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Image : सांकेतिक फोटो ( Uttarakhand voter list news)

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Uttarakhand voter list news: नेपाल से उत्तराखंड की बहू बनकर आई महिलाएं नहीं दे सकेंगी वोट

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Uttarakhand voter list news: Uttarakhand voter list news uttarakhand SIR voter list 2026 Nepal Brides in India नेपाल से विवाह कर आईं महिलाओं पर एसआईआर का असर, मतदाता सूची में नाम दर्ज कराने पर खड़ा हुआ संकट

Uttarakhand voter list news: Women who came from Nepal bahu Uttarakhand daughters-in-law voter list sir uttarakhand breaking news today: उत्तराखण्ड में विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) प्रक्रिया शुरू होने से नेपाल से विवाह कर भारत आईं महिलाओं की चिंता बढ़ गई है। वर्षों से भारतीय परिवारों का हिस्सा बन चुकीं अनेक नेपाली मूल की विवाहिता महिलाएं अब मतदाता सूची में नाम दर्ज कराने से वंचित रह सकती हैं। इसके पीछे सबसे बड़ा कारण भारतीय नागरिकता और आवश्यक दस्तावेजों का अभाव बताया जा रहा है। इस मुद्दे ने राज्य के सीमांत क्षेत्रों खासतौर पर नेपाल के सीमावर्ती इलाकों में सामाजिक और प्रशासनिक स्तर पर नई चर्चा को जन्म दे दिया है, क्योंकि भारत और नेपाल के बीच दशकों पुराने रोटी-बेटी के संबंधों के कारण बड़ी संख्या में ऐसे परिवार हैं जिनका जीवन दोनों देशों के सामाजिक रिश्तों से जुड़ा हुआ है।

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( Uttarakhand Voter List Issue uttarakhand border Voter List Verification

एसआईआर के तहत मतदाता सूची के पुनरीक्षण की प्रक्रिया में केवल उन्हीं लोगों के नाम शामिल किए जा रहे हैं जो निर्धारित दस्तावेज और पात्रता की शर्तें पूरी करते हैं। ऐसे में नेपाल से विवाह कर आईं कई महिलाओं का नाम मतदाता सूची में शामिल होने की संभावना कम दिखाई दे रही है। सीमांत पिथौरागढ़ के स्थानीय लोगों का कहना है कि शादी के बाद ये महिलाएं पूरी तरह भारतीय परिवारों का हिस्सा बन चुकी हैं, लेकिन नागरिकता संबंधी प्रक्रियाएं पूरी न होने के कारण उन्हें कई सरकारी सुविधाओं और अधिकारों से वंचित रहना पड़ रहा है।

(India Nepal Relationship Indian Citizenship Rules)

पिथौरागढ़ सहित उत्तराखंड के सीमावर्ती क्षेत्रों में भारत और नेपाल के बीच लंबे समय से सामाजिक और पारिवारिक रिश्ते रहे हैं। यहां दोनों देशों के लोगो के बीच रोटी बेटी का रिश्ता आम है। दोनों देशों के नागरिकों के बीच विवाह कोई नई बात नहीं है। वर्तमान समय में भी जिले के अनेक परिवारों में नेपाल की बहुएं रह रही हैं। स्थानीय समाज का कहना है कि वर्षों से यहां रह रही महिलाओं को पहचान और दस्तावेजों से जुड़ी समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। अब मतदाता सूची के पुनरीक्षण ने उनकी चिंताओं को और बढ़ा दिया है।

(Nepal Bahu Voter List Delegation Meets Administration)

इस मुद्दे को लेकर विभिन्न सामाजिक संगठनों और स्थानीय लोगों ने प्रशासन का ध्यान भी आकर्षित किया है। व्यापारी नेता दीपक जोशी के नेतृत्व में एक प्रतिनिधिमंडल ने जिला प्रशासन से मुलाकात कर मामले का समाधान निकालने की मांग उठाई।प्रतिनिधिमंडल का कहना था कि नेपाल से विवाह कर आई महिलाओं का न तो आधार कार्ड बन पा रहा है और न ही कई अन्य आवश्यक दस्तावेज। ऐसे में उनके लिए मतदाता सूची में नाम दर्ज कराना लगभग असंभव हो गया है।

(Pithoragarh News Today
SIR Voter Verification Citizenship Concern)

स्थानीय लोगों का दावा है कि जिले में लगभग डेढ़ हजार से अधिक नेपाली मूल की विवाहिता महिलाएं इस स्थिति से प्रभावित हो सकती हैं। यदि नागरिकता और दस्तावेजों की समस्या का समाधान नहीं हुआ तो वे आगामी चुनावों में मतदान के अधिकार से वंचित रह जाएंगी। लोगों ने केंद्र सरकार और संबंधित विभागों से इस विषय पर स्पष्ट नीति बनाने तथा वर्षों से भारत में रह रही महिलाओं के लिए व्यावहारिक समाधान निकालने की मांग की है।

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(Nepal India Marriage News Nepali Women Citizenship Administration Response)

प्रशासन का कहना है कि मतदाता सूची में नाम दर्ज करने की प्रक्रिया सरकार द्वारा जारी दिशा-निर्देशों के अनुसार ही संचालित की जाएगी। अपर जिलाधिकारी योगेंद्र सिंह के अनुसार वर्तमान नियमों के तहत भारतीय नागरिकता प्राप्त किए बिना किसी भी नेपाली मूल की महिला का नाम मतदाता सूची में शामिल नहीं किया जा सकता। उन्होंने स्पष्ट किया कि भविष्य में यदि सरकार इस संबंध में कोई नया दिशा-निर्देश जारी करती है तो उसी के अनुरूप निर्णय लिया जाएगा।

(Special Intensive Revision voter list Uttarakhand latest news Border District Challenge Voting Rights in India)

सीमावर्ती क्षेत्रों में यह केवल मतदान का मुद्दा नहीं है, बल्कि पहचान और अधिकारों से जुड़ा एक व्यापक सामाजिक प्रश्न बनता जा रहा है। वर्षों से भारतीय परिवारों में जीवन बिता रही अनेक महिलाएं आज भी आधिकारिक दस्तावेजों के अभाव में कई सुविधाओं से दूर हैं। फिलहाल निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि सरकार और प्रशासन इस संवेदनशील विषय पर आगे क्या रुख अपनाते हैं। यदि कोई ठोस समाधान नहीं निकला तो आने वाले समय में बड़ी संख्या में नेपाली मूल की विवाहिता महिलाएं लोकतांत्रिक प्रक्रिया में भागीदारी से वंचित रह सकती हैं।

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