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देहरादून की अनामिका कंडवाल की खूबसूरत हस्तशिल्प कला बनातीं हैं एक से बढ़कर एक उत्पाद
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Uttarakhand handcraft product self-employment: हस्तशिल्प कला के जरिए देहरादून की अनामिका कंडवाल कर रही विभिन्न उत्पादों का निर्माण, 3 वर्षों से कर रही इस क्षेत्र में कार्य..
Anamika kandwal of Kotdwar pauri garhwal make handcraft product self-employment dehradun uttarakhand news live: उत्तराखंड की कई सारी बेटियां आज न सिर्फ ऐपण और पिरूल से हस्तशिल्प कला उत्पादों का निर्माण कर रही है। बल्कि वे अब बुनाई कर हस्तशिल्प कला से उत्पाद बना रही है। हम आए दिन आपको ऐसी ही होनहार बेटियों से रूबरू करवाते रहते हैं ,जिन्होंने किसी विशेष क्षेत्र में अपनी मेहनत के बलबूते पर अपनी विशिष्ट पहचान बनाई हो। आज हम आपको राजधानी देहरादून की अनामिका कंडवाल से रूबरू करवाने वाले हैं जो हस्तशिल्प कला के जरिए विभिन्न उत्पादों का निर्माण कर रही है। ऐपण और पिरूल हस्तशिल्प कला उत्पादों के बाद अब बुनाई से बने हस्तशिल्प कला उत्पादों की डिमांड भी बढ़ रही है।
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देवभूमि दर्शन से खास बातचीत में अनामिका कंडवाल ने बताया कि वह वर्तमान में राजधानी देहरादून की रहने वाली है। जिनकी मूल शिक्षा पौड़ी जिले के कोटद्वार से हुई है। अनामिका बताती है कि उन्होंने बीकॉम स्नैटोग्राफी कंप्यूटर से डिप्लोमा किया है। इसके साथ ही अनामिका बुनाई कर हस्तशिल्प कला का बेहद शौक रखती है, जिन्होंने हस्त शिल्प कला का प्रशिक्षण यूट्यूब से ऑनलाइन लिया है। इतना ही नहीं बल्कि अनामिका अपनी इस कला के जरिए macrame हैंड बैग, वॉल हैंगिंग, की- चेन प्लांट हैंगिंग, मिरर जैसे उत्पाद बनाती हैं।
अनामिका पिछले तीन वर्षो से कर रही हस्तशिप कला के क्षेत्र मे कार्य
अनामिका ने जानकारी देते हुए बताया कि वह पिछले तीन वर्षों बुनाई से बने उत्पादों का निर्माण कर रही है। अनामिका हस्तशिल्प कला के क्षेत्र में कुछ इस कदर काबिल होना चाहती है कि वह इस क्षेत्र में अन्य महिलाओं को भी रोजगार दें सकें। हालांकि अनामिका के घरवाले उन्हें बुनाई से बने हस्तशिल्प कला के उत्पाद को बढ़ावा नही देते है। उनका मानना है कि लड़की बिजनेस नहीं कर सकती है इसलिए अनामिका ने ठानी है कि वह इस क्षेत्र में काबिलियत हासिल करके रहेंगी जिसके लिए वो पूरा प्रयास कर रही है।
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