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Himani Bhatt poem
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कुमाऊंनी कविता- “कदू भल लागू दाजयू हमर देवभूमि…” हिमानी भट्ट (काव्य संकलन देवभूमि दर्शन)

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कुमाऊंनी कविता- “कदू भल लागू दाजयू हमर देवभूमि…..”Himani Bhatt poem

कदू भल लागू दाजयू हमर देवभूमि,
कदू भल लागू याक तिथि – त्यार,
कदू भल लागू आपसी प्रेम – भाव,
मन करूं या रूणरक,जा छू हमर देवताओं क वास।
याक संस्कृति क कुछ अलग बात छू,
संस्कृति जमै सब रम जानी, सब मग्न है जानी, सैंडी घाघर और पिछौड में सजनी,
यौ छू हमर संस्कृति की बात,जमै सब खुश हैं जानी,
कदू भल लागू दाजयू हमर देवभूमि -2
ब्याह कार्यक्रम में छोलिया अपण नाच दिखुनी,जमै ढोल नगाण क थाप में सब झूम उठनी,जा सब लोग मिल जुल भेर अपण तीज त्यार मनूनी,
यौ छू दाजयू हमर अपण देवभूमि -2
कदू भल लागू दाजयू याक सौंदर्यकरण,याक ऐपण कला ,याक चारों धाम,जमै साक्षात देवी देवता विराजमान छन,
याक बोली भाषा,जमै सब मंत्रमुग्ध है जानी,
यौ छू दाजयू हमर अपण देवभूमि -2
कदू भल लागू दाजयू हमर देवभूमि।।-2
रचना- हिमानी भट्ट, हल्दूचौड़, जिला- नैनीताल (उत्तराखण्ड)
Himani Bhatt poem

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