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Uttarakhand new excise policy 2025
सांकेतिक फोटो Uttarakhand new excise policy 2025

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उत्तराखण्ड देहरादून

Uttarakhand excise policy 2025-26: उत्तराखण्ड न‌ई आबकारी नीति शराब महंगी जाने अहम प्रावधान

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Uttarakhand new excise policy 2025: ओवररेटिंग पर लाइसेंस होगा निरस्त, उप-दुकानों और मैट्रो मदिरा बिक्री व्यवस्था समाप्त, स्कूलों मंदिरों के पास की शराब की दुकानें होंगी बंद..

Uttarakhand new excise policy 2025: उत्तराखण्ड सरकार ने वर्ष 2025-26 के लिए न‌ई आबकारी नीति को मंजूरी दे दी है। बीते रोज हुई उत्तराखण्ड कैबिनेट की बैठक में यह महत्वपूर्ण फैसला लिया गया। आपको बता दें कि यह नीति आगामी 1 अप्रैल से सम्पूर्ण राज्य में लागू होगी। इस आबकारी नीति में क‌ई महत्वपूर्ण प्रावधानों को सम्मिलित किया गया है। जिनमें सबसे महत्वपूर्ण कदम धार्मिक क्षेत्रों की महत्ता को को ध्यान में रखते हुए उठाया गया है। बताया गया है कि आगामी वित्तीय वर्ष में मंदिरों एवं स्कूलों के पास की शराब की दुकानों को बंद किया जाएगा। इतना ही नहीं शराब की उप-दुकानों और मैट्रो मदिरा बिक्री व्यवस्था को प्रतिबंधित कर दिया गया है। इसके अतिरिक्त एमआरपी से अधिक कीमत पर शराब बेचने पर दुकान का लाइसेंस निरस्त करने का प्रावधान भी न‌ई आबकारी नीति में किया गया है साथ ही डिपार्टमेंटल स्टोर्स पर भी एमआरपी लागू की गई है।
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uttarakhand cabinet meeting today अभी तक मिल रही जानकारी के मुताबिक न‌ई आबकारी नीति के लागू होते ही आगामी अप्रैल माह से शराब के दामों में बढ़ोतरी भी देखने को मिल सकती है। ऐसे में मार्च माह में शराब के रिकार्ड तोड़ बिक्री होने की पूरी संभावना है। बताते चलें कि उत्तराखंड सरकार की इस नई आबकारी नीति के मुताबिक शराब कंपनियां अन्य राज्यों के मुकाबले बहुत अधिक कीमत नहीं बढ़ा सकेंगी। इसको देखते हुए भी यह बात समझने लायक है कि राजस्व लक्ष्य हासिल करने के लिए सरकार कम्पनियों को शराब के दामों में कुछ बढ़ोतरी करने की छूट दे सकती है। बताते चलें कि उत्तराखंड सरकार द्वारा इस आबकारी नीति के तहत वित्तीय वर्ष 2025-26 के लिए 5060 करोड़ रुपये के राजस्व लक्ष्य को निर्धारित किया गया है। इस न‌ई आबकारी नीति में जहां स्थानीय निवासियों को प्राथमिकता के आधार पर रोजगार के अवसर उपलब्ध कराने का प्रावधान किया गया है। वहीं थोक मदिरा की दुकानें केवल उत्तराखंड निवासियों के लिए आरक्षित की गई है। इसके अतिरिक्त पर्वतीय क्षेत्रों में वाइनरी को प्रोत्साहित करने के लिए राज्य में उत्पादित फलों से वाइनरी इकाइयों को अगले 15 वर्षों तक आबकारी शुल्क में छूट देने का प्रावधान भी किया गया है।
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