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Uttarkashi News: यमुनोत्री धाम स्यानाचट्टी में फिर मंडराया कृत्रिम झील बनने का खतरा
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|Uttarkashi News Today Yamunotri News Today: Rising Yamuna River Sparks Fresh Artificial Lake Fears at Syanachatti|यमुनोत्री धाम के प्रमुख पड़ाव स्यानाचट्टी पर फिर मंडराया खतरा, बढ़ते जलस्तर से कृत्रिम झील बनने की आशंका
|Uttarkashi News Today Yamunotri News Today: Rising Yamuna River Sparks Fresh Artificial Lake Fears at Syanachatti| उत्तराखंड में मानसून की सक्रियता बढ़ते ही यमुनोत्री धाम के प्रमुख पड़ाव स्यानाचट्टी में एक बार फिर संभावित आपदा की चिंता गहराने लगी है। लगातार हो रही बारिश के कारण यमुना नदी का जलस्तर तेजी से बढ़ रहा है, जिससे नदी किनारे स्थित होटल, होमस्टे और कई आवासीय भवनों के भूतल तक पानी पहुंच गया है। हालात को देखते हुए स्थानीय लोगों और कारोबारियों में दहशत का माहौल है। उनका कहना है कि यदि अगले कुछ दिनों तक बारिश इसी तरह जारी रही तो पिछले वर्ष जैसी भयावह स्थिति दोबारा सामने आ सकती है।
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पिछले साल बनी थी कृत्रिम झील, सैकड़ों लोगों को करना पड़ा था सुरक्षित स्थान पर शिफ्ट (Uttarkashi Artificial Lake Risk)
स्यानाचट्टी वही संवेदनशील क्षेत्र है, जहां पिछले वर्ष गढ़गाड़ (कुपड़ा गाड़) से भारी मात्रा में मलबा और विशाल बोल्डर यमुना नदी में आने से नदी का प्राकृतिक प्रवाह पूरी तरह बाधित हो गया था। इसके चलते नदी पर कृत्रिम झील बन गई थी, जिसने आसपास के होटल, मकान, जीएमवीएन परिसर, पुलिस चौकी और मोटर पुल तक को अपनी चपेट में ले लिया था। हालात इतने गंभीर हो गए थे कि प्रशासन को 300 से अधिक लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाना पड़ा था।
कई दिनों तक चला राहत अभियान (Disaster Management)
पिछले वर्ष आई इस आपदा के बाद सिंचाई विभाग, एनडीआरएफ, एसडीआरएफ और अन्य संबंधित एजेंसियों ने कई दिनों तक लगातार अभियान चलाकर नदी का प्राकृतिक प्रवाह बहाल किया था। भारी मशीनों की मदद से मलबा हटाया गया, जिसके बाद स्थिति सामान्य हो सकी थी।
स्थानीय लोगों ने उठाए सुरक्षा कार्यों पर सवाल (River Channelization)
स्थानीय निवासियों का आरोप है कि पिछले साल की आपदा के बाद नदी में जमा मलबा (आरबीएम) पूरी तरह नहीं हटाया गया। साथ ही नदी की स्थायी चैनलाइजेशन और तट सुरक्षा से जुड़े कार्य भी समय पर पूरे नहीं किए गए। उनका कहना है कि यदि समय रहते प्रभावी कदम उठाए गए होते तो आज दोबारा इस तरह का खतरा उत्पन्न नहीं होता।
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विशेषज्ञों ने पहले ही दी थी चेतावनी (Monsoon Alert Uttarakhand)
विशेषज्ञों ने पहले ही आगाह किया था कि गढ़गाड़ क्षेत्र से लगातार आने वाला मलबा भविष्य में भी यमुना नदी के प्रवाह को रोक सकता है, जिससे कृत्रिम झील बनने जैसी स्थिति फिर पैदा हो सकती है। उन्होंने नियमित रूप से मलबा हटाने, नदी की निगरानी बढ़ाने और सुरक्षा कार्यों को प्राथमिकता देने की आवश्यकता बताई थी।
प्रशासन से तत्काल कार्रवाई की मांग (Yamuna River Flood Risk)
लगातार बढ़ते जलस्तर को देखते हुए स्थानीय लोगों ने प्रशासन से स्यानाचट्टी में नदी की चैनलाइजेशन, आरबीएम हटाने और तट सुरक्षा कार्यों में तेजी लाने की मांग की है। लोगों का कहना है कि मानसून अभी शुरुआती दौर में है और यदि समय रहते प्रभावी कदम नहीं उठाए गए तो यमुनोत्री धाम के इस महत्वपूर्ण पड़ाव को एक बार फिर बड़ी आपदा का सामना करना पड़ सकता है।
