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उत्तराखण्ड Uttarakhand Martyr

उतराखण्ड: पंचतत्व में विलीन हुए शहीद देव बहादुर सैन्य सम्मान के साथ हुई अन्त्येष्टि

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Martyred dev bahadur thapa: शहीद देव बहादुर की सैन्य सम्मान के साथ हुई अन्त्येष्टि हर आंख हुई नम

चीन सीमा पर लद्दाख की ऊंची पहाड़ियों में अपना सर्वोच्च बलिदान करने वाले मां भारती के वीर सपूत शहीद देव बहादुर (Martyred dev bahadur thapa) आज पंचतत्व में विलीन हो गए। उनका अंतिम संस्कार आज पूरे सैन्य सम्मान के साथ स्थानीय मुक्तिधाम में किया गया। अंत्येष्टि से पहले क्षेत्र के विधायक राजेश शुक्ला, कैबिनेट मंत्री यशपाल आर्या के साथ-साथ प्रशासन के तमाम अधिकारियों ने शहीद देव को अंतिम श्रृद्धांजलि अर्पित की। बता दें कि आज सुबह जैसे ही सेना के जवान शहीद देव का पार्थिव शरीर लेकर जैसे ही लालपुर पहुंचे तो पूरे क्षेत्र में शोक की लहर दौड़ पड़ी। पहले से मौजूद युवा बाईकों पर तिरंगा लिए पार्थिव शरीर के पीछे-पीछे चलने लगे। इस विशाल जनसमूह को जिसने भी देखा उसकी आंखों से आंसू छलक आए। इस दौरान जब तक सूरज चांद रहेगा, देव बहादुर तुम्हारा नाम रहेगा, भारत माता की जय जैसे गगनभेदी नारों से पूरा क्षेत्र गुंजायमान रहा। विशाल जनसैलाब के साथ जैसे ही शहीद देव का पार्थिव शरीर घर पहुंचा तो तिरंगे में लिपटे बेटे के शव को देखकर परिजनों की आंखों से अश्रुओं की धारा बहने लगी। माहौल इतना गमहीन हो गया कि वहां मौजूद हजारों लोगो की आंखों से आंसू बहने लगे।
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गौरतलब है कि 18 जुलाई की रात को गश्त के दौरान किच्छा निवासी जवान देव बहादुर का पैर जमीन पर बिछी डायनामाइट पर पड़ गया जिससे इस धमाके में वे शहीद हो गए। उनकी शहादत की खबर परिवार को शनिवार रात करीब 11 बजे मिली। लद्दाख में तैनात रहे देव बहादुर की बात घर पर शुक्रवार को हुई थी। उन्होंने बताया कि वह पेट्रोलिंग पर जा रहे हैं, लौटकर वह आएंगे तब बात करेंगे। लेकिन उनके शहादत की खबर ही आई। शहीद सैनिक के भाई किशन बहादुर भी सेना में ग्वालियर में पोस्टेड हैं। बता दें कि शहीद जवान देव बहादुर 2016 में भारतीय सेना के 6/1 गोरखा रेजिमेंट के बैच में भर्ती हुए थे।

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