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Uttarakhand's Vandana katariya created history in Olympics, scored a hat-trick against South Africa

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उत्तराखंड की वंदना ने ओलंपिक में रचा इतिहास, दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ लगा दी हैट्रिक

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वंदना कटारिया (Vandana Katariya) ने टोक्यो ओलम्पिक (Olympics) में रचा इतिहास, साउथ अफ्रीका के खिलाफ हैट्रिक लगाकर 4-3 से भारत की झोली में डाला मैच..

उत्तराखण्ड की होनहार युवा प्रतिभाएं आज किसी भी क्षेत्र में पीछे नहीं है, राज्य के युवाओं ने अपनी काबिलियत के दम पर न केवल ऊंचे-ऊंचे मुकाम हासिल किए हैं बल्कि क‌ई बार अपनी इसी काबिलियत के दम पर समूचे उत्तराखंड को गौरवान्वित भी किया है। ऐसी ही एक खबर आज टोक्यो में हो रहे ओलंपिक से आ रही है जहां राज्य की एक बेटी ने दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ करो या मरो के हाकी मैच में एक के बाद एक तीन गोल दाग कर न केवल हैट्रिक लगाई बल्कि अपने शानदार प्रदर्शन से टीम को 4-3 से जीत दिलाकर समूचे देश का मान भी बढ़ाया है। जी हां.. हम बात कर रहे हैं राज्य के हरिद्वार जिले की रहने वाली वंदना कटारिया (Vandana Katariya) की, जिन्होंने अपने शानदार प्रदर्शन के बलबूते इतिहास के पन्नों में अपना नाम स्वर्णिम अक्षरों से दर्ज करा लिया है। सबसे खास बात तो यह है कि ओलम्पिक (Olympics) में हैट्रिक लगाने वाली वंदना देश की पहली महिला खिलाड़ी हैं। वंदना की इस अभूतपूर्व उपलब्धि से जहां उनके परिवार में हर्षोल्लास का माहौल है वहीं समूचे उत्तराखंड के साथ ही पूरे देश में भी खुशी की लहर है। इसका अनुमान हाकी इंडिया द्वारा वंदना के लिए किए गए बधाईपूर्ण ट्वीट से आसानी से लगाया जा सकता है।
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प्राप्त जानकारी के अनुसार राज्य के हरिद्वार जिले के रोशनाबाद निवासी वंदना कटारिया ने टोक्यो में चल रहे ओलंपिक में शानदार प्रदर्शन किया है। बता दें कि उनके पिता नाहर सिंह ने हरिद्वार भेल से सेवानिवृत्त होने के बाद रोशनाबाद में दूध का व्यवसाय शुरू किया था। उनकी छत्रछाया में ही वंदना ने हाकी के क्षेत्र में अपने कदम बढ़ाए। माता-पिता के सहयोग से आने वाली हर मुश्किल का सामना डटकर किया। यहां तक कि पिता की मौत के बाद भी वह उनके अंतिम संस्कार में शामिल ना होकर बंगलुरू में टोक्यो ओलम्पिक की तैयारियों में जुटी रही। यही कारण है कि वंदना कटारिया ने दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ हुए मैच में शानदार प्रदर्शन कर न केवल अपने माता-पिता के सपनों को साकार किया है बल्कि अपने दिवंगत पिता को सच्ची श्रद्धांजलि भी दी है। बताते चलें कि बीते 30 म‌ई को दिवंगत हुए वंदना के पिता का सपना था कि बेटी ओलंपिक में स्वर्ण पदक विजेता टीम का हिस्सा बनें और पिता के इसी सपने को साकार करने में वंदना इस समय जुटी हुई है।

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