से टकरा गए। गंभीर चोट लगने के बाद उन्हें तुरंत मिलिट्री अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने हर संभव प्रयास किया, लेकिन अंततः वह जिंदगी की जंग हार गए।

एक बेटे का बलिदान, परिवार का टूटना

आपको बता दें कि 24 वर्षीय कैप्टन प्रशांत चौरसिया मूल रूप से उत्तर प्रदेश के गाजीपुर जिले के जमानियां कस्बे के रहने वाले थे। घर में वह मंझले बेटे थे। बड़ी बहन की हाल ही में शादी हुई थी और छोटा भाई अभी भविष्य की तैयारी में जुटा है। वर्तमान में वह भारतीय सेना की भैरव बटालियन में देहरादून में तैनात थे। जैसे ही उनके शहीद होने की खबर घर पहुंची, मां सुमन देवी बेसुध हो गईं। पिता पुरुषोत्तम चौरसिया की आंखों में दर्द साफ झलक रहा था। घर का माहौल शोक में डूब गया।

तिरंगे में लिपटकर लौटा वीर सपूत

कैप्टन का पार्थिव शरीर बीते सोमवार को देहरादून से वायुसेना के विशेष विमान से वाराणसी लाया गया, जहां सैन्य अधिकारियों ने उन्हें सलामी दी। इसके बाद जब उनका पार्थिव शरीर उनके गांव पहुंचा तो हर आंख नम थी। गांव की गलियों में जब तिरंगे में लिपटा बेटा पहुंचा, तो लोगों ने फूल बरसाकर उसे अंतिम विदाई दी। हर ओर सिर्फ एक ही आवाज गूंजायमान थी—”शहीद प्रशांत अमर रहे”।

सैन्य सम्मान के साथ अंतिम विदाई

शाम को पक्का बलुआ घाट पर पूरे सैन्य सम्मान के साथ उनका अंतिम संस्कार किया गया। छोटे भाई मयंक चौरसिया ने शहीद की चिता को मुखाग्नि दी, जबकि प्रशासनिक अधिकारी और जनप्रतिनिधि भी श्रद्धांजलि देने पहुंचे।

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